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Unnao News: 10 वाली चाय 15 रुपये की, कचौड़ी-छोला भी महंगा
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फोटो-10-समोसा-गुझिया की दुकान। संवाद
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उन्नाव। व्यावसायिक सिलिंडर की कीमतों में चार महीने में 1200 रुपये से अधिक की वृद्धि हुई है। शुक्रवार को 993 रुपये की अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी की गई। इससे दुकानदारों और ग्राहकों की कमर टूट गई है। इसका असर खानपान की वस्तुओं पर पड़ा है। दुकानदारों ने 10 रुपये की चाय 15 रुपये की कर दी है। छोला-कचौड़ी की 25 रुपये वाली थाली की कीमत बढ़ाकर 30 रुपये कर दी है।
फरवरी में 1897 रुपये में मिलने वाला 19 किलो का सिलिंडर अब 3182 रुपये का हो गया है। इसी तरह, पांच किलो वाला सिलिंडर 504 रुपये से बढ़कर 872 रुपये का हो गया है। होटल, रेस्टोरेंट और फास्ट फूड विक्रेताओं का कहना है सिलिंडर समेत अन्य वस्तुएं महंगी होने से लागत बढ़ गई है। इस कारण सामग्री के दाम मजबूरी में बढ़ाने पड़ रहे हैं।
व्यावसायिक सिलिंडर महंगा होने के कारण खानपान सामग्री भी महंगी हो गई है। 10 रुपये की चाय अब 15 रुपये में मिल रही है। छोला-कचौड़ी की 25 रुपये वाली थाली 30 रुपये की हो गई है। 30 रुपये का छोला-भटूरा अब 40 रुपये में बिक रहा है। समोसा, गुझिया, नूडल्स, पावभाजी, डोसा और सैंडविच जैसे फास्टफूड के दाम भी बढ़े हैं। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
क्या कहते हैं विक्रेता
फोटो-11-अवधेश
फिर बढ़ाने पड़ेंगे पूड़ी-सब्जी के दाम
दुकानदार अवधेश प्रजापति ने बताया कि पहले 25 रुपये में बिकने वाली पूड़ी की प्लेट अप्रैल में 30 रुपये की करनी पड़ी। शुरुआत में ग्राहकों ने आपत्ति जताई तो उन्हें वजह समझाई। कुछ ग्राहक टूट गए तो कुछ नए भी जुड़े। कुछ दिनों में ही नुकसान की भरपाई हो गई लेकिन अब एक साथ 993 रुपये बढ़ने से रेट 30 से 40 रुपये करना पड़ेगा। कुछ विक्रेता कोयला भट्टी या स्टोव से पकाते हैं। इससे उनसे रेट में भी प्रतिस्पर्धा रहती है।
फोटो-12-शंकर
समेसा के दाम बढ़ाना मजबूरी
समोसा, गुझिया विक्रेता शंकर ने बताया कि वह पांच किलो वाला सिलिंडर लेकर किसी तरह काम चला रहे थे। तीन बार में इसकी कीमत भी 504 रुपये से बढ़कर अब 872 रुपये होने से लागत भी बढ़ रही है। पहले गुझिया, समोसा आठ रुपये में बेचते थे। गैस के दाम बढ़ने पर 10 रुपये पीस किया अब दाम और बढ़ाने पड़ेंगे। जो विक्रेता कोयला भट्टी का प्रयोग कर रहे हैं वह एक-दो रुपये कम में बेचते हैं, ग्राहक न टूटें इसका भी ध्यान रखना होता है।
फोटो-13-डीजल भट्टी का प्रयोग करते खोया तैयार करता मिठाई विक्रेता। संवाद
नहीं मिल रहे व्यावसायिक सिलिंडर, डीजल भट्ठी का कर रहे प्रयोग
उन्नाव। मिठाई और होटल-रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि दो महीने से दोहरी मार झेल रहे हैं। व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति कागजों में हो रही है। सप्ताह में चार सिलिंडर की जरूरत होती है लेकिन बड़ी मुश्किल से एक ही मिल पाता है। इस समस्या से निपटने के लिए डीजल भट्ठी का सहारा लिया है।
