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Sultanpur News: नवजात की मौत पर परिजन भड़के, अस्पताल हुआ सील
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Tue, 13 Jan 2026 11:33 PM IST
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दा में अवैध अस्पताल सील करता कर्मचारी।-संवाद
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चांदा। सराय कल्याण निवासी संदीप उमर वैश्य के 19 दिन के पुत्र की मंगलवार सुबह कस्बा स्थित सहारा बाल चिकित्सालय में मौत हो गई। नवजात की मौत से भड़के परिजनों ने हंगामा कर अस्पताल गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। बवाल बढ़ते देखकर अस्पताल का संचालक भाग गया।
परिजनों ने चांदा थाने में तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। पीपी कमैचा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रार्थना पत्र देकर आरोपी चिकित्सालय संचालक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की भी मांग की। इधर, देर शाम तक परिजन निजी चिकित्सालय के बाहर धरने पर बैठे रहे। सीएमओ की ओर से गठित तीन सदस्यी टीम मौके पर पहुंची। परिजनों से बातकर वहां के कागजात खंगाले। अस्पताल का पंजीकरण नहीं मिला। जिसके बाद अस्पताल को सील कर दिया गया है। परिजनों ने बताया कि मासूम की तबीयत खराब होने पर उसे भर्ती कराया था।
पीड़ित संदीप उमर वैश्य ने बताया कि उनकी पत्नी किरन ने गत 26 दिसंबर को लंभुआ कस्बे के एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन से जुड़वा बच्चों (बालक) को जन्म दिया था। एक बच्चे की तबीयत उसी दिन खराब हो गई, तो परिजनों ने पास स्थित एक चिल्ड्रेन क्लीनिक में उसे भर्ती कराया। वहां उसकी दो जनवरी को मौत हो गई थी। वहां मौजूद क्लीनिक संचालक ने बताया कि उनका एक बाल चिकित्सालय चांदा कस्बे में संचालित है।
मंगलवार सुबह उनके दूसरे बच्चे की भी तबीयत अचानक खराब हो गई। उसे लेकर वह चांदा स्थित बाल चिकित्सालय पहुंचे। वहां बच्चे को भर्ती किया गया। आरोप है कि कुछ देर बाद चिकित्सालय संचालक ने बच्चे की तबीयत गंभीर बताते हुए उसे लखनऊ ले जाने को कहा। तभी बच्चे की मौत हो गई। नाराज परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। संदीप की मां निशा देवी ने आरोप लगाते हुए कहा कि हम लोगों को गुमराह करके चिकित्सक की नामौजूदगी में बच्चे का इलाज किया गया।
पीपी कमैचा सीएचसी के अधीक्षक डॉ. आरसी यादव ने बताया कि जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।
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परिजनों ने चांदा थाने में तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। पीपी कमैचा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रार्थना पत्र देकर आरोपी चिकित्सालय संचालक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की भी मांग की। इधर, देर शाम तक परिजन निजी चिकित्सालय के बाहर धरने पर बैठे रहे। सीएमओ की ओर से गठित तीन सदस्यी टीम मौके पर पहुंची। परिजनों से बातकर वहां के कागजात खंगाले। अस्पताल का पंजीकरण नहीं मिला। जिसके बाद अस्पताल को सील कर दिया गया है। परिजनों ने बताया कि मासूम की तबीयत खराब होने पर उसे भर्ती कराया था।
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पीड़ित संदीप उमर वैश्य ने बताया कि उनकी पत्नी किरन ने गत 26 दिसंबर को लंभुआ कस्बे के एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन से जुड़वा बच्चों (बालक) को जन्म दिया था। एक बच्चे की तबीयत उसी दिन खराब हो गई, तो परिजनों ने पास स्थित एक चिल्ड्रेन क्लीनिक में उसे भर्ती कराया। वहां उसकी दो जनवरी को मौत हो गई थी। वहां मौजूद क्लीनिक संचालक ने बताया कि उनका एक बाल चिकित्सालय चांदा कस्बे में संचालित है।
मंगलवार सुबह उनके दूसरे बच्चे की भी तबीयत अचानक खराब हो गई। उसे लेकर वह चांदा स्थित बाल चिकित्सालय पहुंचे। वहां बच्चे को भर्ती किया गया। आरोप है कि कुछ देर बाद चिकित्सालय संचालक ने बच्चे की तबीयत गंभीर बताते हुए उसे लखनऊ ले जाने को कहा। तभी बच्चे की मौत हो गई। नाराज परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। संदीप की मां निशा देवी ने आरोप लगाते हुए कहा कि हम लोगों को गुमराह करके चिकित्सक की नामौजूदगी में बच्चे का इलाज किया गया।
पीपी कमैचा सीएचसी के अधीक्षक डॉ. आरसी यादव ने बताया कि जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।