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Sultanpur News: पांच वर्षों से टंकी नहीं हुई सफाई, 20 हजार यात्रियों की सेहत से खिलवाड़
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Tue, 17 Mar 2026 11:33 PM IST
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रोडवेज परिसर में स्थापित वाटरकूलर का पानी पीता यात्री। संवाद
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सुल्तानपुर। शहर के रोडवेज परिसर में प्यास बुझाने का जरिया अब बीमारी बांटने का माध्यम बन गया है। यहां लगी पानी की टंकी पांच वर्षों से साफ नहीं हुई है। रोजाना इसी टंकी से 15 से 20 हजार यात्रियों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। इस लापरवाही से जिम्मेदार भी अनजान बने हैं। यहां के कर्मचारियों के मुताबिक परिसर में लगी टंकी की सफाई पांच वर्षों से नहीं हुई है।
गर्मी बढ़ते ही समस्या और विकराल हो गई है। परिसर में लगा वाटरकूलर सुविधा नहीं, बल्कि औपचारिकता बनकर रह गया है। इससे निकलने वाला पानी न ठंडा है और न ही सुरक्षित। यात्रियों का कहना है कि पानी में बदबू आती है और पीने में खराब लगता है। मंगलवार को मौके पर हकीकत सामने आई। प्यासे यात्री या तो यही दूषित पानी पी रहे थे या फिर जेब से पैसे खर्च कर बोतलबंद पानी खरीद रहे थे।
बस्ती जाने वाले राहुल कुमार ने बताया कि पानी पीने लायक नहीं था, मजबूरी में बाहर से 20 रुपये की बोतल लेनी पड़ी। एक कर्मचारी ने बताया कि टंकी का पानी पीने लायक नहीं है, इसीलिए घर से पानी लाते हैं या बाहर से खरीदते हैं।
इनसेट
हर साल टंकी की सफाई जरूरी
नियमों के मुताबिक हर साल टंकी की सफाई और क्लोरीनेशन जरूरी है, लेकिन पांच साल से कोई अमल नहीं हुआ। नलकूप से भरा जा रहा पानी बिना शुद्ध किए सीधे लोगों तक पहुंच रहा है। अधिकांश यात्रियों को टंकी की इस सच्चाई की जानकारी ही नहीं है। वे अनजाने में यही दूषित पानी पी रहे हैं, जिससे डायरिया, उल्टी-दस्त और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। मामला उजागर होने के बाद एआरएम सुरेश चंद्र यादव ने सफाई और क्लोरीनेशन कराने की बात कही है।
यात्रियों की सुविधा सर्वोपरी
क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) विमल राजन ने बताया कि यात्रियों की सुविधा सर्वोपरि है। संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई भी की जाएगी।
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गर्मी बढ़ते ही समस्या और विकराल हो गई है। परिसर में लगा वाटरकूलर सुविधा नहीं, बल्कि औपचारिकता बनकर रह गया है। इससे निकलने वाला पानी न ठंडा है और न ही सुरक्षित। यात्रियों का कहना है कि पानी में बदबू आती है और पीने में खराब लगता है। मंगलवार को मौके पर हकीकत सामने आई। प्यासे यात्री या तो यही दूषित पानी पी रहे थे या फिर जेब से पैसे खर्च कर बोतलबंद पानी खरीद रहे थे।
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बस्ती जाने वाले राहुल कुमार ने बताया कि पानी पीने लायक नहीं था, मजबूरी में बाहर से 20 रुपये की बोतल लेनी पड़ी। एक कर्मचारी ने बताया कि टंकी का पानी पीने लायक नहीं है, इसीलिए घर से पानी लाते हैं या बाहर से खरीदते हैं।
इनसेट
हर साल टंकी की सफाई जरूरी
नियमों के मुताबिक हर साल टंकी की सफाई और क्लोरीनेशन जरूरी है, लेकिन पांच साल से कोई अमल नहीं हुआ। नलकूप से भरा जा रहा पानी बिना शुद्ध किए सीधे लोगों तक पहुंच रहा है। अधिकांश यात्रियों को टंकी की इस सच्चाई की जानकारी ही नहीं है। वे अनजाने में यही दूषित पानी पी रहे हैं, जिससे डायरिया, उल्टी-दस्त और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। मामला उजागर होने के बाद एआरएम सुरेश चंद्र यादव ने सफाई और क्लोरीनेशन कराने की बात कही है।
यात्रियों की सुविधा सर्वोपरी
क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) विमल राजन ने बताया कि यात्रियों की सुविधा सर्वोपरि है। संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई भी की जाएगी।