{"_id":"6a29aedb6ccecab9ee0d07f3","slug":"no-headway-even-after-questioning-77-suspects-police-stirred-into-action-following-the-courts-stern-stance-sultanpur-news-c-103-1-slko1043-158151-2026-06-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sultanpur News: 77 पेशियों पर भी नहीं हुआ पेश, कोर्ट की सख्ती के बाद जागी पुलिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sultanpur News: 77 पेशियों पर भी नहीं हुआ पेश, कोर्ट की सख्ती के बाद जागी पुलिस
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Thu, 11 Jun 2026 12:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सुल्तानपुर। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतीक आर्या की ओर से डीजीपी को आदेश जारी किए जाने के बाद बुधवार को पुलिस विभाग की टीम अदालत पहुंची और मामले की पत्रावली की पड़ताल की। एनआई एक्ट के एक चर्चित मामले में 77 पेशियां गुजरने, गैर जमानती वारंट जारी होने और हाईकोर्ट के समयबद्ध निस्तारण के आदेश के बावजूद आरोपी की गैरहाजिरी पर अदालत की सख्ती के बाद पुलिस महकमा सक्रिय हो गया है।
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी रजनीश शर्मा के खिलाफ तीन अगस्त 2019 को तलब आदेश जारी हुआ था। इसके बाद 12 पेशियों तक समन, तीन पेशियों तक जमानती वारंट और सात अप्रैल 2022 को गैर जमानती वारंट जारी किया गया। इसके बावजूद आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। एनबीडब्ल्यू जारी होने के बाद भी 52 से अधिक पेशियां गुजर गईं। कुल मिलाकर 77 पेशियों के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी या पेशी सुनिश्चित नहीं हो सकी।
बुधवार को पुलिस टीम ने समन, वारंट, एनबीडब्ल्यू और न्यायालय द्वारा समय-समय पर पुलिस कमिश्नर लखनऊ व अन्य अधिकारियों को भेजे गए आदेशों का ब्योरा जुटाया। टीम ने यह भी जांचा कि आखिर किन कारणों से वर्षों तक न्यायालयी आदेशों का प्रभावी अनुपालन नहीं हो सका। हाईकोर्ट ने 26 अगस्त 2025 को छह माह में वाद के निस्तारण का निर्देश दिया था। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी आरोपी की गैरहाजिरी के चलते सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी। इसी पर नाराज अदालत ने डीजीपी को आदेश जारी कर जवाबदेही तय करने की पहल की है।
विज्ञापन
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी रजनीश शर्मा के खिलाफ तीन अगस्त 2019 को तलब आदेश जारी हुआ था। इसके बाद 12 पेशियों तक समन, तीन पेशियों तक जमानती वारंट और सात अप्रैल 2022 को गैर जमानती वारंट जारी किया गया। इसके बावजूद आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। एनबीडब्ल्यू जारी होने के बाद भी 52 से अधिक पेशियां गुजर गईं। कुल मिलाकर 77 पेशियों के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी या पेशी सुनिश्चित नहीं हो सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन
बुधवार को पुलिस टीम ने समन, वारंट, एनबीडब्ल्यू और न्यायालय द्वारा समय-समय पर पुलिस कमिश्नर लखनऊ व अन्य अधिकारियों को भेजे गए आदेशों का ब्योरा जुटाया। टीम ने यह भी जांचा कि आखिर किन कारणों से वर्षों तक न्यायालयी आदेशों का प्रभावी अनुपालन नहीं हो सका। हाईकोर्ट ने 26 अगस्त 2025 को छह माह में वाद के निस्तारण का निर्देश दिया था। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी आरोपी की गैरहाजिरी के चलते सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी। इसी पर नाराज अदालत ने डीजीपी को आदेश जारी कर जवाबदेही तय करने की पहल की है।