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Sultanpur News: महिला अस्पताल की आस होगी पूरी, दो हजार महिलाओं को मिलेगा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Mon, 02 Feb 2026 12:17 AM IST
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सुल्तानपुर। जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड किया जा चुका है। जिला अस्पताल का अस्तित्व खत्म होने के बाद से ही एक अलग अस्पताल की मांग कई दिनों से की जा रही है। केंद्रीय आम बजट में यह उम्मीद पूरी हुई।
महिलाओं के स्वास्थ्य सुविधा के लिए एक अस्पताल खोले जाने की बात कही गई है। जिले में रोजाना करीब दो हजार महिलाओं को इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की बच्चियों के लिए एक छात्रावास बनाने का प्रावधान शिक्षा के क्षेत्र में उपयोगी सिद्ध होगा। जिले में 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 47 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। महिला अस्पताल नहीं है।
केंद्रीय बजट में जिले को महिला अस्पताल और छात्रावास का तोहफा मिला है। एक अदद जिला अस्पताल के लिए तरस रहे जिले को महिला अस्पताल की सौगात देकर सरकार ने हेल्थ सेक्टर पर बड़ा फोकस किया है। अचानक बीमारी, हार्ट अटैक, एक्सीडेंट या गंभीर चोट की स्थिति में सबसे ज्यादा जरूरत तुरंत इलाज की होती है, अभी जिले में मरीजों को प्राथमिक इलाज के बाद बड़े शहरों में रेफर करना पड़ता है, जिससे समय और जान दोनों का नुकसान होता है। आधुनिक इमरजेंसी वार्ड बनने से मरीज को तुरंत इलाज मिलेगा और गंभीर स्थिति को संभालना आसान होगा।
ट्रॉमा सेंटर से बचेगी अनमोल जिंदगियां
सड़क हादसे, औद्योगिक दुर्घटनाएं और आपदाओं के मामलों में ट्रॉमा सेंटर की भूमिका बेहद अहम होती है। यहां विशेष डॉक्टर, प्रशिक्षित स्टाफ और आधुनिक उपकरण उपलब्ध होते हैं। जिले में ट्रॉमा सेंटर बना है, लेकिन वह सुचारू रूप से चलाया नहीं जा सका। जिसके बाद उसे मेडिकल कॉलेज के अधीन कर दिया गया, फिर भी स्वास्थ्य सुविधा में कोई सुधार नहीं हुआ। इस बार बजट में अलग से ट्रॉमा सेंटर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। नया ट्रॉमा सेंटर बनने से गंभीर रूप से घायल मरीजों को गोल्डन ऑवर में इलाज मिल सकेगा। इमरजेंसी वार्ड और ट्रॉमा सेंटर के साथ अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल सुविधाओं में भी सुधार होगा।
जिले में करीब 127 कैंसर मरीजों को होगा फायदा
कैंसर की दवाओं और इलाज सस्ता होने से जिले के करीब 127 कैंसर रोगियों को फायदा मिलेगा। हालांकि हर जिले में डे केयर यूनिट का सही संचालन अभी भी नहीं हो सका है, लेकिन उम्मीद है कि इस बार यह यूनिट संचालित हो सकेगी। इसके संचालन से कैंसर रोगियों को इलाज जिले में ही हो सकेगा। इसके अलावा शुगर रोगियों की दवाएं सस्ती होने से हजारों लोगों को महंगे इलाज से निजात मिल सकेगी।
महिला छात्रावास की कमी होगी पूरी
जिले में अभी एक राजकीय छात्रावास संचालित है। कई वर्षों के इंतजार के बाद इसे अभी पिछले महीने शुरू किया गया है। अब नया महिला छात्रावास बनने से उच्च शिक्षा के लिए दूर जाने वाली छात्राओं को रहने की सुविधा मिल सकेगी। यह सुविधा उन छात्राओं के लिए काफी अहम होगी, जो ग्रामीण परिवेश में रहकर पढ़ाई करती हैं। केएनआईटी की छात्रा आयुषी यादव, रिया सिंह, मानवी केसरवानी और वंशिका खटाना ने बताया कि आज की सबसे बड़ी समस्या लड़कियों को उच्च शिक्षा ग्रहण करते समय रुकने और ठहराव की होती है, सरकार का जिले में महिला छात्रावास बनाने का निर्णय बेहद अहम है।
