{"_id":"6a0b6bf5b3e24312d30a4909","slug":"unnao-news-unnao-news-c-221-1-uno1001-150636-2026-05-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Unnao News: रुपये और जेवर के लिए दबा दिया मां का गला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Unnao News: रुपये और जेवर के लिए दबा दिया मां का गला
विज्ञापन
फोटो-24 रामदुलारी (फाइल फोटो)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
नवाबगंज (उन्नाव)। जंगल में लकड़ी लेने गई वृद्ध महिला की रविवार को छोटे बेटे ने रुपये और जेवर के लालच में गला दबाकर हत्या कर दी। दूसरे दिन जंगल से शव बरामद होने के बाद वह घर से भाग गया। बड़े बेटे ने छोटे भाई के खिलाफ मां की हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई है।
अजगैन कोतवाली क्षेत्र के शीतलखेड़ा गांव निवासी रामेशन ने पुलिस को बताया कि मां रामदुलारी (67) घर में अकेले रहती थीं। चार बेटों में रामकेशन, हरिश्चंद्र, राकेश और बिंदा प्रसाद हैं। सभी गांव में ही अलग-अलग घर बनाकर रहते हैं। रविवार की दोपहर मां खाना बनाने के लिए लकड़ियां तोड़ने गांव के बाहर जंगल में गई थीं। उनके साथ भाई बिंदा प्रसाद भी गया था।
बिंदा प्रसाद करीब एक घंटे बाद जंगल से अकेला घर आ गया। मां नहीं आईं। देर रात तक जब मां घर नहीं लौटीं तो उनकी तलाश शुरू की गई। रातभर तलाश करने के बाद भी सुराग नहीं मिला। सोमवार सुबह गांव से करीब एक किलोमीटर दूर जंगल में मां का शव पड़ा मिला। मौके पर पहुंचे तो देखा मां के शरीर पर चोट के निशान के साथ गले में भी निशान था। बिंदा प्रसाद शव मिलने के बाद से लापता है। घटना की सूचना पर पुलिस ने फील्ड यूनिट टीम के साथ जांच की और शव का पोस्टमार्टम कराया। उसमें गला दबाकर हत्या करने के साथ मारपीट के चोटों के निशान मिले हैं। रामकेशन ने बताया कि आरोपी भाई बिंदा प्रसाद की शादी हो चुकी है। उसकी पत्नी संगीता, बेटा कृष्णा और बेटी जाह्नवी है।
विज्ञापन
कोतवाल सुरेश सिंह ने बताया कि जेवर और रुपयों को लेकर हत्या करने की बात सामने आई है। मृतका के बेटे रामकेशन की तहरीर पर आरोपी बिंदा प्रसाद के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
-- -
चार बेटे होने के बाद भी दुश्वारियों भरा जीवन जी रही थीं रामदुलारी
अजगैन। चार बेटे होने के बाद भी रामदुलारी अकेली रहती थीं। पड़ोस में ही चारों बेटे अपने-अपने परिवार के साथ रहते हैं लेकिन वृद्ध मां को कोई भी खाना नहीं देता था। वह खुद ही खाना बनाकर खाती थीं। बेटे रामकेशन के मुताबिक मां के पास बहुत कुछ नहीं था। चांदी के कुछ जेवर और बमुश्किल दो से चार हजार रुपये होंगे। बच्चों और बहुओं की बातें न सुननी पड़ें इस कारण वह खुद अपना सब काम करती थीं। उसके बाद भी बेटे बिंदा प्रसाद ने उन्हें नहीं छोड़ा। खुद कमाने के बजाय मां के पास जो था उसे हड़पने के लिए मां को मौत के घाट उतार दिया।
अजगैन कोतवाली क्षेत्र के शीतलखेड़ा गांव निवासी रामेशन ने पुलिस को बताया कि मां रामदुलारी (67) घर में अकेले रहती थीं। चार बेटों में रामकेशन, हरिश्चंद्र, राकेश और बिंदा प्रसाद हैं। सभी गांव में ही अलग-अलग घर बनाकर रहते हैं। रविवार की दोपहर मां खाना बनाने के लिए लकड़ियां तोड़ने गांव के बाहर जंगल में गई थीं। उनके साथ भाई बिंदा प्रसाद भी गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिंदा प्रसाद करीब एक घंटे बाद जंगल से अकेला घर आ गया। मां नहीं आईं। देर रात तक जब मां घर नहीं लौटीं तो उनकी तलाश शुरू की गई। रातभर तलाश करने के बाद भी सुराग नहीं मिला। सोमवार सुबह गांव से करीब एक किलोमीटर दूर जंगल में मां का शव पड़ा मिला। मौके पर पहुंचे तो देखा मां के शरीर पर चोट के निशान के साथ गले में भी निशान था। बिंदा प्रसाद शव मिलने के बाद से लापता है। घटना की सूचना पर पुलिस ने फील्ड यूनिट टीम के साथ जांच की और शव का पोस्टमार्टम कराया। उसमें गला दबाकर हत्या करने के साथ मारपीट के चोटों के निशान मिले हैं। रामकेशन ने बताया कि आरोपी भाई बिंदा प्रसाद की शादी हो चुकी है। उसकी पत्नी संगीता, बेटा कृष्णा और बेटी जाह्नवी है।
Trending Videos
कोतवाल सुरेश सिंह ने बताया कि जेवर और रुपयों को लेकर हत्या करने की बात सामने आई है। मृतका के बेटे रामकेशन की तहरीर पर आरोपी बिंदा प्रसाद के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
चार बेटे होने के बाद भी दुश्वारियों भरा जीवन जी रही थीं रामदुलारी
अजगैन। चार बेटे होने के बाद भी रामदुलारी अकेली रहती थीं। पड़ोस में ही चारों बेटे अपने-अपने परिवार के साथ रहते हैं लेकिन वृद्ध मां को कोई भी खाना नहीं देता था। वह खुद ही खाना बनाकर खाती थीं। बेटे रामकेशन के मुताबिक मां के पास बहुत कुछ नहीं था। चांदी के कुछ जेवर और बमुश्किल दो से चार हजार रुपये होंगे। बच्चों और बहुओं की बातें न सुननी पड़ें इस कारण वह खुद अपना सब काम करती थीं। उसके बाद भी बेटे बिंदा प्रसाद ने उन्हें नहीं छोड़ा। खुद कमाने के बजाय मां के पास जो था उसे हड़पने के लिए मां को मौत के घाट उतार दिया।