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Unnao News: संयुक्त आयुक्त तो नपे, अब किसकी बारी

Sun, 26 Jul 2026 12:36 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2026 12:36 AM IST
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फोटो-13-विकास भवन परिसर स्थित एनआरएलएम कार्यालय। अर्काइव
उन्नाव। एनआरएलएम योजना में 3.85 करोड़ के घपले में एफआईआर, निलंबन और संबद्धीकरण की कार्रवाई के बाद भी विकास भवन के कुछ अधिकारी इसे दबाने में लगे रहे। शुक्रवार को संयुक्त आयुक्त मनरेगा संजय पांडेय को निलंबित करने के बाद शासन ने 13 महीने पहले दर्ज हुई प्राथमिकी में शामिल अज्ञात कर्मचारियों और फर्मों के नाम तलब किए गए तो खलबली मच गई। चर्चा हो रही है कि अब किसकी बारी है।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना (एनआरएलएम) में वित्तीय वर्ष 2023-24 में अभियान चलाकर गरीब परिवारों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने, नए समूह गठित करने और महिलाओं को रुचि और योग्यता के आधार पर प्रशिक्षण देने की योजना थी। इसके लिए 18 अप्रैल 2023 से 30 जून 2023 तक जिले में अभियान चलाया गया था। शासन ने प्रति समूह 10,000 रुपये के हिसाब से 3558 समूहों के लिए 3.85 करोड़ रुपये जारी किए थे। निजी वेंडरों, कानपुर देहात और उन्नाव की एक-एक और चित्रकूट की तीन फर्मों के खातों में बजट भेजकर गबन का मामला सामने आने पर शहर के एबी नगर निवासी कांग्रेसी नेता अक्षत सिंह ने तत्कालीन डीएम और प्रभारी मंत्री से शिकायत की थी।
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डीएम के निर्देश पर तत्कालीन सीडीओ प्रेम प्रकाश मीणा ने चार सदस्यीय टीम से जांच कराई। 3.85 करोड़ का गबन मिलने पर 23 मार्च 2025 को तत्कालीन डीडीओ व उपायुक्त स्वत: रोजगार संजय पांडेय और एनआरएलएम की जिला मिशन प्रबंधक शिखा मिश्रा व अन्य अज्ञात बीएमएम के खिलाफ डीआरडीए के परियोजना निदेशक तेजवंत सिंह ने सदर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई। प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई व जिला मिशन प्रबंधक को सेवा से हटाने की संस्तुति, अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास को भेजी थी। हालांकि इसके बाद भी घोटाले के आरोपी तत्कालीन डीडीओ व संयुक्त आयुक्त मनरेगा पर निलंबन की कार्रवाई में 13 महीने लग गए जबकि विकास भवन के कुछ जिम्मेदार अफसर दर्ज प्राथमिकी में शामिल अज्ञात बीएमएम, सीएलएफ और उन फर्मों के नाम जिनके नाम पर भुगतान किया गया, का पता नहीं लगा पाए हैं। अब शासन ने रिपोर्ट तलब की है।
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वर्जन...
घपले का मामला मेरे कार्यकाल से पहले का है। संबंधित अधिकारियों पर पहले ही कार्रवाई हुई थी। रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। अब शासन ने इसमें शामिल तत्कालीन बीएमएम, सीएलएफ व अन्य लोगों के नाम मांगे हैं। डीसी एनआरएलएम से पुरानी फाइलों से नाम आदि की जानकारी कर सूचना इकट्ठा की जा रही है। इसकी रिपोर्ट जल्द ही शासन को भेजी जाएगी, आगे की कार्रवाई शासन से ही होगी। -कृति राज, सीडीओ।


बजट मिलते ही बुन लिया गबन का ताना-बाना

केंद्र से बजट जारी होते ही जिम्मेदारों ने घपले का ताना-बाना बुन लिया और करोड़ों डकार लिए। नियमानुसार नोडल जिला मिशन मैनेजर (डीएमएम) शिखा मिश्रा को जिले के सभी 16 ब्लॉकों में संचालित सभी 64 क्लस्टर स्तरीय फेडरेशन (सीएलएफ) को जोड़ना था। जांच में पाया गया कि ब्लॉक मिशन मैनेजर (बीएमएम) की मिलीभगत से सिर्फ 47 क्लस्टर स्तरीय संघ (सीएलएफ) को जोड़ा गया और उनके खाते में भुगतान करने के बाद दबाव बनाकर रकम वापस ले ली। जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन उपायुक्त, स्वतः रोजगार व निवर्तमान (शुक्रवार को निलंबित) संयुक्त आयुक्त मनरेगा संजय पांडेय, डीएमएम शिखा मिश्रा को निलंबित किया गया और डीडीओ ने इन दोनों के अलावा अज्ञात बीएमएम व सीएलएफ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।



यहां मिली थीं गड़बड़ी
जांच टीम ने पाया था कि दो सितंबर 2023 को सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन पोर्टल (पीएफएमएस) के माध्यम से धनराशि भेजने की सूचना और उसे किस प्रकार से उपभोग करना है और उपभोग प्रमाणपत्र आदि के कोई दिशा निर्देश नहीं दिए गए। खंड विकास अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई। जांच में मिला कि सभी 16 ब्लॉकों से 196488 परिवारों को सोशल मोबिलाइजेशन कैंपेन के जरिए जोड़ने की बात कही गई लेकिन उनके पास इसका ब्योरा नहीं मिला। रिपोर्ट में सोशल मोबिलाइजेशन कैंपेन के दौरान स्वयं सहायता समूहों में जोड़े गए सदस्यों की संख्या 1,96,488 बताई गई जबकि वास्तव में यह संख्या 70,713 ही है।


यह भी पाया गया था कि शिखा मिश्रा की रिपोर्ट में 1,25,775 का अंतर उनकी रिपोर्ट को फर्जी साबित करता है। रिपोर्ट होने का प्रमाण है। गलत तरीके से शामिल की गईं चित्रकूट की तीन और उन्नाव व कानपुर देहात की एक-एक फर्म के बिल आठ जनवरी 2024 को शिखा ने अपने व्हाट्सएप से हिलौली ब्लॉक की बीएमएम शबीना बानो व अन्य बीएमएम को भेजकर एक ही दिन में 83 लाख 75 हजार 662 रुपये का भुगतान कराकर गबन किया। इसी तरह बाद में अन्य तारीखों में भी भुगतान हुआ था।
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