मिठाई विक्रेता विकास मिश्रा, सुमित गुप्ता, विजय जायसवाल ने बताया कि व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के कारण अभी तक मिठाई व पकवानों के दाम नहीं बढ़ाए हैं। सिलिंडर की कमी पूरी करने के लिए डीजल भट्ठी का उपयोग कर रहे हैं। बताया कि 19 किलो का एलपीजी सिलिंडर उपयोग करने में जितना खर्चा दो दिन में होता था, डीजल भट्ठी से उतने ही खर्च में तीन दिन काम चल जाता है। हालांकि बिजली की आवाजाही डीजल भट्ठी का संचालन प्रभावित होता है।
सिलिंडर की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने की मांग
खानपान सामग्री और मिठाई विक्रेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गैस एजेंसी संचालक, व्यावसायिक सिलिंडरों की खूब कालाबाजारी कर रहे हैं। आरोप लगाया कि 2189 रुपये वाले सिलिंडर 2800 रुपये में दे रहे थे। अब 993 रुपये बढ़ने पर अगर वही सिलिंडर ब्लैक में 3800 रुपये या इससे अधिक कीमत लेंगे तो कैसे व्यापार कर पाएंगे। व्यवसायियों ने जिला प्रशासन और पूर्ति विभाग से गैस एजेंसियों पर शिकंजा कसने की मांग की है।
वर्जन...
एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए कंट्रोल रूम बना है। अगर कोई भी कालाबाजारी, रिफिलिंग या सिलिंडरों का अवैध भंडारण करते हुए पाया जाएगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोई भी उपभोक्ता इसकी शिकायत या अपनी समस्या विभाग के कंट्रोल रूम नंबर 8924095505 पर कर सकता है। जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। -राजबहादुर सिंह, जिलापूर्ति अधिकारी
कुछ इस तरह बढ़े व्यावसायिक सिलिंडर के दाम
19 किलो व्यावसायिक सिलिंडर
फरवरी-1897 रुपये
मार्च-1894
अप्रैल-2189
मई-3182
पांच किलो गैस का सिलिंडर
मार्च-504
अप्रैल-638
मई-872.5
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फरवरी में 1897 रुपये में मिलने वाला 19 किलो का सिलिंडर अब 3182 रुपये का हो गया है। इसी तरह, पांच किलो वाला सिलिंडर 504 रुपये से बढ़कर 872 रुपये का हो गया है। होटल, रेस्टोरेंट और फास्ट फूड विक्रेताओं का कहना है सिलिंडर समेत अन्य वस्तुएं महंगी होने से लागत बढ़ गई है। इस कारण सामग्री के दाम मजबूरी में बढ़ाने पड़ रहे हैं।
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व्यावसायिक सिलिंडर महंगा होने के कारण खानपान सामग्री भी महंगी हो गई है। 10 रुपये की चाय अब 15 रुपये में मिल रही है। छोला-कचौड़ी की 25 रुपये वाली थाली 30 रुपये की हो गई है। 30 रुपये का छोला-भटूरा अब 40 रुपये में बिक रहा है। समोसा, गुझिया, नूडल्स, पावभाजी, डोसा और सैंडविच जैसे फास्टफूड के दाम भी बढ़े हैं। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
क्या कहते हैं विक्रेता
फोटो-11-अवधेश
फिर बढ़ाने पड़ेंगे पूड़ी-सब्जी के दाम
दुकानदार अवधेश प्रजापति ने बताया कि पहले 25 रुपये में बिकने वाली पूड़ी की प्लेट अप्रैल में 30 रुपये की करनी पड़ी। शुरुआत में ग्राहकों ने आपत्ति जताई तो उन्हें वजह समझाई। कुछ ग्राहक टूट गए तो कुछ नए भी जुड़े। कुछ दिनों में ही नुकसान की भरपाई हो गई लेकिन अब एक साथ 993 रुपये बढ़ने से रेट 30 से 40 रुपये करना पड़ेगा। कुछ विक्रेता कोयला भट्टी या स्टोव से पकाते हैं। इससे उनसे रेट में भी प्रतिस्पर्धा रहती है।
