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Unnao News: लखनऊ-कानपुर हाईवे....सड़क बनते ही कहीं दरकी को कहीं फटी, लगने लगे पैबंद
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फोटो-5-जाजमऊ गंगा पुल के पास उखड़ी सड़क की मरम्मत करते श्रमिक। संवाद
फोटो-6-आजाद मार्ग चौराहा के पास टूटी सड़क को उखाड़ कर पैच वर्क करते श्रमिक। संवाद
फोटो-7-गहिरा गांव से सामने सड़क की मरम्मत करते श्रमिक। संवाद
फोटो-8- बंथर औद्योगिक क्षेत्र के पास दरकी सड़क संवाद
पड़ताल का लोगो
सब हेड- लखनऊ-कानपुर हाईवे पर 92 करोड़ के सुधार कार्य का घटिया नतीजा, एक महीने में ही सड़क जवाब देने लगी
-कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर सबसे ज्यादा समस्या, कराया जा रहा पैच वर्क
-प्रति किलोमीटर एक करोड़ रुपये हो रहे खर्च, एक महीने खुलने लगीं खामियां
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव/अचलगंज। लखनऊ-कानपुर हाईवे (एनएच-27) पर 92 करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे नवीनीकरण के कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक महीने पहले ही सड़क की 30 सेंटीमीटर पुरानी परत को हटाकर उस पर दो नई परतें (ओवर-ले) चढ़ाई गई थीं लेकिन सड़क बनते ही जवाब देने लगी है।
कानपुर से लखनऊ की ओर जाने वाले वाहनों के ओवर लोड होने के कारण सड़क कुछ स्थानों पर फूल गई है और कहीं-कहीं फटकर परत सिमट गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों ने ओवर लोडिंग को इसका कारण बताया है, जबकि निर्माण एजेंसी पर काम पूरा करने में देरी और घटिया काम करने के आरोप लग रहे हैं।
एनएचएआई ने लखनऊ-कानपुर हाईवे को सुगम और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से एक निर्माण एजेंसी को नवीनीकरण का ठेका दिया था। इस परियोजना पर प्रति किलोमीटर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। एजेंसी को न केवल नवीनीकरण का कार्य पूरा करना था, बल्कि पांच साल तक रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।
हालांकि, कार्य में सुस्ती के चलते एजेंसी डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं कर पाई है। यह हाईवे वर्ष 2022 से खस्ताहाल स्थिति में था। तमाम कवायदों के बाद, स्थानीय सांसद साक्षी महाराज के प्रयासों और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री से की गई मांग के फलस्वरूप, अप्रैल 2024 में एनएचएआई ने 92 करोड़ रुपये का ठेका दिया था।
इस ठेके में सड़क नवीनीकरण, डिवाइडर निर्माण, ग्रिल लगाना, चौराहों और ब्लैक स्पॉट पर रोशनी की व्यवस्था सहित सड़क सुरक्षा के अन्य कार्य शामिल थे। एजेंसी ने अक्तूबर 2024 से सड़क नवीनीकरण का काम शुरू किया, लेकिन एक महीने के भीतर ही सड़क की हालत खराब होने लगी है। कानपुर से लखनऊ की ओर जाने वाली लेन पर जाजमऊ गंगा पुल से गहिरा तक करीब छह किलोमीटर में 25 से अधिक स्थानों पर नई सड़क दरक गई है। नवाबगंज और सोहरामऊ में भी ऐसी ही समस्याएं देखी जा रही हैं। खामियों को छिपाने के लिए एजेंसी पैचिंग का सहारा ले रही है।
मरम्मत कार्य से यातायात बाधित, वाहन चालकों को हो रही परेशानी
सड़क की मरम्मत के दौरान बीच-बीच में ट्रैफिक डायवर्जन किए जाने से यातायात भी प्रभावित हो रहा है। करीब डेढ़ साल से निर्माण एजेंसी प्रत्येक दो किलोमीटर में सड़क को बंद करके काम कर रही थी, जिससे दोनों तरफ के यातायात को एक ही लेन से गुजारा जा रहा था। इसके कारण वाहन चालकों को प्रतिदिन तीन से पांच किलोमीटर के जाम का सामना करना पड़ रहा था। सड़क का काम पूरा होने के बाद यातायात सुगम होने की उम्मीद थी, लेकिन अब मरम्मत कार्य के कारण लोगों को फिर से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बोले जिम्मेदार
हाईवे होने के कारण ट्रैफिक को ज्यादा समय तक रोका नहीं जा सकता। इससे सड़क बनाने के करीब सात-आठ घंटे में ही यातायात के लिए खोलना पड़ा। ओवर लोड वाहन निकलने से कुछ स्थानों पर ओवर-ले फटने और सिमटने की समस्या हुई है। समस्या केवल कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर ही हुई है। काम पूरा होने के बाद एक और पतली परत (ओवर-ले) बनाकर सड़क को बिल्कुल सपाट बनाया जाएगा। छह माह में सभी काम पूरे हो जाएंगे। जहां टूट-फूट होगी उसकी मरम्मत कराने जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की ही है।-सौरभ कुमार, इंजीनियर एनएचएआई
