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Unnao News: तालाब नीलामी के नौ लाख दंगल और मेले पर किए खर्च, प्रधान को नोटिस
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उन्नाव। सिकंदरपुर सरोसी विकासखंड की ग्राम पंचायत मरौंदा सूचित की प्रधान रमापति ने तालाब नीलामी की 12 लाख रुपये की रकम में से मात्र तीन लाख रुपये खाते में जमा किए। प्रधान ने नौ लाख रुपये दंगल और मेले जैसे आयोजनों पर खर्च किए। इस खर्च से संबंधित कोई अभिलेख वह प्रस्तुत नहीं कर सकीं। इस पर डीएम ने उन्हें नोटिस जारी किया है।
मरौंदा सूचित के शिवशंकर सविता ने तालाब नीलामी की रकम में बंदरबांट की शिकायत की थी। बताया था कि गाटा संख्या 949 पर 2.301 हेक्टेयर जमीन तालाब के रूप में दर्ज है। इसकी मछली और सिंघाड़ा आदि के लिए नीलामी की गई थी। नीलामी से मिली पूरी रकम ग्रामसभा के खाते में जमा नहीं की गई थी। डीएम ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जांच टीम बनाई थी। टीम ने गांव जाकर सत्यापन किया और अभिलेखों की जांच की। जांच में सामने आया कि केवल तीन लाख रुपये ही खाते में जमा हुए थे। इस पर डीएम ने प्रधान से जवाब मांगा। इस पर प्रधान ने नौ लाख रुपये दंगल और पूर्णिमा पर्व पर मेले आदि के आयोजन में खर्च करना बताया। जब टीम ने अभिलेख मांगे तो प्रधान उपलब्ध नहीं करा सकीं।
डीएम घनश्याम मीना ने प्रधान रमापति को अनियमित खर्च का दोषी पाया। प्रधान को नोटिस जारी कर नौ लाख रुपये ग्रामसभा के खाते में जमा करने के निर्देश दिए। चेतावनी दी कि यदि 15 दिन में रकम जमा नहीं हुई तो भू-राजस्व की तरह वसूली की जाएगी।
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नीलामी भी नहीं कराई
शासनादेश के अनुसार, ग्रामसभा के किसी सामान की नीलामी का पहले प्रचार-प्रसार कराया जाना अनिवार्य है। इसके लिए समाचार पत्र में विज्ञापन के माध्यम से प्रक्रिया अपनाई जाती है। परंतु प्रधान ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उन्होंने लेखपाल या सचिव को भी कोई जानकारी नहीं दी और बिना सूचना दिए ही नीलामी करा दी।
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मरौंदा सूचित के शिवशंकर सविता ने तालाब नीलामी की रकम में बंदरबांट की शिकायत की थी। बताया था कि गाटा संख्या 949 पर 2.301 हेक्टेयर जमीन तालाब के रूप में दर्ज है। इसकी मछली और सिंघाड़ा आदि के लिए नीलामी की गई थी। नीलामी से मिली पूरी रकम ग्रामसभा के खाते में जमा नहीं की गई थी। डीएम ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जांच टीम बनाई थी। टीम ने गांव जाकर सत्यापन किया और अभिलेखों की जांच की। जांच में सामने आया कि केवल तीन लाख रुपये ही खाते में जमा हुए थे। इस पर डीएम ने प्रधान से जवाब मांगा। इस पर प्रधान ने नौ लाख रुपये दंगल और पूर्णिमा पर्व पर मेले आदि के आयोजन में खर्च करना बताया। जब टीम ने अभिलेख मांगे तो प्रधान उपलब्ध नहीं करा सकीं।
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डीएम घनश्याम मीना ने प्रधान रमापति को अनियमित खर्च का दोषी पाया। प्रधान को नोटिस जारी कर नौ लाख रुपये ग्रामसभा के खाते में जमा करने के निर्देश दिए। चेतावनी दी कि यदि 15 दिन में रकम जमा नहीं हुई तो भू-राजस्व की तरह वसूली की जाएगी।
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नीलामी भी नहीं कराई
शासनादेश के अनुसार, ग्रामसभा के किसी सामान की नीलामी का पहले प्रचार-प्रसार कराया जाना अनिवार्य है। इसके लिए समाचार पत्र में विज्ञापन के माध्यम से प्रक्रिया अपनाई जाती है। परंतु प्रधान ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उन्होंने लेखपाल या सचिव को भी कोई जानकारी नहीं दी और बिना सूचना दिए ही नीलामी करा दी।