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Unnao News: जूनियर के शिक्षक इंटर के छात्रों को पढ़ा रहे अंग्रेजी
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फोटो-10- जीजीआईसी हड़हा में छात्राओं को सामाजिक विषय पढ़ातीं गृह विज्ञान की प्रवक्ता प्रीती। सं
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उन्नाव। जनपद के राजकीय इंटर कॉलेजों (जीआईसी और जीजीआईसी) शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। इन कॉलेजों में हिंदी ही नहीं गणित, बायोलॉजी, केमिस्ट्री और फिजिक्स जैसे प्रमुख विषय पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं हैं। आलम यह है कि गृह विज्ञान की शिक्षिका सामाजिक विषय पढ़ा रही हैं। प्रवक्ता न होने से जीआईसी समेत कई कॉलेजों में जूनियर के शिक्षक इंटर के छात्रों को अंग्रेजी पढ़ा रहे हैं। यही कारण है छात्र-छात्राएं इन कॉलजों में दाखिला लेने से कतरा रहे हैं। इस कारण जीआईसी में छात्रों की संख्या आधी रह गई है। शिक्षकों की कमी और गिरती छात्र संख्या पर शिक्षक विधायक ने भी सवाल उठाए हैं।
फोटो-8- जीआईसी में इंटरमीडिएट के छात्रों को अंग्रेजी विषय पढ़ाते सहायक अध्यापक विवेक श्रीवास्तव। संवाद
जीआईसी में गणित, विज्ञान के शिक्षक नहीं
उन्नाव। शहर के राजकीय इंटर कॉलेज में संसाधन तो है लेकिन पर्याप्त शिक्षक नहीं है। इस कारण जीआईसी से छात्रों का मोह भंग हो रहा है। कॉलेज में हिंदी के साथ गणित, बायोलॉजी, केमिस्ट्री और फिजिक्स विषय पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं है। कक्षा 6 से 12 तक की शिक्षा देने वाले सरकारी कॉलेज में कभी 1200 छात्र हुआ करते थे लेकिन शिक्षक न होने संख्या घटकर 650 छात्रों पर आ गई है।
प्रधानाचार्य परमात्माशरण का कहना है कि कक्षा छह, सात और आठ के छात्रों की पढ़ाई निशुल्क है। कक्षा नौ से 12 तक के छात्रों की 850 रुपये ही फीस है। उसमें बोर्ड परीक्षा शुल्क भी शामिल है। बताया कि और छात्र कम न हों और शिक्षा व्यवस्था भी बाधित न हो इसके लिए प्राइवेट शिक्षकों को मानदेय पर रखने की व्यवस्था की जा रही है। बताया कि अभी नामांकन चल रहे हैं लेकिन पहले जैसी उपस्थिति नहीं हो पा रही है। शिक्षकों की कमी को लेकर माध्यमिक शिक्षा सचिव को कई बार पत्र भेजा जा चुका है।
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प्रधानाचार्य परमात्माशरण ने बताया कि राजकीय इंटर कॉलेज में प्रवक्ता सहित 22 शिक्षकों के पद हैं जबकि तैनाती मात्र 11 की है। इतने शिक्षकों की कमी से पढ़ाई व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। केमिस्ट्री और अंग्रेजी विषय के प्रवक्ता को छोड़कर अन्य किसी विषय का प्रवक्ता तक नहीं है। प्रधानाचार्य के मुताबिक, अंग्रेजी के प्रवक्ता का प्रमोशन हो गया है। जैसे ही उनका पत्र आता है, यह पद भी खाली हो जाएगा। यह हाल तब है जब कॉलेज में सभी व्यवस्थाएं हैं। कंप्यूटर लैब से लेकर खेल मैदान, अच्छे कक्ष और अन्य सुविधाएं हैं।
फोटो-9- छात्राओं को अंग्रेजी पढ़ातीं शिक्षिका डॉ. शालिनी। संवाद
प्रवक्ताओं के पद 10, तैनात हैं सिर्फ तीन
नवाबगंज। कस्बा स्थित जीजीआईसी में भी शिक्षकों की कमी होने से छात्राओं की पढ़ाई भगवान भरोसे है। कॉलेज में स्वीकृत पदों के सापेक्ष 25 फीसदी ही शिक्षक तैनात हैं। प्रधानाचार्य माधुरीलता सिंह ने बताया कि स्कूल को सुचारू रूप से चलाने के लिए 21 शिक्षक और प्रधानाचार्य की जरूरत है लेकिन मौजूदा समय में सिर्फ आठ शिक्षक हैं। शिक्षक न होने से छात्राओं की पढ़ाई में दिक्कतें आ रही हैं। बताया कि प्रवक्ता की बात की जाए तो 10 के सापेक्ष सिर्फ तीन ही हैं। मुख्य विषयों में भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, शिक्षाशास्त्र, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, गणित और संस्कृत विषय के प्रवक्ता नहीं हैं। इन विषयों की पढ़ाई दूसरे विषयों के शिक्षकों से कराना मजबूरी है, ताकि छात्राओं का भविष्य न खराब हो। बताया कि स्कूल में मौजूदा समय में 1300 छात्राएं अध्ययनरत हैं। प शिक्षकों की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों को कई बार पत्राचार किया, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।
