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Unnao News: 42 वर्ष बाद भी झोपड़ी में चल रहा होम्योपैथी चिकित्सालय
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फोटो-7 झोपड़ीनुमा कच्ची कोठरी में संचालित होम्योपैथिक चिकित्सालय। संवाद
अब तक पक्का भवन मयस्सर नहीं हो सका, तीन साल से डॉक्टर नहीं, फार्मासिस्ट के सहारे
भिखारीपुर पतसिया स्थित होम्योपैथिक चिकित्सालय का हाल
संवाद न्यूज एजेंसी
गंजमुरादाबाद। ब्लॉक क्षेत्र के भिखारीपुर पतसिया स्थित होम्योपैथी चिकित्सालय 42 वर्षों से झोपड़ीनुमा कच्ची कोठरी में संचालित हो रहा है। तीन वर्षों से यहां चिकित्सक की तैनाती न होने से यह अस्पताल फार्मासिस्ट के सहारे चल रहा है। नतीजतन दूर-दराज क्षेत्र से आने वाले मरीजों की संख्या भी घटती जा रही है।
ब्लॉक क्षेत्र के मरीजों को होम्योपैथी से इलाज मुहैया कराने के लिए 1984 में भिखारीपुर पतसिया में होम्योपैथिक चिकित्सालय स्थापित किया गया था। कच्ची कोठरी में संचालित इस अस्पताल को अब तक पक्का भवन मयस्सर नहीं हो सका। भवन के लिए एक दशक में तीन बार प्रस्ताव शासन को भेजे गए लेकिन निरस्त हो गए।
पूर्व में यहां तैनात रहीं चिकित्सक डॉ शगुफ्ता जबीं को पदोन्नति देते हुए कौशांबी का जिला होम्योपैथी चिकित्साधिकारी बना दिया गया था। इसके बाद से यहां किसी चिकित्सक की भी तैनाती नहीं हुई। यहां से संबद्ध की गईं मदारनगर होम्योपैथिक चिकित्सालय की डॉ. निहारिका गुप्ता सप्ताह में एक दिन बृहस्पतिवार को आती हैं। ऐसी स्थिति में यह चिकित्सालय सिर्फ फार्मासिस्ट योगेंद्र कुमार के सहारे चल रहा है।
जर्जर कोठरी के किसी भी समय गिरने का बना रहता अंदेशा
भिखारीपुर पतसिया में जिस कोठरी में होम्योपैथी चिकित्सालय संचालित है वह काफी कमजोर हो चुकी है। बरसात में इसकी छत टपकती है। इससे किसी भी समय इसके गिरने का अंदेशा बना है। बारिश के दिनों में स्टाफ बाहर रखे छप्पर के नीचे बैठकर इलाज किया जाता है।
जिम्मेदार बोले-जल्द करेंगे निरीक्षण
जल्द ही वह होम्योपैथी चिकित्सालय का निरीक्षण करेंगे। साथ ही भवन और चिकित्सक की स्थायी तैनाती जैसी समस्याओं के निस्तारण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। - बृज मोहन शुक्ला, एसडीएम, बांगरमऊ।
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अब तक पक्का भवन मयस्सर नहीं हो सका, तीन साल से डॉक्टर नहीं, फार्मासिस्ट के सहारे
भिखारीपुर पतसिया स्थित होम्योपैथिक चिकित्सालय का हाल
संवाद न्यूज एजेंसी
गंजमुरादाबाद। ब्लॉक क्षेत्र के भिखारीपुर पतसिया स्थित होम्योपैथी चिकित्सालय 42 वर्षों से झोपड़ीनुमा कच्ची कोठरी में संचालित हो रहा है। तीन वर्षों से यहां चिकित्सक की तैनाती न होने से यह अस्पताल फार्मासिस्ट के सहारे चल रहा है। नतीजतन दूर-दराज क्षेत्र से आने वाले मरीजों की संख्या भी घटती जा रही है।
ब्लॉक क्षेत्र के मरीजों को होम्योपैथी से इलाज मुहैया कराने के लिए 1984 में भिखारीपुर पतसिया में होम्योपैथिक चिकित्सालय स्थापित किया गया था। कच्ची कोठरी में संचालित इस अस्पताल को अब तक पक्का भवन मयस्सर नहीं हो सका। भवन के लिए एक दशक में तीन बार प्रस्ताव शासन को भेजे गए लेकिन निरस्त हो गए।
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पूर्व में यहां तैनात रहीं चिकित्सक डॉ शगुफ्ता जबीं को पदोन्नति देते हुए कौशांबी का जिला होम्योपैथी चिकित्साधिकारी बना दिया गया था। इसके बाद से यहां किसी चिकित्सक की भी तैनाती नहीं हुई। यहां से संबद्ध की गईं मदारनगर होम्योपैथिक चिकित्सालय की डॉ. निहारिका गुप्ता सप्ताह में एक दिन बृहस्पतिवार को आती हैं। ऐसी स्थिति में यह चिकित्सालय सिर्फ फार्मासिस्ट योगेंद्र कुमार के सहारे चल रहा है।
जर्जर कोठरी के किसी भी समय गिरने का बना रहता अंदेशा
भिखारीपुर पतसिया में जिस कोठरी में होम्योपैथी चिकित्सालय संचालित है वह काफी कमजोर हो चुकी है। बरसात में इसकी छत टपकती है। इससे किसी भी समय इसके गिरने का अंदेशा बना है। बारिश के दिनों में स्टाफ बाहर रखे छप्पर के नीचे बैठकर इलाज किया जाता है।
जिम्मेदार बोले-जल्द करेंगे निरीक्षण
जल्द ही वह होम्योपैथी चिकित्सालय का निरीक्षण करेंगे। साथ ही भवन और चिकित्सक की स्थायी तैनाती जैसी समस्याओं के निस्तारण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। - बृज मोहन शुक्ला, एसडीएम, बांगरमऊ।
