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Sultanpur News: पंजीकरण से दवा तक लंबी लाइन, खराब लिफ्ट ने बढ़ाई बुजुर्गों की परेशानी
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मेडिकल कॉलेज में दवा लेने के लिए कतार में लगे मरीज व तीमारदार।
- फोटो : मेडिकल कॉलेज में दवा लेने के लिए कतार में लगे मरीज व तीमारदार।
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सुल्तानपुर। साहब... एक सप्ताह से बुखार झेल रहे हैं। पर्चा बनावाने के लिए सुबह ही अस्पताल आ गए थे। दो घंटे लाइन में खड़े रहे। इस बीच कई बार चक्कर आने से गिरते-गिरते बचा। सुरक्षा गार्ड फर्श पर बैठने नहीं दे रहे थे। कई बार तो इच्छा हुई कि बिना इलाज के ही घर लौट जाऊं। मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने आए रंग बहादुर समेत सैंकड़ों मरीजों का यही हाल रहा।
मेडिकल कॉलेज का नजारा सोमवार को किसी मेले जैसा दिखा, फर्क बस इतना कि यहां लोग इलाज की आस लेकर पहुंचे थे। छुट्टी के बाद ओपीडी खुली तो सुबह से ही मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। पुरुष अस्पताल में 1875 नए मरीजों ने पंजीकरण कराया, जबकि 1500 के करीब पुराने मरीज भी इलाज के लिए पहुंचे। महिला अस्पताल में भी लगभग 500 मरीज पहुंचे।
सबसे ज्यादा दबाव पंजीकरण और दवा काउंटर पर दिखा। कतार इतनी लंबी थी कि लाइन कई बार काउंटर से बाहर तक पहुंच गई। खांसी-जुकाम से परेशान संतोष शर्मा ने बताया कि पूर्वाह्न करीब 11 बजे पहुंचने के बाद भी एक घंटे में परचा बन सका। इसके बाद डॉक्टर को दिखाया और दवा लेने के लिए फिर लंबी लाइन में लगना पड़ा। एक सप्ताह से बुखार झेल रहे रंग बहादुर ने बताया कि कतार देखकर कई बार लौट जाने का मन हुआ, लेकिन मजबूरी में इलाज कराना पड़ा। तीन अलग-अलग जगह लाइन में लगना पड़ा। खड़े-खड़े पैर में दर्द होने लगा। यही हाल ज्यादातर मरीजों का रहा।
फर्श पर बैठने से रोकते दिखे सुरक्षा गार्ड
महिला मरीजों को बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने से ज्यादा परेशानी हुई। प्रेमा देवी ने बताया कि इलाज के बाद बैठने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। फर्श पर खाली जगह देखकर बैठने पर सुरक्षाकर्मी टोक देते हैं। बुजुर्ग और मरीजों के लिए यह स्थिति और ज्यादा मुश्किल भरी रही।
लिफ्ट खराब, सीढ़ियों से आने-जाने पर फूलने लगी सांस
अस्पताल में लगी लिफ्टें लंबे समय से खराब हैं। सोमवार को मरीजों के लिए लगी दो लिफ्टों में से सिर्फ एक ही चल रही थी। आंख की जांच कराने आए श्रीराम प्रजापति ने बताया कि सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते सांस फूल गई। तीसरे तल पर भर्ती मरीज को देखने पहुंचे निर्भय ने कहा कि ऊपर पहुंचते-पहुंचते हालत खराब हो गई। महिला अस्पताल में भी दो में से एक लिफ्ट ही चालू है।
मरीज बढ़ने पर होती है समस्या
छुट्टी के बाद ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। सभी मरीजों का इलाज किया गया है। खराब लिफ्ट को ठीक कराने के लिए पत्राचार किया गया है।- डॉ. आरके मिश्रा, सीएमएस मेडिकल कॉलेज
सुधार के सुझाव
-छुट्टी के बाद के दिनों में ओपीडी में अस्थायी अतिरिक्त काउंटर खोले जाएं।
-पंजीकरण और दवा काउंटर पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती हो।