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फोटो-10- छात्राओं को सामाजिक विषय पढ़ातीं गृह विज्ञान की प्रवक्ता प्रीती। संवाद
गृह विज्ञान की प्रवक्ता, पढ़ा रहीं सामाजिक विषय
अचलगंज। हड़हा गांव में संचालित जीजीआईसी में भी शिक्षक और प्रवक्ताओं का अभाव है। स्थिति यह है कि गृह विज्ञान की प्रवक्ता से छात्राओं को सामाजिक विषय की पढ़ाई कराई जा रही है। ताकि छात्राओं की पढ़ाई अधिक बाधित न हो। कॉलेज की प्रधानाचार्य उपमा ने बताया कि स्कूल में स्वीकृत 11 प्रवक्ताओं में सिर्फ छह की तैनाती है। मुख्य विषयों में फिजिक्स, गणित, बायोलॉजी, इतिहास और सामाजिक विषय के प्रवक्ता ही नहीं हैं।
कठिन विषय में भी जिन विषयों के प्रवक्ता हैं, उन्हें से पढ़ाना मजबूरी है। बताया कि मौजूदा समय में 366 छात्राएं अध्ययनरत हैं। अभी नए प्रवेश भी चल रहे हैं। मौजूदा समय में प्राचार्य के साथ छह प्रवक्ता और चार सहायक शिक्षकों के सहारे स्कूल का संचालन हो रहा है।
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क्या बोले डीआईओएस
शिक्षकों की तैनाती के लिए समय-समय पर शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजे जाते हैं। प्रवक्ताओं की वहीं से नियुक्ति होनी है। अभी जो व्यवस्था है, उसी में स्कूलों का संचालन कराने का प्रयास चल रहा है। पढ़ाई कहीं भी बाधित नहीं है।
सुनीलदत्त, डीआईओएस
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क्या कहते हैं शिक्षक विधायक
शिक्षक विधायक राजबहादुर सिंह चंदेल ने कहा कि शिक्षा की गिरती व्यवस्था में कैसे बच्चा आगे बढ़ सकता है। जीआईसी जिला मुख्यालय का सबसे पुराना और अच्छा कॉलेज रहा है, वह खुद वहां पढ़े हैं। आज स्थिति यह है कि दो को छोड़कर कोई प्रवक्ता तक नहीं है। इन हालातों में स्कूल में प्रवेश कौन लेगा। सरकार सो रही है, कितने शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए, ट्रांसफर हो गए, उनके स्थान पर कोई नई नियुक्ति ही नहीं की गई। बताया कि इसी कॉलेज से 1960 में उन्होंने भी इंटरमीडिएट किया था। आज की स्थिति देखकर छात्रों का भविष्य अंधकार में दिख रहा है।
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फोटो-8- जीआईसी में इंटरमीडिएट के छात्रों को अंग्रेजी विषय पढ़ाते सहायक अध्यापक विवेक श्रीवास्तव। संवाद
जीआईसी में गणित, विज्ञान के शिक्षक नहीं
उन्नाव। शहर के राजकीय इंटर कॉलेज में संसाधन तो है लेकिन पर्याप्त शिक्षक नहीं है। इस कारण जीआईसी से छात्रों का मोह भंग हो रहा है। कॉलेज में हिंदी के साथ गणित, बायोलॉजी, केमिस्ट्री और फिजिक्स विषय पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं है। कक्षा 6 से 12 तक की शिक्षा देने वाले सरकारी कॉलेज में कभी 1200 छात्र हुआ करते थे लेकिन शिक्षक न होने संख्या घटकर 650 छात्रों पर आ गई है।
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प्रधानाचार्य परमात्माशरण का कहना है कि कक्षा छह, सात और आठ के छात्रों की पढ़ाई निशुल्क है। कक्षा नौ से 12 तक के छात्रों की 850 रुपये ही फीस है। उसमें बोर्ड परीक्षा शुल्क भी शामिल है। बताया कि और छात्र कम न हों और शिक्षा व्यवस्था भी बाधित न हो इसके लिए प्राइवेट शिक्षकों को मानदेय पर रखने की व्यवस्था की जा रही है। बताया कि अभी नामांकन चल रहे हैं लेकिन पहले जैसी उपस्थिति नहीं हो पा रही है। शिक्षकों की कमी को लेकर माध्यमिक शिक्षा सचिव को कई बार पत्र भेजा जा चुका है।
