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Sultanpur News: तथ्य एवं तर्क ज्ञान के लिए अखबार जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Wed, 21 Jan 2026 11:49 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी कार्यालय में आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में शामिल शिक्षक। संवाद
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सुल्तानपुर। विद्यार्थियों में आलोचनात्मक और तार्किक क्षमता विकसित करने में अखबार की भूमिका शीर्षक पर बुधवार को अमर उजाला संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। संवाद न्यूज एजेंसी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में जीडी गोयनका स्कूल की प्रधानाचार्या सपना तिवारी ने कहा कि
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया की लत ने बच्चों के सोचने समझने की शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। अटेवा जिलाध्यक्ष अशोक सिंह ने कहा कि इंग्लिश मीडियम स्कूलों में अध्ययन कर रहे बच्चे शुद्ध हिंदी नहीं लिख पा रहे हैं।
शेम्फोर्ड फ्यूचरिस्टिक स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. अजय तिवारी ने कहा कि वर्तनी सही करने के लिए अखबारों का नियमित अध्ययन करना बहुत जरूरी है, ताकि बच्चों में शब्दकोश व भाषाई ज्ञान को बढ़ाया जा सके। जीजीआईसी की प्रधानाचार्या पल्लवी सिंह ने कहा कि मोबाइल के युग ने विद्यार्थियों ही नहीं, बड़ों को भी अखबार से दूर किया है। इसका दुष्प्रभाव भी देखने को मिल रहा है।
सेंट जेवियर्स इंटरनेशनल स्कूल ओमनगर की प्रधानाचार्या सुकांक्षा अवस्थी ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रहे अधूरे ज्ञान से नुकसान हो रहा है। सिस्टर नीतू इंटरनेशनल स्कूल कुतुबपुर के प्रधानाचार्य संदीप गुप्ता ने कहा कि अखबार को आज भी वास्तविक सूचना का माध्यम माना जा रहा है। शहर के जीआईसी के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि किसी भी प्रतियोगिता की तैयारी के लिए अखबार का अध्ययन जरूरी है। घरों में अखबार मंगाया जाय, ताकि बच्चे पढ़ें। सभी स्कूल में भी इसका अध्ययन कराया जाए। राजकीय पुस्तकालय प्रभारी केशव प्रसाद सिंह ने कहा कि अखबार के अध्ययन से बच्चे तथ्य और तर्क से परिचित होते हैं। शिक्षकों का दायित्व है कि अखबार पढ़ने के लिए बच्चों को प्रेरित करें। शिक्षक नेता रणवीर सिंह ने कहा कि भाषाई ज्ञान के लिए अखबार का अध्ययन बहुत जरूरी है। अखबार ही नहीं, अच्छी पत्रिकाएं भी ज्ञान बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं।
लिटिल फ्लॉवर्स स्कूल ओमनगर के डायरेक्टर प्रमोद पांडेय ने कहा कि भाषाई ज्ञान और हिंदी में प्रवीणता के लिए अखबार बहुत जरूरी है। हिंदी में अक्सर बच्चों के कम अंक प्राप्त हो रहे हैं। शिक्षक नेता निजाम खान ने कहा कि हमें सोशल मीडिया के अधिक प्रयोग से बचना होगा। केएनआईसीई करौंदिया के प्रधानाचार्य डॉ. एनडी सिंह ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के समय अक्सर देखा जाता है कि अभिभावक सोशल मीडिया पर व्यस्त रहते हैं। यह स्थिति खतरनाक है।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष दिलीप पांडेय ने कहा कि बच्चों में पढ़ने की आदत डालनी होगी। समाचार पत्र-पत्रिकाएं पढ़ेंगे तो उनके शब्द भंडार बढ़ेंगे। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री डॉ. एचबी सिंह ने कहा कि बच्चे अखबार पढ़ें, इसके लिए अभिभावकों के साथ ही शिक्षकों को भी ध्यान देने की जरूरत है।
