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Unnao News: खाड़ी संकट से डामर के भाव चढ़े, ठेकेदारों ने सड़क बनाने में हाथ खड़े किए
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फोटो-31-गंगा एक्सप्रेसवे के अंडरपास में डामरीकरण न होने से फैली गिट्टी। संवाद
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उन्नाव। खाड़ी क्षेत्र में दो महीने से बिगड़े हालात ने व्यावसायिक सिलिंडरों के साथ ही डामर की कीमतें बढ़ा दी हैं। इसका सीधा असर सड़कों के निर्माण पर पड़ रहा है। लागत बढ़ने के कारण ठेकेदारों ने निर्माण जारी रखने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इससे न तो नई सड़कें बन पा रही हैं और न ही पहले से बनी सड़कों पर सफेद पट्टी (थर्मोप्लास्टिक पेंट से मार्किंग) का काम हो पा रहा है। करीब 225 किलोमीटर लंबाई में सड़कों का काम रुका है।
इस साल फरवरी महीने में डामर की कीमत 48 हजार रुपये टन थी। 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल के ईरान पर हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में बिगड़े हालात और समुद्री मार्ग से जहाजों का आवागमन प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। मार्च और अप्रैल में अन्य पेट्रोलियम पदार्थों की तरह डामर के दाम भी लगभग दोगुने हो गए। वर्तमान में यह कीमत करीब 90 हजार रुपये टन हो गई है। पूर्व में स्वीकृत और टेंडर होने के कारण सड़कों की लागत बढ़ी तो निर्माण से जुड़ी फर्मों ने काम रोक दिए। इससे टेंडर की पूर्व निर्धारित समय सीमा में सड़कें नहीं बन पाएंगी। लोगों का सफर झटकों के बीच जारी रहेगा।
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में इस समय 225 किलोमीटर लंबी 30 सड़कों के नवीनीकरण का रुका है। विभाग के ठेकेदार संदीप, शिव सिंह, सुधीर आदि ने बताया कि टेंडर के दौरान डामर की जीएसटी सहित कीमत 48 हजार रुपये टन थी जो अब 90 हजार टन हो गई है। सड़क का नवीनीकरण करने में एक किलोमीटर में सात टन डामर लगता है। पहले जिस सड़क में प्रति किलोमीटर में 3.36 लाख का डामर लगता था अब उसी में 6.30 लाख का डामर पर खर्च हो रहा है। इससे मानक के अनुरूप निर्माण नहीं हो पा रहा है।
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35 सड़कों की मार्किंग अधूरी
डामर की तरह एलपीजी का भी संकट है। दो महीने से व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं। वहीं तीन महीने में कीमत भी 1285 रुपये बढ़ गई है। इसकी वजह से पहले बन चुकीं सड़कों की रोड मार्किंग नहीं हो पाई। विभाग के अधिकारियों के अनुसार पूर्व में बन चुकीं 250 किलोमीटर लंबी 35 सड़कों पर अभी तक थर्मोप्लास्टिक पेंट नहीं हो सका है। थर्मोप्लास्टिक को पिघलाने में व्यावसायिक सिलिंडर का प्रयोग होता है। निर्माण एजेंसियों का कहना है कि टेंडर के समय गैस की कीमत काफी कम थीं इससे अब नुकसान उठाना पड़ेगा। इसलिए ठेकेदार काम से हाथ खड़े कर रहे हैं।
वर्जन...
पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ी हैं। डामर की कीमत लगभग दोगुनी होने से सड़क नवीनीकरण के काम और गैस की किल्लत से पहले बन चुकी सड़कों पर रोड मार्किंग रुकी है। हालांकि शासन ने अब दरों के समायोजन का फैसला लेकर इसका आदेश जारी कर दिया है। एक अप्रैल से पूर्व की निविदा वाले कामों एस्टीमेट रिवाइज किए जा सकेंगे और निर्माण एजेंसी को काम पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया जा सकेगा। -हरदयाल अहरिवार, पीडब्ल्यूडी एक्सईएन।
150 गांवों की चार लाख आबादी को नहीं मिली राहत
मुख्यमंत्री ने मंडल स्तरीय समीक्षा बैठक में विधायकों से पांच-पांच करोड़ रुपये के विकास कार्यों के प्रस्ताव मांगे थे। जिले के विधायकों ने भी अपने क्षेत्रों की खस्ताहाल सड़कों के नवीनीकरण और कच्चे मार्गों को पक्का बनाने के लिए प्रस्ताव दिए थे। शासन से प्रस्तावों को स्वीकृति मिली और काम शुरू करने की तैयारी हुई तभी खाड़ी संकट की वजह से काम रुक गए। इससे जिले के 150 गांवों की करीब चार लाख आबादी को राहत देने वाली इन सड़कों का निर्माण अटका है।
नहर पटरी मार्ग के निर्माण की शुरुआत नहीं
सदर विधायक के प्रस्तावों में शामिल 3.50 किलोमीटर लंबे आदर्शनगर नहर पटरी मार्ग का निर्माण शुरू नहीं हो सका। इसके निर्माण पर 2.45 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। यह मार्ग शहर के आदर्शनगर मोहल्ले के पास उन्नाव-शुक्लागंज मार्ग को लखनऊ-कानपुर हाईवे से जोड़ेगा।
चकलवंशी-संडीला मार्ग नहीं हुआ चौड़ा
चकलवंशी-संडीला मार्ग को 10 मीटर चौड़ा करने के लिए 28.42 करोड़ स्वीकृत हुए हैं। 3.97 करोड़ रुपये जारी भी हुए हैं। मार्ग की चौड़ाई सात मीटर से बढ़ाकर 10 मीटर करनी है लेकिन काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है।
सिरधरपुर मार्ग भी अधूरा
गंजमुरादाबाद ब्लाॅक के 13 किलोमीटर लंबे सिरधरपुर मार्ग के लिए 2.51 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। मार्च में शिलान्यास होने के बाद कुछ काम हुआ लेकिन इसके बाद रुक गया। डामर महंगा होने से मार्ग अधूरा ही पड़ा है।
ये काम भी नहीं हुए शुरू
विधानसभा क्षेत्र कुल मार्ग लंबाई (किमी. में) लागत
उन्नाव सदर 4 7.16 4.83 करोड़
सफीपुर 4 7.30 5.28 करोड़
पुरवा 3 6.50 4.64 करोड़
मोहान 5 7.92 5.24 करोड़
भगवंतनगर 4 7.20 4.77 करोड़
बांगरमऊ 4 6.90 5.36 करोड़
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इस साल फरवरी महीने में डामर की कीमत 48 हजार रुपये टन थी। 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल के ईरान पर हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में बिगड़े हालात और समुद्री मार्ग से जहाजों का आवागमन प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। मार्च और अप्रैल में अन्य पेट्रोलियम पदार्थों की तरह डामर के दाम भी लगभग दोगुने हो गए। वर्तमान में यह कीमत करीब 90 हजार रुपये टन हो गई है। पूर्व में स्वीकृत और टेंडर होने के कारण सड़कों की लागत बढ़ी तो निर्माण से जुड़ी फर्मों ने काम रोक दिए। इससे टेंडर की पूर्व निर्धारित समय सीमा में सड़कें नहीं बन पाएंगी। लोगों का सफर झटकों के बीच जारी रहेगा।
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लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में इस समय 225 किलोमीटर लंबी 30 सड़कों के नवीनीकरण का रुका है। विभाग के ठेकेदार संदीप, शिव सिंह, सुधीर आदि ने बताया कि टेंडर के दौरान डामर की जीएसटी सहित कीमत 48 हजार रुपये टन थी जो अब 90 हजार टन हो गई है। सड़क का नवीनीकरण करने में एक किलोमीटर में सात टन डामर लगता है। पहले जिस सड़क में प्रति किलोमीटर में 3.36 लाख का डामर लगता था अब उसी में 6.30 लाख का डामर पर खर्च हो रहा है। इससे मानक के अनुरूप निर्माण नहीं हो पा रहा है।
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35 सड़कों की मार्किंग अधूरी
डामर की तरह एलपीजी का भी संकट है। दो महीने से व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं। वहीं तीन महीने में कीमत भी 1285 रुपये बढ़ गई है। इसकी वजह से पहले बन चुकीं सड़कों की रोड मार्किंग नहीं हो पाई। विभाग के अधिकारियों के अनुसार पूर्व में बन चुकीं 250 किलोमीटर लंबी 35 सड़कों पर अभी तक थर्मोप्लास्टिक पेंट नहीं हो सका है। थर्मोप्लास्टिक को पिघलाने में व्यावसायिक सिलिंडर का प्रयोग होता है। निर्माण एजेंसियों का कहना है कि टेंडर के समय गैस की कीमत काफी कम थीं इससे अब नुकसान उठाना पड़ेगा। इसलिए ठेकेदार काम से हाथ खड़े कर रहे हैं।
वर्जन...
पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ी हैं। डामर की कीमत लगभग दोगुनी होने से सड़क नवीनीकरण के काम और गैस की किल्लत से पहले बन चुकी सड़कों पर रोड मार्किंग रुकी है। हालांकि शासन ने अब दरों के समायोजन का फैसला लेकर इसका आदेश जारी कर दिया है। एक अप्रैल से पूर्व की निविदा वाले कामों एस्टीमेट रिवाइज किए जा सकेंगे और निर्माण एजेंसी को काम पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया जा सकेगा। -हरदयाल अहरिवार, पीडब्ल्यूडी एक्सईएन।
150 गांवों की चार लाख आबादी को नहीं मिली राहत
मुख्यमंत्री ने मंडल स्तरीय समीक्षा बैठक में विधायकों से पांच-पांच करोड़ रुपये के विकास कार्यों के प्रस्ताव मांगे थे। जिले के विधायकों ने भी अपने क्षेत्रों की खस्ताहाल सड़कों के नवीनीकरण और कच्चे मार्गों को पक्का बनाने के लिए प्रस्ताव दिए थे। शासन से प्रस्तावों को स्वीकृति मिली और काम शुरू करने की तैयारी हुई तभी खाड़ी संकट की वजह से काम रुक गए। इससे जिले के 150 गांवों की करीब चार लाख आबादी को राहत देने वाली इन सड़कों का निर्माण अटका है।
नहर पटरी मार्ग के निर्माण की शुरुआत नहीं
सदर विधायक के प्रस्तावों में शामिल 3.50 किलोमीटर लंबे आदर्शनगर नहर पटरी मार्ग का निर्माण शुरू नहीं हो सका। इसके निर्माण पर 2.45 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। यह मार्ग शहर के आदर्शनगर मोहल्ले के पास उन्नाव-शुक्लागंज मार्ग को लखनऊ-कानपुर हाईवे से जोड़ेगा।
चकलवंशी-संडीला मार्ग नहीं हुआ चौड़ा
चकलवंशी-संडीला मार्ग को 10 मीटर चौड़ा करने के लिए 28.42 करोड़ स्वीकृत हुए हैं। 3.97 करोड़ रुपये जारी भी हुए हैं। मार्ग की चौड़ाई सात मीटर से बढ़ाकर 10 मीटर करनी है लेकिन काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है।
सिरधरपुर मार्ग भी अधूरा
गंजमुरादाबाद ब्लाॅक के 13 किलोमीटर लंबे सिरधरपुर मार्ग के लिए 2.51 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। मार्च में शिलान्यास होने के बाद कुछ काम हुआ लेकिन इसके बाद रुक गया। डामर महंगा होने से मार्ग अधूरा ही पड़ा है।
ये काम भी नहीं हुए शुरू
विधानसभा क्षेत्र कुल मार्ग लंबाई (किमी. में) लागत
उन्नाव सदर 4 7.16 4.83 करोड़
सफीपुर 4 7.30 5.28 करोड़
पुरवा 3 6.50 4.64 करोड़
मोहान 5 7.92 5.24 करोड़
भगवंतनगर 4 7.20 4.77 करोड़
बांगरमऊ 4 6.90 5.36 करोड़

फोटो-31-गंगा एक्सप्रेसवे के अंडरपास में डामरीकरण न होने से फैली गिट्टी। संवाद