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महिलाओं के स्वास्थ्य सुविधा के लिए एक अस्पताल खोले जाने की बात कही गई है। जिले में रोजाना करीब दो हजार महिलाओं को इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की बच्चियों के लिए एक छात्रावास बनाने का प्रावधान शिक्षा के क्षेत्र में उपयोगी सिद्ध होगा। जिले में 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 47 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। महिला अस्पताल नहीं है।
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केंद्रीय बजट में जिले को महिला अस्पताल और छात्रावास का तोहफा मिला है। एक अदद जिला अस्पताल के लिए तरस रहे जिले को महिला अस्पताल की सौगात देकर सरकार ने हेल्थ सेक्टर पर बड़ा फोकस किया है। अचानक बीमारी, हार्ट अटैक, एक्सीडेंट या गंभीर चोट की स्थिति में सबसे ज्यादा जरूरत तुरंत इलाज की होती है, अभी जिले में मरीजों को प्राथमिक इलाज के बाद बड़े शहरों में रेफर करना पड़ता है, जिससे समय और जान दोनों का नुकसान होता है। आधुनिक इमरजेंसी वार्ड बनने से मरीज को तुरंत इलाज मिलेगा और गंभीर स्थिति को संभालना आसान होगा।
ट्रॉमा सेंटर से बचेगी अनमोल जिंदगियां
सड़क हादसे, औद्योगिक दुर्घटनाएं और आपदाओं के मामलों में ट्रॉमा सेंटर की भूमिका बेहद अहम होती है। यहां विशेष डॉक्टर, प्रशिक्षित स्टाफ और आधुनिक उपकरण उपलब्ध होते हैं। जिले में ट्रॉमा सेंटर बना है, लेकिन वह सुचारू रूप से चलाया नहीं जा सका। जिसके बाद उसे मेडिकल कॉलेज के अधीन कर दिया गया, फिर भी स्वास्थ्य सुविधा में कोई सुधार नहीं हुआ। इस बार बजट में अलग से ट्रॉमा सेंटर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। नया ट्रॉमा सेंटर बनने से गंभीर रूप से घायल मरीजों को गोल्डन ऑवर में इलाज मिल सकेगा। इमरजेंसी वार्ड और ट्रॉमा सेंटर के साथ अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल सुविधाओं में भी सुधार होगा।
जिले में करीब 127 कैंसर मरीजों को होगा फायदा
कैंसर की दवाओं और इलाज सस्ता होने से जिले के करीब 127 कैंसर रोगियों को फायदा मिलेगा। हालांकि हर जिले में डे केयर यूनिट का सही संचालन अभी भी नहीं हो सका है, लेकिन उम्मीद है कि इस बार यह यूनिट संचालित हो सकेगी। इसके संचालन से कैंसर रोगियों को इलाज जिले में ही हो सकेगा। इसके अलावा शुगर रोगियों की दवाएं सस्ती होने से हजारों लोगों को महंगे इलाज से निजात मिल सकेगी।
महिला छात्रावास की कमी होगी पूरी
जिले में अभी एक राजकीय छात्रावास संचालित है। कई वर्षों के इंतजार के बाद इसे अभी पिछले महीने शुरू किया गया है। अब नया महिला छात्रावास बनने से उच्च शिक्षा के लिए दूर जाने वाली छात्राओं को रहने की सुविधा मिल सकेगी। यह सुविधा उन छात्राओं के लिए काफी अहम होगी, जो ग्रामीण परिवेश में रहकर पढ़ाई करती हैं। केएनआईटी की छात्रा आयुषी यादव, रिया सिंह, मानवी केसरवानी और वंशिका खटाना ने बताया कि आज की सबसे बड़ी समस्या लड़कियों को उच्च शिक्षा ग्रहण करते समय रुकने और ठहराव की होती है, सरकार का जिले में महिला छात्रावास बनाने का निर्णय बेहद अहम है।
