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Unnao News: एक्सप्रेसवे निर्माण की खामियों को बारिश के बहाने दबा रहे जिम्मेदार
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उन्नाव। यातायात शुरू होने के साथ ही धंस और टूट रही कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की सड़क को लेकर निर्माण एजेंसी के लोग तमाम बहाने बना रहे हैं। अधिकारी बारिश को वजह बताकर अपना बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन एनएचएआई की पिछली घटना में निर्माण एजेंसी के तीन तकनीकी अधिकारियों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई से तो यह साबित हाे गया है कि निर्माण में गड़बड़ी तो हुई है।
चार दिन पहले रविवार को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर कोरारी टोल प्लाजा के पास सड़क धंसने की घटना में एनएचएआई ने निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर-सह विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर के टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेसिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटाने के साथ ही अगले दो साल तक के लिए एनएचएआई की किसी भी परियोजना में करने पर प्रतिबंधित कर दिया गया है। कोरारी के पास सड़क धंसने की घटना में एनएचएआई की तकनीकी टीम ने पाया कि पुल के डेक स्लैब के ऊपर पेवमेंट में कमी पाई गई। मानसून के दौरान लगातार यातायात का दबाव में लेन के जोड़ों में कमी के कारण बारिश का पानी अंदर पहुंचा और मिट्टी बैठने व बह जाने से सड़क दब गई।
वर्जन...
यह समस्या केवल सड़क की ऊपरी परत तक सीमित है। नींव और ढांचा पूरी तरह सुरक्षित है। जहां भी इस तरह की कमी आ रही है। निर्माण एजेंसी के माध्यम से सुधार कराया जा रहा है। पुरानी परत को हटाकर नई बिछाई। साथ ही यही सुनिश्चत किया जा रहा है कि फिर कभी बारिश का पानी सड़क को नुकसान न पहुंचाए।-नकुल प्रकाश वर्मा, पीडी एनएचएआई
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चार दिन पहले रविवार को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर कोरारी टोल प्लाजा के पास सड़क धंसने की घटना में एनएचएआई ने निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर-सह विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर के टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेसिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटाने के साथ ही अगले दो साल तक के लिए एनएचएआई की किसी भी परियोजना में करने पर प्रतिबंधित कर दिया गया है। कोरारी के पास सड़क धंसने की घटना में एनएचएआई की तकनीकी टीम ने पाया कि पुल के डेक स्लैब के ऊपर पेवमेंट में कमी पाई गई। मानसून के दौरान लगातार यातायात का दबाव में लेन के जोड़ों में कमी के कारण बारिश का पानी अंदर पहुंचा और मिट्टी बैठने व बह जाने से सड़क दब गई।
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यह समस्या केवल सड़क की ऊपरी परत तक सीमित है। नींव और ढांचा पूरी तरह सुरक्षित है। जहां भी इस तरह की कमी आ रही है। निर्माण एजेंसी के माध्यम से सुधार कराया जा रहा है। पुरानी परत को हटाकर नई बिछाई। साथ ही यही सुनिश्चत किया जा रहा है कि फिर कभी बारिश का पानी सड़क को नुकसान न पहुंचाए।-नकुल प्रकाश वर्मा, पीडी एनएचएआई
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