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Unnao News: 4220 रुपये के फर्जी बिल लगाने पर पशु चिकित्साधिकारी निलंबित
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उन्नाव। डीजल खरीद के मात्र 4220 रुपये के भुगतान के लिए फर्जी बिल लगाने पर अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने सिकंदरपुर कर्ण के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. शरद शाक्य को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उन्हें कार्यालय जिलाधिकारी सोनभद्र से संबद्ध किया गया है।
सिकंदरपुर कर्ण के पशु चिकित्साधिकारी के खिलाफ 4220 रुपये का डीजल बिना खरीदे उसके बिल का भुगतान कराने का आरोप लगा था। इसकी शिकायत शासन तक पहुंची थी। शासन के आदेश पर अपर मुख्य सचिव ने कानपुर के अपर निदेशक ग्रेड-2 को जांच सौंपी थी। लंबा समय बीत जाने के बाद भी जब अपर निदेशक ने रिपोर्ट नहीं दी तो मामले की जांच निदेशक प्रशासन एवं विकास को सौंप दी गई। निदेशक ने अपर मुख्य सचिव को भेजी रिपोर्ट में अपर निदेशक द्वारा जांच न किए जाने की जानकारी दी। साथ ही पशु चिकित्साधिकारी व अपर निदेशक के बीच आपसी समझौते की रिपोर्ट देते हुए दोनों पर कार्रवाई की संस्तुति की। इसी आधार पर अपर मुख्य सचिव ने पशु चिकित्साधिकारी को निलंबित कर दिया। अपर निदेशक कानपुर के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके अलावा मामले की विस्तृत जांच मंडलायुक्त लखनऊ को सौंपी है।
इंसेट-1
वित्तीय अनियमितता पर पूर्व में निलंबित किए जा चुके हैं सीवीओ
पशुपालन विभाग में अंधेरगर्दी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी कार्रवाई हो चुकी है। पिछले साल जिले के 16 विकासखंडों में 12 पशु चिकित्सालयों व दो केंद्रों की मरम्मत व रंगरोगन के लिए 13.80 लाख रुपये आवंटित हुए थे। मामले में तत्कालीन सीवीओ डॉ. महावीर सिंह ने बिना पूर्ण कार्य के कार्यदायी संस्थाओं को पूर्ण भुगतान कर दिया था। शासन तक पहुंची शिकायत के बाद इसकी जांच हुई थी। मामले में गड़बड़ी की पुष्टि हुई थी। इसके अलावा कार्यालय प्रयोग के लिए की गई सामान खरीद में भी जमकर अंधेरगर्दी सामने आई थी। इसके बाद सीवीओ डॉ. महावीर सिंह को 31 अक्तूबर को रिटायरमेंट से पहले ही 29 अक्तूबर को निलंबित कर दिया गया था।
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सिकंदरपुर कर्ण के पशु चिकित्साधिकारी के खिलाफ 4220 रुपये का डीजल बिना खरीदे उसके बिल का भुगतान कराने का आरोप लगा था। इसकी शिकायत शासन तक पहुंची थी। शासन के आदेश पर अपर मुख्य सचिव ने कानपुर के अपर निदेशक ग्रेड-2 को जांच सौंपी थी। लंबा समय बीत जाने के बाद भी जब अपर निदेशक ने रिपोर्ट नहीं दी तो मामले की जांच निदेशक प्रशासन एवं विकास को सौंप दी गई। निदेशक ने अपर मुख्य सचिव को भेजी रिपोर्ट में अपर निदेशक द्वारा जांच न किए जाने की जानकारी दी। साथ ही पशु चिकित्साधिकारी व अपर निदेशक के बीच आपसी समझौते की रिपोर्ट देते हुए दोनों पर कार्रवाई की संस्तुति की। इसी आधार पर अपर मुख्य सचिव ने पशु चिकित्साधिकारी को निलंबित कर दिया। अपर निदेशक कानपुर के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके अलावा मामले की विस्तृत जांच मंडलायुक्त लखनऊ को सौंपी है।
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वित्तीय अनियमितता पर पूर्व में निलंबित किए जा चुके हैं सीवीओ
पशुपालन विभाग में अंधेरगर्दी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी कार्रवाई हो चुकी है। पिछले साल जिले के 16 विकासखंडों में 12 पशु चिकित्सालयों व दो केंद्रों की मरम्मत व रंगरोगन के लिए 13.80 लाख रुपये आवंटित हुए थे। मामले में तत्कालीन सीवीओ डॉ. महावीर सिंह ने बिना पूर्ण कार्य के कार्यदायी संस्थाओं को पूर्ण भुगतान कर दिया था। शासन तक पहुंची शिकायत के बाद इसकी जांच हुई थी। मामले में गड़बड़ी की पुष्टि हुई थी। इसके अलावा कार्यालय प्रयोग के लिए की गई सामान खरीद में भी जमकर अंधेरगर्दी सामने आई थी। इसके बाद सीवीओ डॉ. महावीर सिंह को 31 अक्तूबर को रिटायरमेंट से पहले ही 29 अक्तूबर को निलंबित कर दिया गया था।
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