फोटो-12-शंकर
समेसा के दाम बढ़ाना मजबूरी
समोसा, गुझिया विक्रेता शंकर ने बताया कि वह पांच किलो वाला सिलिंडर लेकर किसी तरह काम चला रहे थे। तीन बार में इसकी कीमत भी 504 रुपये से बढ़कर अब 872 रुपये होने से लागत भी बढ़ रही है। पहले गुझिया, समोसा आठ रुपये में बेचते थे। गैस के दाम बढ़ने पर 10 रुपये पीस किया अब दाम और बढ़ाने पड़ेंगे। जो विक्रेता कोयला भट्टी का प्रयोग कर रहे हैं वह एक-दो रुपये कम में बेचते हैं, ग्राहक न टूटें इसका भी ध्यान रखना होता है।
फोटो-13-डीजल भट्टी का प्रयोग करते खोया तैयार करता मिठाई विक्रेता। संवाद
नहीं मिल रहे व्यावसायिक सिलिंडर, डीजल भट्ठी का कर रहे प्रयोग
उन्नाव। मिठाई और होटल-रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि दो महीने से दोहरी मार झेल रहे हैं। व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति कागजों में हो रही है। सप्ताह में चार सिलिंडर की जरूरत होती है लेकिन बड़ी मुश्किल से एक ही मिल पाता है। इस समस्या से निपटने के लिए डीजल भट्ठी का सहारा लिया है।
मिठाई विक्रेता विकास मिश्रा, सुमित गुप्ता, विजय जायसवाल ने बताया कि व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के कारण अभी तक मिठाई व पकवानों के दाम नहीं बढ़ाए हैं। सिलिंडर की कमी पूरी करने के लिए डीजल भट्ठी का उपयोग कर रहे हैं। बताया कि 19 किलो का एलपीजी सिलिंडर उपयोग करने में जितना खर्चा दो दिन में होता था, डीजल भट्ठी से उतने ही खर्च में तीन दिन काम चल जाता है। हालांकि बिजली की आवाजाही डीजल भट्ठी का संचालन प्रभावित होता है।
सिलिंडर की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने की मांग
खानपान सामग्री और मिठाई विक्रेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गैस एजेंसी संचालक, व्यावसायिक सिलिंडरों की खूब कालाबाजारी कर रहे हैं। आरोप लगाया कि 2189 रुपये वाले सिलिंडर 2800 रुपये में दे रहे थे। अब 993 रुपये बढ़ने पर अगर वही सिलिंडर ब्लैक में 3800 रुपये या इससे अधिक कीमत लेंगे तो कैसे व्यापार कर पाएंगे। व्यवसायियों ने जिला प्रशासन और पूर्ति विभाग से गैस एजेंसियों पर शिकंजा कसने की मांग की है।
वर्जन...
एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए कंट्रोल रूम बना है। अगर कोई भी कालाबाजारी, रिफिलिंग या सिलिंडरों का अवैध भंडारण करते हुए पाया जाएगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोई भी उपभोक्ता इसकी शिकायत या अपनी समस्या विभाग के कंट्रोल रूम नंबर 8924095505 पर कर सकता है। जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। -राजबहादुर सिंह, जिलापूर्ति अधिकारी
कुछ इस तरह बढ़े व्यावसायिक सिलिंडर के दाम
19 किलो व्यावसायिक सिलिंडर
फरवरी-1897 रुपये
मार्च-1894
अप्रैल-2189
मई-3182
पांच किलो गैस का सिलिंडर
मार्च-504
अप्रैल-638
मई-872.5

फोटो-10-समोसा-गुझिया की दुकान। संवाद

फोटो-10-समोसा-गुझिया की दुकान। संवाद

फोटो-10-समोसा-गुझिया की दुकान। संवाद

फोटो-10-समोसा-गुझिया की दुकान। संवाद
