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Unnao News: रक्षा उद्योग गलियारे का नया पता बाबा कुटी गांव
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फोटो-1-सरांय कटियान गांव के पास से निकली बिजली लाइन, जो डिफेंस कॉरिडोर में बाधक बनी। संवाद
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उन्नाव। उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) ने रक्षा उद्योग गलियारे के लिए प्रस्तावित स्थल बदल दिया है। लखनऊ-कानपुर राजमार्ग से सटे औद्योगिक गलियारे के पास चिह्नित 230 हेक्टेयर जमीन को इसके लिए अनुपयुक्त बताया गया है। इसका मुख्य कारण कुंदन सड़क-सरोजनी नगर हाईटेंशन बिजली लाइन है जो रक्षा इकाइयों के लिए खतरा बन सकती थी। अब बांगरमऊ तहसील में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे किनारे बाबा कुटी गांव के पास नई जमीन प्रस्तावित की गई है।
प्रदेश सरकार ने जनवरी में रक्षा औद्योगिक गलियारा स्थापित करने की परियोजना को मंजूरी दी थी। जिला प्रशासन ने बिछिया ब्लॉक के सरांय कटियान, मुर्तजा नगर और ओरहर गांव की 230 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की थी। फरवरी में यूपीडा अधिकारियों ने निरीक्षण में भूमि के पास से गुजर रही हाईटेंशन लाइन पर आपत्ति जताई। इस स्थान को रक्षा उद्योग के लिए उपयुक्त नहीं माना और बिजली लाइन शिफ्ट न होने पर दूसरी जमीन चिह्नित करने के लिए कहा था। इसके बाद से ही नया स्थल चयनित करने की कवायद चल रही थी। अब बांगरमऊ तहसील क्षेत्र में चिह्नित नया स्थल आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के पास स्थित है। आसपास बिजली की लाइनें न होने से इसे रक्षा गलियारे के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे से सीधा संपर्क और आठ किलोमीटर की दूरी पर लखनऊ-आगरा व गंगा एक्सप्रेसवे का इंटरचेंज होने से यह स्थान बेहतर है। बांगरमऊ के एसडीएम ब्रजमोहन शुक्ला ने बताया कि यूपीडा की टीम अगले सप्ताह नई जमीन का स्थलीय निरीक्षण करेगी। उनकी सहमति के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मूर्त रूप ले रहा औद्योगिक गलियारा
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे से सटे सरांय कटियान गांव में 132 हेक्टेयर में औद्योगिक गलियारा बन रहा है। इसके साथ ही एक हजार हेक्टेयर में औद्योगिक हब भी विकसित किया जा रहा है। औद्योगिक गलियारे के आधारभूत ढांचे के लिए 186 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं तैयार की जा रही हैं। जिले के एससीआर में शामिल होने के बाद करीब एक हजार छोटे-बड़े उद्योग, गोदाम और शिक्षण संस्थान स्थापित होंगे। कृषि और पशु पालन आधारित उद्यम भी यहां स्थापित होने की प्रक्रिया में हैं। इन औद्योगिक गलियारों के बनने से मानवीय गतिविधियां बढ़ेंगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। खानपान, निर्माण सामग्री, कच्चे माल की आपूर्ति, परिवहन और डेयरी जैसे छोटे व घरेलू कारोबार भी बढ़ेंगे। आवास, स्कूल और अस्पताल जैसी आवश्यक सुविधाएं भी इन गलियारों के आसपास विकसित होंगी। यह विकास जिले के किसानों को सीधा लाभ दिलाएगा और ग्रामीण स्तर पर रोजगार बढ़ाएगा।
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वर्जन...
