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Unnao News: एक्सप्रेसवे पर 24 घंटे में गुजरे 22 हजार वाहन
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फोटो-31- कानपुर-लखनऊ हाईवे पर कम रही वाहनों की संख्या। संवाद
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उन्नाव। टोल फ्री होते ही बृहस्पतिवार को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर वाहनों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई। औसतन प्रतिदिन जहां 8869 वाहन एक्सप्रेसवे से गुजर रहे थे, वहीं उनकी संख्या बढ़कर 20-22 हजार पहुंच गई। नेशनल हाईवे व एलिवेटेड रोड के नीचे से गुजरने वाले वाहन भी एक्सप्रेसवे से गुजरे जिससे ट्रैफिक अधिक रहा।
4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे पर तीन हफ्तों के अंदर कई बार सड़क धंसी। इससे एनएचएआई की राष्ट्रीय स्तर पर काफी किरकिरी हुई। मामले को लेकर बीते बुधवार को एनएचएआई प्रशासन ने परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को हटा दिया। निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्रोटेक लिमिटेड को भी अयोग्य घोषित कर दिया। इसके अतिरिक्त एक्सप्रेसवे मरम्मत के दाैरान टोल फ्री कर दिया गया। इसका असर बृहस्पतिवार को देखने को मिला। एक्सप्रेसवे पर टोल फ्री होते ही वाहनों की संख्या बढ़ गई। जो वाहन नेशनल हाइवे से चल रहे थे, वे भी एक्सप्रेसवे के रास्ते आ गए।
सड़क मरम्मत के दाैरान डायवर्जन भी लागू किया गया है। इससे जाम की स्थिति भी पैदा हुई। हालांकि एनएचएआई व निर्माण एजेंसी स्टाफ माैके पर उपस्थित रहा, जिससे हालात सामान्य हो सके।
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एनएचएआई से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बीती 14 से 30 जुलाई के बीच एक्सप्रेसवे से कुल 133040 वाहन गुजरे। इसमें हैवी मशीनरी वाहन 8080, बस व ट्रक 7267, लाइट मोटर व्हीकल 2101, चार पहिया 115589 वाहन टोल से गुजरे। अधिकारियों के मुताबिक प्रतिदिन करीब 8869 वाहन गुजर रहे थे। जिनकी संख्या पांच अगस्त तक प्रतिदिन बढ़कर करीब 10 हजार पहुंच गई थी लेकिन बृहस्पतिवार को टोलफ्री होते ही वाहनों की संख्या दोगुने से अधिक हो गई। यह 20 से 22 हजार पहुंच गई।
हाईवे पर घटी वाहनों की संख्या
नवाबगंज/सोनिक। क्षतिग्रस्त कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के सुधार होने तक एनएचएआई ने टोल वसूली पर रोक लगा दी है। बुधवार को दोपहर बाद जैसे ही लोगों को जानकारी हुई एक्सप्रेसवे पर वाहनों की संख्या बढ़ गई। बुधवार दोपहर दो बजे से बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे तक कानपुर-लखनऊ हाईवे (एनएच 27) के नवाबगंज टोल पर 24 घंटे की अपेक्षा 608 वाहन कम निकले। 280 भारी और 328 हल्के चार पहिया वाहनों की कमी हुई। मालूम हो कि एक्सप्रेसवे शुरू होते ही इस हाईवे पर 6500 वाहन कम हो गए थे।
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बुधवार को एनएचएआई ने टोल वसूली पर रोक लगा दी थी। एक्सप्रेसवे (एनई 6) पर यातायात शुरू होने से पहले 13 जुलाई तक रोजाना औसतन नौ हजार बड़े और 10 हजार छोटे वाहन निकलते थे। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद औसतन पांच हजार छोटे और दो हजार भारी वाहन कम हो गए थे। बुधवार को एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली बंद होने के बाद से 24 घंटे में 608 वाहन और कम हो गए। टोल संचालक कंपनी के मैनेजर दीपक यादव ने बताया कि हाईवे पर वाहनों की संख्या घटने का सिलसिला लगातार जारी है। 24 घंटे में करीब 1.25 लाख की वसूली कम हुई है और ऐसे ही चला तो आने वाले दिनों में और कमी आएगी।
फोटो-33, 34
एक्सप्रेसवे की दोनों लेन धंसने से निर्माण की खामियां उजागर
असोहा/अचलगंज। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बेहटा गांव के पास कानपुर से लखनऊ लेन पर किलोमीटर संख्या 64 से 65 के बीच जहां पर सड़क धंसी है वहां पर इस एक्सप्रेसवे का सबसे लंबा 250 मीटर पुल बना है। पुल और पुल के दोनों तरफ की एप्रोच रोड में मिट्टी दबने से 200 मीटर सड़क भी धंस गई। लगातार पांच दिन से चल रही मरम्मत के बाद भी अभी 70 मीटर हिस्से की मरम्मत बाकी है। पीएनसी का दावा है कि शुक्रवार दोपहर तक डायवर्जन खत्म करके यातायात सामान्य कर दिया जाएगा।
