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Unnao News: गद्दा आपूर्ति करने वाली फर्म का 68.85 लाख भुगतान रोका
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उन्नाव। चार दिन पहले मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में जोड़ों को उपहार स्वरूप टीएमसी झंडे प्रिंट कवर वाले गद्दे देने वाली अलीगढ़ की फर्म के 68.85 लाख रुपये के भुगतान पर रोक लगा दी गई है। फर्म को काली सूची में डालने के साथ अनुबंध भी खत्म करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
24 जुलाई को हड़हा स्थित डॉ. वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया था। इसमें 459 जोड़े विवाह बंधन में बंधे थे। जोड़ों को उपहार में गद्दे दिए गए थे। उनमें कई गद्दों के कवर का रंग हरा, केसरिया व सफेद था, साथ ही उसमें फूल बने हुए थे। गद्दों में अंग्रेजी में टीएमसी भी लिखा हुआ था। यह बंगाल की टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) पार्टी के झंडे के हूबहू जैसा था।
मामले में सामान सप्लाई करने वाली अलीगढ़ के बरौली रोड पटवारी का नगर निकट पुलिस चौकी की फर्म मेसर्स इंडियन जनरल ट्रेडर्स ने 15 हजार रुपये में शासन से निर्धारित 22 सामानों को डालने का ठेका लिया था जबकि निर्धारित दर 21 हजार रुपये प्रति जोड़ा था। कम दर पर टेंडर डालने से उसे सप्लाई की जिम्मेदारी मिली थी।
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इस हिसाब से फर्म का 68.85 लाख रुपये का भुगतान बना है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सेवा में कमी के कारण फर्म को भुगतान नहीं किया जाएगा। समाज कल्याण अधिकारी श्रीप्रकाश पांडेय का कहना है कि फर्म काली सूची में डाली जाएगी। इसके साथ ही अनुबंध भी खत्म किया जाएगा, जिससे भविष्य में फर्म कोई काम नहीं कर पाएगी। यह सभी कार्रवाई प्रस्तावित हैं। इसके लिए फर्म को जारी नोटिस के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।
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24 जुलाई को हड़हा स्थित डॉ. वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया था। इसमें 459 जोड़े विवाह बंधन में बंधे थे। जोड़ों को उपहार में गद्दे दिए गए थे। उनमें कई गद्दों के कवर का रंग हरा, केसरिया व सफेद था, साथ ही उसमें फूल बने हुए थे। गद्दों में अंग्रेजी में टीएमसी भी लिखा हुआ था। यह बंगाल की टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) पार्टी के झंडे के हूबहू जैसा था।
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मामले में सामान सप्लाई करने वाली अलीगढ़ के बरौली रोड पटवारी का नगर निकट पुलिस चौकी की फर्म मेसर्स इंडियन जनरल ट्रेडर्स ने 15 हजार रुपये में शासन से निर्धारित 22 सामानों को डालने का ठेका लिया था जबकि निर्धारित दर 21 हजार रुपये प्रति जोड़ा था। कम दर पर टेंडर डालने से उसे सप्लाई की जिम्मेदारी मिली थी।
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इस हिसाब से फर्म का 68.85 लाख रुपये का भुगतान बना है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सेवा में कमी के कारण फर्म को भुगतान नहीं किया जाएगा। समाज कल्याण अधिकारी श्रीप्रकाश पांडेय का कहना है कि फर्म काली सूची में डाली जाएगी। इसके साथ ही अनुबंध भी खत्म किया जाएगा, जिससे भविष्य में फर्म कोई काम नहीं कर पाएगी। यह सभी कार्रवाई प्रस्तावित हैं। इसके लिए फर्म को जारी नोटिस के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।