-बुजुर्गों, महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए अलग लाइन लगाई जाए।
-खराब पड़ी लिफ्टों की तत्काल मरम्मत कराई जाए या वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
-ओपीडी क्षेत्र में बैठने की पर्याप्त कुर्सियाें की व्यवस्था हो।
-मरीजों की भीड़ को देखते हुए डॉक्टरों की संख्या अस्थायी रूप से बढ़ाई जाए।
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मेडिकल कॉलेज का नजारा सोमवार को किसी मेले जैसा दिखा, फर्क बस इतना कि यहां लोग इलाज की आस लेकर पहुंचे थे। छुट्टी के बाद ओपीडी खुली तो सुबह से ही मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। पुरुष अस्पताल में 1875 नए मरीजों ने पंजीकरण कराया, जबकि 1500 के करीब पुराने मरीज भी इलाज के लिए पहुंचे। महिला अस्पताल में भी लगभग 500 मरीज पहुंचे।
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सबसे ज्यादा दबाव पंजीकरण और दवा काउंटर पर दिखा। कतार इतनी लंबी थी कि लाइन कई बार काउंटर से बाहर तक पहुंच गई। खांसी-जुकाम से परेशान संतोष शर्मा ने बताया कि पूर्वाह्न करीब 11 बजे पहुंचने के बाद भी एक घंटे में परचा बन सका। इसके बाद डॉक्टर को दिखाया और दवा लेने के लिए फिर लंबी लाइन में लगना पड़ा। एक सप्ताह से बुखार झेल रहे रंग बहादुर ने बताया कि कतार देखकर कई बार लौट जाने का मन हुआ, लेकिन मजबूरी में इलाज कराना पड़ा। तीन अलग-अलग जगह लाइन में लगना पड़ा। खड़े-खड़े पैर में दर्द होने लगा। यही हाल ज्यादातर मरीजों का रहा।
फर्श पर बैठने से रोकते दिखे सुरक्षा गार्ड
महिला मरीजों को बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने से ज्यादा परेशानी हुई। प्रेमा देवी ने बताया कि इलाज के बाद बैठने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। फर्श पर खाली जगह देखकर बैठने पर सुरक्षाकर्मी टोक देते हैं। बुजुर्ग और मरीजों के लिए यह स्थिति और ज्यादा मुश्किल भरी रही।
लिफ्ट खराब, सीढ़ियों से आने-जाने पर फूलने लगी सांस
अस्पताल में लगी लिफ्टें लंबे समय से खराब हैं। सोमवार को मरीजों के लिए लगी दो लिफ्टों में से सिर्फ एक ही चल रही थी। आंख की जांच कराने आए श्रीराम प्रजापति ने बताया कि सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते सांस फूल गई। तीसरे तल पर भर्ती मरीज को देखने पहुंचे निर्भय ने कहा कि ऊपर पहुंचते-पहुंचते हालत खराब हो गई। महिला अस्पताल में भी दो में से एक लिफ्ट ही चालू है।
मरीज बढ़ने पर होती है समस्या
छुट्टी के बाद ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। सभी मरीजों का इलाज किया गया है। खराब लिफ्ट को ठीक कराने के लिए पत्राचार किया गया है।- डॉ. आरके मिश्रा, सीएमएस मेडिकल कॉलेज
सुधार के सुझाव
-छुट्टी के बाद के दिनों में ओपीडी में अस्थायी अतिरिक्त काउंटर खोले जाएं।
-पंजीकरण और दवा काउंटर पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती हो।
-बुजुर्गों, महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए अलग लाइन लगाई जाए।
-खराब पड़ी लिफ्टों की तत्काल मरम्मत कराई जाए या वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
-ओपीडी क्षेत्र में बैठने की पर्याप्त कुर्सियाें की व्यवस्था हो।
-मरीजों की भीड़ को देखते हुए डॉक्टरों की संख्या अस्थायी रूप से बढ़ाई जाए।