जीडी गोयनका स्कूल की शिक्षिका निष्ठा तिवारी ने कहा कि जब हम अखबार पढ़ते हैं तो तमाम जानकारियां मिलती हैं, जो सामान्य जीवन में भी कारगर सिद्ध होती हैं।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया की लत ने बच्चों के सोचने समझने की शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। अटेवा जिलाध्यक्ष अशोक सिंह ने कहा कि इंग्लिश मीडियम स्कूलों में अध्ययन कर रहे बच्चे शुद्ध हिंदी नहीं लिख पा रहे हैं।
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शेम्फोर्ड फ्यूचरिस्टिक स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. अजय तिवारी ने कहा कि वर्तनी सही करने के लिए अखबारों का नियमित अध्ययन करना बहुत जरूरी है, ताकि बच्चों में शब्दकोश व भाषाई ज्ञान को बढ़ाया जा सके। जीजीआईसी की प्रधानाचार्या पल्लवी सिंह ने कहा कि मोबाइल के युग ने विद्यार्थियों ही नहीं, बड़ों को भी अखबार से दूर किया है। इसका दुष्प्रभाव भी देखने को मिल रहा है।
सेंट जेवियर्स इंटरनेशनल स्कूल ओमनगर की प्रधानाचार्या सुकांक्षा अवस्थी ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रहे अधूरे ज्ञान से नुकसान हो रहा है। सिस्टर नीतू इंटरनेशनल स्कूल कुतुबपुर के प्रधानाचार्य संदीप गुप्ता ने कहा कि अखबार को आज भी वास्तविक सूचना का माध्यम माना जा रहा है। शहर के जीआईसी के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि किसी भी प्रतियोगिता की तैयारी के लिए अखबार का अध्ययन जरूरी है। घरों में अखबार मंगाया जाय, ताकि बच्चे पढ़ें। सभी स्कूल में भी इसका अध्ययन कराया जाए। राजकीय पुस्तकालय प्रभारी केशव प्रसाद सिंह ने कहा कि अखबार के अध्ययन से बच्चे तथ्य और तर्क से परिचित होते हैं। शिक्षकों का दायित्व है कि अखबार पढ़ने के लिए बच्चों को प्रेरित करें। शिक्षक नेता रणवीर सिंह ने कहा कि भाषाई ज्ञान के लिए अखबार का अध्ययन बहुत जरूरी है। अखबार ही नहीं, अच्छी पत्रिकाएं भी ज्ञान बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं।
लिटिल फ्लॉवर्स स्कूल ओमनगर के डायरेक्टर प्रमोद पांडेय ने कहा कि भाषाई ज्ञान और हिंदी में प्रवीणता के लिए अखबार बहुत जरूरी है। हिंदी में अक्सर बच्चों के कम अंक प्राप्त हो रहे हैं। शिक्षक नेता निजाम खान ने कहा कि हमें सोशल मीडिया के अधिक प्रयोग से बचना होगा। केएनआईसीई करौंदिया के प्रधानाचार्य डॉ. एनडी सिंह ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के समय अक्सर देखा जाता है कि अभिभावक सोशल मीडिया पर व्यस्त रहते हैं। यह स्थिति खतरनाक है।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष दिलीप पांडेय ने कहा कि बच्चों में पढ़ने की आदत डालनी होगी। समाचार पत्र-पत्रिकाएं पढ़ेंगे तो उनके शब्द भंडार बढ़ेंगे। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री डॉ. एचबी सिंह ने कहा कि बच्चे अखबार पढ़ें, इसके लिए अभिभावकों के साथ ही शिक्षकों को भी ध्यान देने की जरूरत है।
जीडी गोयनका स्कूल की शिक्षिका निष्ठा तिवारी ने कहा कि जब हम अखबार पढ़ते हैं तो तमाम जानकारियां मिलती हैं, जो सामान्य जीवन में भी कारगर सिद्ध होती हैं।