औद्योगिक गलियारे और रक्षा उद्योग गलियारे से जिला प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का राज्य बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। जिले में वन ट्रिलियन डॉलर (ओटीडी) सेल बनाई गई है। इसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों के अलावा उद्यमियों और निवेशकों के प्रतिनिधि भी सदस्य बनाए जा रहे हैं। सेल औद्योगिक विकास की नई संभावनाओं पर विचार-विमर्श कर योजनाएं तैयार करेगी। दोनों गलियारों में दो हजार से अधिक छोटे-बड़े उद्योग स्थापित करने का लक्ष्य है।
सुशील कुमार गोंड, एडीएम।
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प्रदेश सरकार ने जनवरी में रक्षा औद्योगिक गलियारा स्थापित करने की परियोजना को मंजूरी दी थी। जिला प्रशासन ने बिछिया ब्लॉक के सरांय कटियान, मुर्तजा नगर और ओरहर गांव की 230 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की थी। फरवरी में यूपीडा अधिकारियों ने निरीक्षण में भूमि के पास से गुजर रही हाईटेंशन लाइन पर आपत्ति जताई। इस स्थान को रक्षा उद्योग के लिए उपयुक्त नहीं माना और बिजली लाइन शिफ्ट न होने पर दूसरी जमीन चिह्नित करने के लिए कहा था। इसके बाद से ही नया स्थल चयनित करने की कवायद चल रही थी। अब बांगरमऊ तहसील क्षेत्र में चिह्नित नया स्थल आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के पास स्थित है। आसपास बिजली की लाइनें न होने से इसे रक्षा गलियारे के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे से सीधा संपर्क और आठ किलोमीटर की दूरी पर लखनऊ-आगरा व गंगा एक्सप्रेसवे का इंटरचेंज होने से यह स्थान बेहतर है। बांगरमऊ के एसडीएम ब्रजमोहन शुक्ला ने बताया कि यूपीडा की टीम अगले सप्ताह नई जमीन का स्थलीय निरीक्षण करेगी। उनकी सहमति के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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मूर्त रूप ले रहा औद्योगिक गलियारा
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे से सटे सरांय कटियान गांव में 132 हेक्टेयर में औद्योगिक गलियारा बन रहा है। इसके साथ ही एक हजार हेक्टेयर में औद्योगिक हब भी विकसित किया जा रहा है। औद्योगिक गलियारे के आधारभूत ढांचे के लिए 186 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं तैयार की जा रही हैं। जिले के एससीआर में शामिल होने के बाद करीब एक हजार छोटे-बड़े उद्योग, गोदाम और शिक्षण संस्थान स्थापित होंगे। कृषि और पशु पालन आधारित उद्यम भी यहां स्थापित होने की प्रक्रिया में हैं। इन औद्योगिक गलियारों के बनने से मानवीय गतिविधियां बढ़ेंगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। खानपान, निर्माण सामग्री, कच्चे माल की आपूर्ति, परिवहन और डेयरी जैसे छोटे व घरेलू कारोबार भी बढ़ेंगे। आवास, स्कूल और अस्पताल जैसी आवश्यक सुविधाएं भी इन गलियारों के आसपास विकसित होंगी। यह विकास जिले के किसानों को सीधा लाभ दिलाएगा और ग्रामीण स्तर पर रोजगार बढ़ाएगा।
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वर्जन...
औद्योगिक गलियारे और रक्षा उद्योग गलियारे से जिला प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का राज्य बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। जिले में वन ट्रिलियन डॉलर (ओटीडी) सेल बनाई गई है। इसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों के अलावा उद्यमियों और निवेशकों के प्रतिनिधि भी सदस्य बनाए जा रहे हैं। सेल औद्योगिक विकास की नई संभावनाओं पर विचार-विमर्श कर योजनाएं तैयार करेगी। दोनों गलियारों में दो हजार से अधिक छोटे-बड़े उद्योग स्थापित करने का लक्ष्य है।
सुशील कुमार गोंड, एडीएम।

फोटो-1-सरांय कटियान गांव के पास से निकली बिजली लाइन, जो डिफेंस कॉरिडोर में बाधक बनी। संवाद