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Sonebhadra News: बारिश की फुहारों में झूमा मन, गर्मी से मिली राहत

Wed, 01 Jul 2026 12:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2026 12:15 AM IST
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The heart rejoiced amidst the drizzling rain; relief from the heat
रॉबर्ट्सगंज में हल्की बारिश में छाता लगाकर निकले लोग।संवाद
सोनभद्र। पिछले तीन दिनों से जिले में सक्रिय मानसून का असर मंगलवार को भी बना रहा। आसमान में पूरे दिन घटाएं छाई रही। बारिश की रिमझिम फुहारों ने लोगों को गर्मी से राहत पहुंचाई। सड़क पर कीचड़-फिसलन ने राहगीरों को परेशान किया तो ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव से लोगों को फजीहत उठानी पड़ी। उधर, मानसून की सक्रियता के साथ खेतों में भी हलचल बढ़ गई है। किसान धान की नर्सरी डालने तो कुछ जगह रोपाई की तैयारी में भी जुट गए हैं। गत रविवार की देर शाम मौसम अचानक बदल गया था। उमसभरी गर्मी से बेहाल लोगों को बारिश ने राहत दी तो इसके बाद से ही मौसम सुहाना बना हुआ है। अधिकतम तापमान भी लुढ़ककर 35-36 डिग्री तक आ गया है। मंगलवार को भी पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहे। रुक-रुककर रिमझिम बारिश का क्रम भी बना रहा। रॉबर्ट्सगंज नगर के मुख्य बाजार, सिविल लाइन, बढ़ौली सहित अन्य क्षेत्रों में बारिश का पानी सड़क पर लगने से राहगीरों को आवागमन में परेशानी झेलनी पड़ी। फ्लाईओवर के नीचे कई जगह बारिश का पानी लगने से कीचड़ हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र चुर्क के प्रेक्षक राजन सिंह ने बताया कि अधिकतम तापमान 35.8 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री के आसपास बना रहा। बुधवार को भी आसमान में बादल और बारिश की संभावना है। मानसून की वर्षा शुरू होने के साथ ही किसानों के लिए विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा भू-भौतिकी विभाग बीएचयू के नोडल अधिकारी प्रो. रवि शंकर सिंह एवं तकनीकी अधिकारी (मौसम वैज्ञानिक) शिव मंगल सिंह ने बताया कि मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दिनों में मानसून सक्रिय रहेगा। इस दौरान आसमान में बादल छाए रहने और कई स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों में पर्याप्त नमी होने पर धान की रोपाई का कार्य शुरू कर दें। वहीं सब्जी की फसलों में जलभराव से बचाव के लिए उचित जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि वर्षा या तेज हवा के दौरान किसी भी प्रकार का रासायनिक छिड़काव न करें। सभी कृषि कार्य, विशेषकर उर्वरक एवं कीटनाशकों का प्रयोग, शुष्क मौसम में ही करें ताकि उनका बेहतर प्रभाव मिल सके। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार तापमान और आर्द्रता बढ़ने से फसलों में कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है। ऐसे में किसान नियमित रूप से फसलों की निगरानी करें और आवश्यकता पड़ने पर ही पौध संरक्षण के उपाय अपनाएं। साथ ही खेतों में पानी का जमाव न होने दें, ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।
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