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Sultanpur News: पंचायत चुनाव टले तो प्रशासक राज तय, सियासी घेराबंदी तेज

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 06 Apr 2026 11:33 PM IST
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If Panchayat elections are postponed, administrator rule is certain, political siege intensifies
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सुल्तानपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी और संभावित प्रशासक नियुक्ति से सत्ताधारी दल को राजनीतिक बढ़त मिलने की आशंका के बीच विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना तेज कर दिया है। आरक्षण प्रक्रिया और मतदाता सूची के प्रकाशन में हो रही देरी से चुनावी कार्यक्रम अधर में है, जिससे तय समय में चुनाव कराना मुश्किल दिख रहा है।
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पंचायतीराज विभाग के मुताबिक ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई, क्षेत्र पंचायत प्रमुखों का 19 जुलाई और जिला पंचायत सदस्यों का 11 जुलाई को समाप्त हो रहा है। मौजूदा स्थिति में बचे समय में सिर्फ आरक्षण प्रक्रिया पूरी हो पाना ही संभव माना जा रहा है, जबकि अभी तक इस संबंध में कोई निर्देश जारी नहीं हुए हैं और मतदाता सूची भी प्रकाशित नहीं हो सकी है। ऐसे में यदि चुनाव समय पर नहीं होते हैं, तो पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जाने की संभावना है। इससे सरकारी तंत्र के जरिये सत्ताधारी दल को जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिल सकता है। इसी आशंका को लेकर विपक्षी दल चुनाव समय पर कराने की मांग पर अड़े हैं और देरी के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
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जिले की राजनीतिक स्थिति पर नजर डालें तो 14 ब्लॉकों में भाजपा समर्थित क्षेत्र पंचायत प्रमुख काबिज हैं, जबकि 45 जिला पंचायत सदस्य पदों में से दो पर भाजपा की जीत के बावजूद अध्यक्ष पद पर पार्टी का कब्जा है। 979 ग्राम पंचायतों में भी अधिकांश प्रधान सत्ताधारी दल के साथ बताए जाते हैं।
पार्टी की लोकप्रियता से घबरा गई है बीजेपी
भाजपा के पास चुनाव के लिए कुछ मुद्दा बचा नहीं है। मंहगाई से आमजनता त्रस्त है। गैस व पेट्रोल के लिए लोग धूप में लाइन लगा रहे हैं। ऐसे में भाजपा पंचायत चुनाव करा देगी तो यही जनता उनको जवाब दे देगी। इनके सभी उम्मीदवार चुनाव हार जाएंगे। सपा की बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा घबरा गई है। वह पंचायत चुनाव टालने के मूड में है।
रघुवीर यादव, जिलाध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कांग्रेस मजबूत
भाजपा को जनता के आक्रोश का डर सता रहा है, इसलिए चुनाव को टाला जा रहा है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का फाइनल रण साबित होगा। कांग्रेस पार्टी इस चुनाव को पूरी गंभीरता से ले रही है और इसकी पहले से ही तैयारी पूरी कर चुकी है। सभी वार्डों में पार्टी ने मजबूत प्रत्याशी चिह्नित किए हैं। पार्टी इस बार पंचायत चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगी, जिसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव में दिखाई देगा।
अभिषेक सिंह राणा, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस

भाजपा का तंत्र कमजोर
सभी कार्य संविधान के मुताबिक होने चाहिए। समय पर पंचायत चुनाव की व्यवस्था संविधान में है। भाजपा का तंत्र कमजोर हुआ है। इसकी वजह से पार्टी चुनाव को खिसकाने के चक्कर में हैं। समय पर चुनाव में होने पर भाजपा को विधानसभा में नुकसान झेलना पड़ेगा। इसी से भाजपा डर रही है।
सुरेश कुमार गौतम, जिलाध्यक्ष, बसपा
जनता का खोया विश्वास
सूबे में योगी सरकार की नाकामी ने जनता में भाजपा के प्रति अविश्वास पैदा कर दिया है। यदि सरकार चाहती तो समय पर चुनाव करा सकती थी, लेकिन हार के डर से भाजपा सरकार पंचायत चुनाव आगे बढ़ा रही है। सुरेश चंद्र, जिलाध्यक्ष, आप
पार्टी हमेशा तैयार, सरकार व कोर्ट का निर्णय सर्वोपरि
पार्टी व सरकार जनता के लिए काम कर रही है। बूथ स्तर तक संगठन है। तैयारियों को देखते हुए पार्टी 24 घंटे पंचायत चुनाव के लिए तैयार है। कोर्ट व सरकार का निर्णय सर्वोपरि होगा। चुनाव समय पर होने व खिसकने पर पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। आमलोग पार्टी के साथ हैं।
सुशील त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष, भाजपा
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