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Unnao News: दानवीरों का दिल बड़ा, अस्पतालों का बजट छोटा

Wed, 06 May 2026 01:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 06 May 2026 01:12 AM IST
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फोटो-20-रजनीश कुमार - फोटो : 1
उन्नाव। महज 10 मिनट में रिपोर्ट और 59 तरह की जांच सुविधा देने वाले हेल्थ एटीएम अनदेखी का शिकार हैं। विभिन्न संस्थाओं से दान में मिले इन एटीएम के संचालन के लिए न तो रीजेंट है और न ही टेस्ट स्ट्रिप व अन्य सामग्री। इस कारण इनसे जरूरी जांचें नहीं हो पा रही हैं। ये सामग्री कौन उपलब्ध कराएगा यह भी तय नहीं है। सीएमओ का कहना है जिन अस्पतालों में हेल्थ एटीएम लगे हैं वहीं का प्रबंधन सामग्री उपलब्ध कराएगा। दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि इसके लिए बजट नहीं है। इस कारण हेल्थ एटीएम सिर्फ वजन, ब्लड प्रेशर और लंबाई ही नापने के काम आ रहे हैं।
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दिसंबर 2022 में विभिन्न संस्थाओं और उद्यमियों ने जिला अस्पताल, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जांच की सुविधा के लिए 3.50 लाख कीमत के 16 हेल्थ एटीएम दान किए थे। हालांकि स्वास्थ्य विभाग इनका ठीक से संचालन नहीं कर पा रहा है। जिला अस्पताल के हेल्थ एटीएम के लिए ग्लूकोमीटर, शुगर स्ट्रिप, वजन मशीन की बैटरी, बीपी नापने में उपयोग होने वाला कफ (पट्टा), हीमोग्लोबिन मीटर, पल्स ऑक्सीमीटर नहीं है। दो साल से सीएमओ कार्यालय और सीएमएस कार्यालय में टालमटोल चल रही है और इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। पैथोलॉजी में जांच के लिए लंबी लाइनें लगती हैं और मरीजों को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद भी कई मरीजों की जांच नहीं हो पाती। इतना ही नहीं जब तक मरीजों को जांच रिपोर्ट मिलती है तब तक ओपीडी का समय खत्म हो चुका होता है। मरीजों को जांच रिपोर्ट दिखाने और दवाएं लेने के लिए अगले दिन आना पड़ता है।
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हेल्थ एटीएम से 10 मिनट में हो सकती हैं ये जांचें

हेल्थ एटीएम में मास इंडेक्स, ब्लड प्रेशर, मेटाबॉलिक एज, बॉडी फैट, हाइड्रेशन, पल्स रेट, हाइट, मसल मास, तापमान, ऑक्सीजन की मात्रा, वजन सहित कुल 59 पैरामीटर पर जांच की सुविधा है। बॉडी स्क्रीनिंग के लिए 16 पैरामीटर की जांच होगी। लाइफस्टाइल से जुड़ी जांच जैसे ग्लूकोज, हीमोग्लोबिन, लिपिड प्रोफाइल के अलावा रैपिड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, गर्भावस्था, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, एचआईवी के साथ ही 12 लीड ईसीजी, डिजिटल स्टेथोस्कोप, डर्मास्कोप, ओटोस्कोप जैसे टेस्ट भी किए जा सकते हैं। ग्लूकोज, हीमोग्लोबिन, लिपिड प्रोफाइल आदि की जांच। कई तरह के रैपिड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, गर्भावस्था, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, एचआईवी जैसे टेस्ट भी किए जा सकते हैं।
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सैंपल देने और जांच रिपोर्ट लेने में लग जाते हैं छह घंटे

जिला पुरुष अस्पताल की पैथोलॉजी में मरीजों को जांच के लिए सैंपल देने और रिपोर्ट लेने में पांच से छह घंटे लग जाते हैं। जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 1200 मरीजों की ओपीडी होती है। इसमें लगभग 400 मरीजों को डॉक्टर खून की जांच के लिए लिखते हैं। इनमें से 250 से 300 सैंपलों की जांच हो पाती है। हालत यह है कि पैथोलॉजी में मरीजों को पहले सैंपल देने और फिर रिपोर्ट लेने के लिए पांच से छह घंटे इंतजार करना पड़ता है। मरीजों का आरोप है कि कई बार दो बजते ही कर्मचारी सैंपल लेने से मना कर देते हैं। रिपोर्ट के लिए अगले दिन आने या मोबाइल पर भेजने की बात कहकर चलता कर देते हैं।



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मरीजों ने बताई परेशानी

फोटो-20-रजनीश कुमार



चार घंटे बाद मिली जांच रिपोर्ट अकरमपुर निवासी रजनीश कुमार ने बताया कि पारिवारिक सदस्य को दिखाने आए थे। डॉक्टर ने सीबीसी जांच के लिए लिखा था लेकिन सैंपल देने और रिपोर्ट लेने में चार घंटे लग गए। अगर हेल्थ एटीएम संचालित हो तो यह जांच 10 मिनट में हो सकती है लेकिन कई साल से ऐसा नहीं हो पाता।

फोटो-21- देवेश सिंह। भीड़ के कारण निजी पैथोलॉजी में कराई जांच

मगरवारा निवासी देवेश सिंह ने बताया कि उनके एक कर्मचारी को जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने लिपिड प्रोफाइल जांच लिखी थी। उसे लेकर पैथोलॉजी पहुंचे तो भीड़ थी। वहां पहले से मौजूद लोगों ने दो से तीन घंटे से इंतजार करने की बात बताई तो निजी पैथोलॉजी में उसकी जांच कराई।

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हेल्थ एटीएम संचालित हैं। रीजेंट व अन्य सामग्री के लिए अलग से बजट नहीं है। इसकी खरीदारी अस्पतालों को अपने रोगी कल्याण निधि खाते से करनी है। जिला अस्पताल में भी यही व्यवस्था है। -डॉ. सत्यप्रकाश, सीएमओ।




जिला अस्पताल में जांच के लिए लैब है। यहां हेल्थ एटीएम की जरूरत ही नहीं है। सीएमओ कार्यालय ने इसे लगवाया है। जिला अस्पताल के पास इसके लिए अलग से बजट नहीं है। रोगी कल्याण निधि से इसके लिए सामग्री खरीदने में भी नियमों की पाबंदी है। -डॉ. राजीव गुप्ता, सीएमएस।

फोटो-20-रजनीश कुमार

फोटो-20-रजनीश कुमार- फोटो : 1

फोटो-20-रजनीश कुमार

फोटो-20-रजनीश कुमार- फोटो : 1

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