63 किलोमीटर लंबे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को बनाने पर प्रति किलोमीटर करीब 66 करोड़ रुपये के हिसाब से 4200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। लोकार्पण के समय एनएचएआई और पीएनसी ने दावा किया था कि वाहन 120 किलोमीटर की रफ्तार से चल सकेंगे और कानपुर से लखनऊ की दो घंटे की दूरी महज 45 मिनट में पूरी होगी लेकिन लोकार्पण के महज 17वें दिन से ही जगह-जगह धंसने लगा और यह सिलसिला अभी तक जारी है।
एक तकनीकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुल निर्माण के बाद स्लैब के ऊपर करीब दो फीट मिट्टी भरने के बाद डामरीकरण कराया गया इससे कुछ स्थानों पर सड़क में दरारें आईं। बारिश का पानी जाने से दलदल बनने से सड़क धंस गई। यही वजह है कि इसी स्थान पर जब दूसरी लेन (लखनऊ-से कानपुर) की ओर से ट्रैफिक डायवर्जन करके भारी वाहनों को निकाला गया तो लखनऊ से कानपुर वाली लेन भी धंस गई।
फोटो-35, 36
एक्सप्रेसवे के किनारे तक घूम रहे मवेशी
एक्सप्रेसवे पर यातायात को सुरक्षित बनाने के लिए दोहरी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। मवेशियों की पहुंच रोकने के लिए सड़क के दोनों तरफ किनारे, स्टील सेफ्टी वॉल और इसके बाद नीचे की तरफ लोहे की फेंसिंग लगाई गई है। लेकिन फेंसिंग कई जगह टूटी चुकी है इससे मवेशी एक्सप्रेसवे के पास तक घूमते नजर आ रहे हैं। लोगों ने बताया कि कई बार मवेशी लड़ते हुए सेफ्टी वॉल फांदकर एक्सप्रेसवे पर भी आ जाते हैं।पीएनसी के प्रोजेक्ट मैनेजर विजय एस कुंडू ने बताया कि फेंसिंग की मरम्मत का काम चल रहा है। ग्रामीणों को भी सचेत किया जा रहा है।
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छह लेन का एक्सप्रेसवे, छह किमी में सिर्फ दो लेन
वैसे तो कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे छह लेन (दोनों तरफ तीन-तीन) का है लेकिन छह किलोमीटर के दायरे में इसपर दोनों लेन का यातायात तीन लेन से और बृहस्पतिवार को सड़क धंसने के बाद मरम्मत कराने के लिए एक और लेन को बंद कर दिया गया और दोनों तरफ का यातायात केवल दो लेन से ही चलाया जा रहा है।
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4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे पर तीन हफ्तों के अंदर कई बार सड़क धंसी। इससे एनएचएआई की राष्ट्रीय स्तर पर काफी किरकिरी हुई। मामले को लेकर बीते बुधवार को एनएचएआई प्रशासन ने परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को हटा दिया। निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्रोटेक लिमिटेड को भी अयोग्य घोषित कर दिया। इसके अतिरिक्त एक्सप्रेसवे मरम्मत के दाैरान टोल फ्री कर दिया गया। इसका असर बृहस्पतिवार को देखने को मिला। एक्सप्रेसवे पर टोल फ्री होते ही वाहनों की संख्या बढ़ गई। जो वाहन नेशनल हाइवे से चल रहे थे, वे भी एक्सप्रेसवे के रास्ते आ गए।
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सड़क मरम्मत के दाैरान डायवर्जन भी लागू किया गया है। इससे जाम की स्थिति भी पैदा हुई। हालांकि एनएचएआई व निर्माण एजेंसी स्टाफ माैके पर उपस्थित रहा, जिससे हालात सामान्य हो सके।
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एनएचएआई से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बीती 14 से 30 जुलाई के बीच एक्सप्रेसवे से कुल 133040 वाहन गुजरे। इसमें हैवी मशीनरी वाहन 8080, बस व ट्रक 7267, लाइट मोटर व्हीकल 2101, चार पहिया 115589 वाहन टोल से गुजरे। अधिकारियों के मुताबिक प्रतिदिन करीब 8869 वाहन गुजर रहे थे। जिनकी संख्या पांच अगस्त तक प्रतिदिन बढ़कर करीब 10 हजार पहुंच गई थी लेकिन बृहस्पतिवार को टोलफ्री होते ही वाहनों की संख्या दोगुने से अधिक हो गई। यह 20 से 22 हजार पहुंच गई।
हाईवे पर घटी वाहनों की संख्या
नवाबगंज/सोनिक। क्षतिग्रस्त कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के सुधार होने तक एनएचएआई ने टोल वसूली पर रोक लगा दी है। बुधवार को दोपहर बाद जैसे ही लोगों को जानकारी हुई एक्सप्रेसवे पर वाहनों की संख्या बढ़ गई। बुधवार दोपहर दो बजे से बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे तक कानपुर-लखनऊ हाईवे (एनएच 27) के नवाबगंज टोल पर 24 घंटे की अपेक्षा 608 वाहन कम निकले। 280 भारी और 328 हल्के चार पहिया वाहनों की कमी हुई। मालूम हो कि एक्सप्रेसवे शुरू होते ही इस हाईवे पर 6500 वाहन कम हो गए थे।
