{"_id":"6a5d20ca5da082dbc0064d07","slug":"fir-registered-against-four-people-including-the-hospital-operator-and-two-doctors-unnao-news-c-221-1-uno1001-154116-2026-07-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Unnao News: अस्पताल संचालक, दो डॉक्टर सहित चार पर प्राथमिकी दर्ज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Unnao News: अस्पताल संचालक, दो डॉक्टर सहित चार पर प्राथमिकी दर्ज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- होप अस्पताल में महिला मरीज के इलाज में लापरवाही से हुई मौत
- पुलिस के सुनवाई न करने पर न्यायालय की ली शरण, तब हुई कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। सिंगरोसी निवासी युवक ने शहर के अकरमपुर स्थित होप अस्पताल के मालिक, दो डॉक्टर सहित चार पर इलाज में लापरवाही से चाची की मौत होने की प्राथमिकी दर्ज कराई है। पीड़ित के मुताबिक पुलिस के कार्रवाई न करने पर उसने न्यायालय की शरण ली तब कार्रवाई हुई।
सदर कोतवाली के सिंगरोसी निवासी अविनाश चौधरी ने बताया कि उसने चाची अनीता को उर्सला अस्पताल के डॉ. मुन्नालाल विश्वकर्मा के कहने पर उनके रिश्तेदार शहर के अकरमपुर निवासी अजय विश्वकर्मा के होप अस्पताल में एक अप्रैल 2026 को भर्ती कराया था। भर्ती करते समय 80 हजार रुपये जमा कराए गए। कहा गया कि पैसों की और जरूरत पड़ेगी। दूसरे दिन अजय विश्वकर्मा और डॉ. रश्मी ने बताया कि ब्लड सैंपल अपूर्वा पैथोलॉजी भेजा गया है। जांच रिपोर्ट के बाद कुछ बताया जा सकता है।
पैथोलॉजी के कर्मचारी संतोष ने चाची का एक बार ही ब्लड सैंपल लिया था। दो अप्रैल को ब्लड सैंपल की रिपोर्ट भी आई और उसे बताया गया कि हालत सही है। कुछ देर बाद एक कर्मचारी ने फिर 50 हजार रुपये जमा करा लिए। इलाज में कोई दिक्कत न हो इसलिए पैसा भी जमा करता रहा।
विज्ञापन
तीसरे दिन फिर 50 हजार रुपये जमा करने को कहा गया तो मना कर दिया और जमा रुपयों का बिल मांगा। संचालक ने शाम सात बजे तक देने की बात कही। बिल देने की जगह बाद में पैथोलॉजी की गलत रिपोर्ट दिखाकर स्वास्थ्य अत्यंत खराब बता दिया। यही नहीं चाची को वहां से बाहर भी कर दिया। विरोध पर गाली-गलौज और मारपीट की। चाची के इलाज के दस्तावेज भी अपने पास रख दिए। सही इलाज न होने से चाची की छुट्टी होने के दूसरे दिन ही मौत हो गई।
पीड़ित के मुताबिक पुलिस को बताया तो समझौते का प्रयास किया गया। प्रार्थनापत्र पर भी कार्रवाई नहीं की गई। बाद में न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर अस्पताल संचालक जय उर्फ अजय विश्वकर्मा, पैथोलॉजी के कर्मचारी संतोष सिंह, पैथोलॉजी के डॉ.मनीष कुमार वाष्णेय और उर्सला अस्पताल के डॉ. मुन्नालाल विश्वकर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है। कोतवाल चंद्रकांत मिश्र ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।
विज्ञापन
- पुलिस के सुनवाई न करने पर न्यायालय की ली शरण, तब हुई कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। सिंगरोसी निवासी युवक ने शहर के अकरमपुर स्थित होप अस्पताल के मालिक, दो डॉक्टर सहित चार पर इलाज में लापरवाही से चाची की मौत होने की प्राथमिकी दर्ज कराई है। पीड़ित के मुताबिक पुलिस के कार्रवाई न करने पर उसने न्यायालय की शरण ली तब कार्रवाई हुई।
सदर कोतवाली के सिंगरोसी निवासी अविनाश चौधरी ने बताया कि उसने चाची अनीता को उर्सला अस्पताल के डॉ. मुन्नालाल विश्वकर्मा के कहने पर उनके रिश्तेदार शहर के अकरमपुर निवासी अजय विश्वकर्मा के होप अस्पताल में एक अप्रैल 2026 को भर्ती कराया था। भर्ती करते समय 80 हजार रुपये जमा कराए गए। कहा गया कि पैसों की और जरूरत पड़ेगी। दूसरे दिन अजय विश्वकर्मा और डॉ. रश्मी ने बताया कि ब्लड सैंपल अपूर्वा पैथोलॉजी भेजा गया है। जांच रिपोर्ट के बाद कुछ बताया जा सकता है।
विज्ञापन
पैथोलॉजी के कर्मचारी संतोष ने चाची का एक बार ही ब्लड सैंपल लिया था। दो अप्रैल को ब्लड सैंपल की रिपोर्ट भी आई और उसे बताया गया कि हालत सही है। कुछ देर बाद एक कर्मचारी ने फिर 50 हजार रुपये जमा करा लिए। इलाज में कोई दिक्कत न हो इसलिए पैसा भी जमा करता रहा।
विज्ञापन
तीसरे दिन फिर 50 हजार रुपये जमा करने को कहा गया तो मना कर दिया और जमा रुपयों का बिल मांगा। संचालक ने शाम सात बजे तक देने की बात कही। बिल देने की जगह बाद में पैथोलॉजी की गलत रिपोर्ट दिखाकर स्वास्थ्य अत्यंत खराब बता दिया। यही नहीं चाची को वहां से बाहर भी कर दिया। विरोध पर गाली-गलौज और मारपीट की। चाची के इलाज के दस्तावेज भी अपने पास रख दिए। सही इलाज न होने से चाची की छुट्टी होने के दूसरे दिन ही मौत हो गई।
पीड़ित के मुताबिक पुलिस को बताया तो समझौते का प्रयास किया गया। प्रार्थनापत्र पर भी कार्रवाई नहीं की गई। बाद में न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर अस्पताल संचालक जय उर्फ अजय विश्वकर्मा, पैथोलॉजी के कर्मचारी संतोष सिंह, पैथोलॉजी के डॉ.मनीष कुमार वाष्णेय और उर्सला अस्पताल के डॉ. मुन्नालाल विश्वकर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है। कोतवाल चंद्रकांत मिश्र ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।