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फोटो-6-आजाद मार्ग चौराहा के पास टूटी सड़क को उखाड़ कर पैच वर्क करते श्रमिक। संवाद
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सब हेड- लखनऊ-कानपुर हाईवे पर 92 करोड़ के सुधार कार्य का घटिया नतीजा, एक महीने में ही सड़क जवाब देने लगी
-कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर सबसे ज्यादा समस्या, कराया जा रहा पैच वर्क
-प्रति किलोमीटर एक करोड़ रुपये हो रहे खर्च, एक महीने खुलने लगीं खामियां
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव/अचलगंज। लखनऊ-कानपुर हाईवे (एनएच-27) पर 92 करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे नवीनीकरण के कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक महीने पहले ही सड़क की 30 सेंटीमीटर पुरानी परत को हटाकर उस पर दो नई परतें (ओवर-ले) चढ़ाई गई थीं लेकिन सड़क बनते ही जवाब देने लगी है।
कानपुर से लखनऊ की ओर जाने वाले वाहनों के ओवर लोड होने के कारण सड़क कुछ स्थानों पर फूल गई है और कहीं-कहीं फटकर परत सिमट गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों ने ओवर लोडिंग को इसका कारण बताया है, जबकि निर्माण एजेंसी पर काम पूरा करने में देरी और घटिया काम करने के आरोप लग रहे हैं।
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एनएचएआई ने लखनऊ-कानपुर हाईवे को सुगम और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से एक निर्माण एजेंसी को नवीनीकरण का ठेका दिया था। इस परियोजना पर प्रति किलोमीटर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। एजेंसी को न केवल नवीनीकरण का कार्य पूरा करना था, बल्कि पांच साल तक रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।
हालांकि, कार्य में सुस्ती के चलते एजेंसी डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं कर पाई है। यह हाईवे वर्ष 2022 से खस्ताहाल स्थिति में था। तमाम कवायदों के बाद, स्थानीय सांसद साक्षी महाराज के प्रयासों और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री से की गई मांग के फलस्वरूप, अप्रैल 2024 में एनएचएआई ने 92 करोड़ रुपये का ठेका दिया था।
इस ठेके में सड़क नवीनीकरण, डिवाइडर निर्माण, ग्रिल लगाना, चौराहों और ब्लैक स्पॉट पर रोशनी की व्यवस्था सहित सड़क सुरक्षा के अन्य कार्य शामिल थे। एजेंसी ने अक्तूबर 2024 से सड़क नवीनीकरण का काम शुरू किया, लेकिन एक महीने के भीतर ही सड़क की हालत खराब होने लगी है। कानपुर से लखनऊ की ओर जाने वाली लेन पर जाजमऊ गंगा पुल से गहिरा तक करीब छह किलोमीटर में 25 से अधिक स्थानों पर नई सड़क दरक गई है। नवाबगंज और सोहरामऊ में भी ऐसी ही समस्याएं देखी जा रही हैं। खामियों को छिपाने के लिए एजेंसी पैचिंग का सहारा ले रही है।
मरम्मत कार्य से यातायात बाधित, वाहन चालकों को हो रही परेशानी
सड़क की मरम्मत के दौरान बीच-बीच में ट्रैफिक डायवर्जन किए जाने से यातायात भी प्रभावित हो रहा है। करीब डेढ़ साल से निर्माण एजेंसी प्रत्येक दो किलोमीटर में सड़क को बंद करके काम कर रही थी, जिससे दोनों तरफ के यातायात को एक ही लेन से गुजारा जा रहा था। इसके कारण वाहन चालकों को प्रतिदिन तीन से पांच किलोमीटर के जाम का सामना करना पड़ रहा था। सड़क का काम पूरा होने के बाद यातायात सुगम होने की उम्मीद थी, लेकिन अब मरम्मत कार्य के कारण लोगों को फिर से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बोले जिम्मेदार
हाईवे होने के कारण ट्रैफिक को ज्यादा समय तक रोका नहीं जा सकता। इससे सड़क बनाने के करीब सात-आठ घंटे में ही यातायात के लिए खोलना पड़ा। ओवर लोड वाहन निकलने से कुछ स्थानों पर ओवर-ले फटने और सिमटने की समस्या हुई है। समस्या केवल कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर ही हुई है। काम पूरा होने के बाद एक और पतली परत (ओवर-ले) बनाकर सड़क को बिल्कुल सपाट बनाया जाएगा। छह माह में सभी काम पूरे हो जाएंगे। जहां टूट-फूट होगी उसकी मरम्मत कराने जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की ही है।-सौरभ कुमार, इंजीनियर एनएचएआई