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बुधवार को एनएचएआई ने टोल वसूली पर रोक लगा दी थी। एक्सप्रेसवे (एनई 6) पर यातायात शुरू होने से पहले 13 जुलाई तक रोजाना औसतन नौ हजार बड़े और 10 हजार छोटे वाहन निकलते थे। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद औसतन पांच हजार छोटे और दो हजार भारी वाहन कम हो गए थे। बुधवार को एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली बंद होने के बाद से 24 घंटे में 608 वाहन और कम हो गए। टोल संचालक कंपनी के मैनेजर दीपक यादव ने बताया कि हाईवे पर वाहनों की संख्या घटने का सिलसिला लगातार जारी है। 24 घंटे में करीब 1.25 लाख की वसूली कम हुई है और ऐसे ही चला तो आने वाले दिनों में और कमी आएगी।
फोटो-33, 34
एक्सप्रेसवे की दोनों लेन धंसने से निर्माण की खामियां उजागर
असोहा/अचलगंज। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बेहटा गांव के पास कानपुर से लखनऊ लेन पर किलोमीटर संख्या 64 से 65 के बीच जहां पर सड़क धंसी है वहां पर इस एक्सप्रेसवे का सबसे लंबा 250 मीटर पुल बना है। पुल और पुल के दोनों तरफ की एप्रोच रोड में मिट्टी दबने से 200 मीटर सड़क भी धंस गई। लगातार पांच दिन से चल रही मरम्मत के बाद भी अभी 70 मीटर हिस्से की मरम्मत बाकी है। पीएनसी का दावा है कि शुक्रवार दोपहर तक डायवर्जन खत्म करके यातायात सामान्य कर दिया जाएगा।
63 किलोमीटर लंबे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को बनाने पर प्रति किलोमीटर करीब 66 करोड़ रुपये के हिसाब से 4200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। लोकार्पण के समय एनएचएआई और पीएनसी ने दावा किया था कि वाहन 120 किलोमीटर की रफ्तार से चल सकेंगे और कानपुर से लखनऊ की दो घंटे की दूरी महज 45 मिनट में पूरी होगी लेकिन लोकार्पण के महज 17वें दिन से ही जगह-जगह धंसने लगा और यह सिलसिला अभी तक जारी है।
एक तकनीकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुल निर्माण के बाद स्लैब के ऊपर करीब दो फीट मिट्टी भरने के बाद डामरीकरण कराया गया इससे कुछ स्थानों पर सड़क में दरारें आईं। बारिश का पानी जाने से दलदल बनने से सड़क धंस गई। यही वजह है कि इसी स्थान पर जब दूसरी लेन (लखनऊ-से कानपुर) की ओर से ट्रैफिक डायवर्जन करके भारी वाहनों को निकाला गया तो लखनऊ से कानपुर वाली लेन भी धंस गई।
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एक्सप्रेसवे के किनारे तक घूम रहे मवेशी
एक्सप्रेसवे पर यातायात को सुरक्षित बनाने के लिए दोहरी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। मवेशियों की पहुंच रोकने के लिए सड़क के दोनों तरफ किनारे, स्टील सेफ्टी वॉल और इसके बाद नीचे की तरफ लोहे की फेंसिंग लगाई गई है। लेकिन फेंसिंग कई जगह टूटी चुकी है इससे मवेशी एक्सप्रेसवे के पास तक घूमते नजर आ रहे हैं। लोगों ने बताया कि कई बार मवेशी लड़ते हुए सेफ्टी वॉल फांदकर एक्सप्रेसवे पर भी आ जाते हैं।पीएनसी के प्रोजेक्ट मैनेजर विजय एस कुंडू ने बताया कि फेंसिंग की मरम्मत का काम चल रहा है। ग्रामीणों को भी सचेत किया जा रहा है।
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छह लेन का एक्सप्रेसवे, छह किमी में सिर्फ दो लेन
वैसे तो कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे छह लेन (दोनों तरफ तीन-तीन) का है लेकिन छह किलोमीटर के दायरे में इसपर दोनों लेन का यातायात तीन लेन से और बृहस्पतिवार को सड़क धंसने के बाद मरम्मत कराने के लिए एक और लेन को बंद कर दिया गया और दोनों तरफ का यातायात केवल दो लेन से ही चलाया जा रहा है।

फोटो-31- कानपुर-लखनऊ हाईवे पर कम रही वाहनों की संख्या। संवाद

फोटो-31- कानपुर-लखनऊ हाईवे पर कम रही वाहनों की संख्या। संवाद

फोटो-31- कानपुर-लखनऊ हाईवे पर कम रही वाहनों की संख्या। संवाद

फोटो-31- कानपुर-लखनऊ हाईवे पर कम रही वाहनों की संख्या। संवाद

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