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प्रधानाचार्य परमात्माशरण ने बताया कि राजकीय इंटर कॉलेज में प्रवक्ता सहित 22 शिक्षकों के पद हैं जबकि तैनाती मात्र 11 की है। इतने शिक्षकों की कमी से पढ़ाई व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। केमिस्ट्री और अंग्रेजी विषय के प्रवक्ता को छोड़कर अन्य किसी विषय का प्रवक्ता तक नहीं है। प्रधानाचार्य के मुताबिक, अंग्रेजी के प्रवक्ता का प्रमोशन हो गया है। जैसे ही उनका पत्र आता है, यह पद भी खाली हो जाएगा। यह हाल तब है जब कॉलेज में सभी व्यवस्थाएं हैं। कंप्यूटर लैब से लेकर खेल मैदान, अच्छे कक्ष और अन्य सुविधाएं हैं।
फोटो-9- छात्राओं को अंग्रेजी पढ़ातीं शिक्षिका डॉ. शालिनी। संवाद
प्रवक्ताओं के पद 10, तैनात हैं सिर्फ तीन
नवाबगंज। कस्बा स्थित जीजीआईसी में भी शिक्षकों की कमी होने से छात्राओं की पढ़ाई भगवान भरोसे है। कॉलेज में स्वीकृत पदों के सापेक्ष 25 फीसदी ही शिक्षक तैनात हैं। प्रधानाचार्य माधुरीलता सिंह ने बताया कि स्कूल को सुचारू रूप से चलाने के लिए 21 शिक्षक और प्रधानाचार्य की जरूरत है लेकिन मौजूदा समय में सिर्फ आठ शिक्षक हैं। शिक्षक न होने से छात्राओं की पढ़ाई में दिक्कतें आ रही हैं। बताया कि प्रवक्ता की बात की जाए तो 10 के सापेक्ष सिर्फ तीन ही हैं। मुख्य विषयों में भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, शिक्षाशास्त्र, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, गणित और संस्कृत विषय के प्रवक्ता नहीं हैं। इन विषयों की पढ़ाई दूसरे विषयों के शिक्षकों से कराना मजबूरी है, ताकि छात्राओं का भविष्य न खराब हो। बताया कि स्कूल में मौजूदा समय में 1300 छात्राएं अध्ययनरत हैं। प शिक्षकों की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों को कई बार पत्राचार किया, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।
फोटो-10- छात्राओं को सामाजिक विषय पढ़ातीं गृह विज्ञान की प्रवक्ता प्रीती। संवाद
गृह विज्ञान की प्रवक्ता, पढ़ा रहीं सामाजिक विषय
अचलगंज। हड़हा गांव में संचालित जीजीआईसी में भी शिक्षक और प्रवक्ताओं का अभाव है। स्थिति यह है कि गृह विज्ञान की प्रवक्ता से छात्राओं को सामाजिक विषय की पढ़ाई कराई जा रही है। ताकि छात्राओं की पढ़ाई अधिक बाधित न हो। कॉलेज की प्रधानाचार्य उपमा ने बताया कि स्कूल में स्वीकृत 11 प्रवक्ताओं में सिर्फ छह की तैनाती है। मुख्य विषयों में फिजिक्स, गणित, बायोलॉजी, इतिहास और सामाजिक विषय के प्रवक्ता ही नहीं हैं।
कठिन विषय में भी जिन विषयों के प्रवक्ता हैं, उन्हें से पढ़ाना मजबूरी है। बताया कि मौजूदा समय में 366 छात्राएं अध्ययनरत हैं। अभी नए प्रवेश भी चल रहे हैं। मौजूदा समय में प्राचार्य के साथ छह प्रवक्ता और चार सहायक शिक्षकों के सहारे स्कूल का संचालन हो रहा है।
क्या बोले डीआईओएस
शिक्षकों की तैनाती के लिए समय-समय पर शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजे जाते हैं। प्रवक्ताओं की वहीं से नियुक्ति होनी है। अभी जो व्यवस्था है, उसी में स्कूलों का संचालन कराने का प्रयास चल रहा है। पढ़ाई कहीं भी बाधित नहीं है।
सुनीलदत्त, डीआईओएस
क्या कहते हैं शिक्षक विधायक
शिक्षक विधायक राजबहादुर सिंह चंदेल ने कहा कि शिक्षा की गिरती व्यवस्था में कैसे बच्चा आगे बढ़ सकता है। जीआईसी जिला मुख्यालय का सबसे पुराना और अच्छा कॉलेज रहा है, वह खुद वहां पढ़े हैं। आज स्थिति यह है कि दो को छोड़कर कोई प्रवक्ता तक नहीं है। इन हालातों में स्कूल में प्रवेश कौन लेगा। सरकार सो रही है, कितने शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए, ट्रांसफर हो गए, उनके स्थान पर कोई नई नियुक्ति ही नहीं की गई। बताया कि इसी कॉलेज से 1960 में उन्होंने भी इंटरमीडिएट किया था। आज की स्थिति देखकर छात्रों का भविष्य अंधकार में दिख रहा है।

फोटो-10- जीजीआईसी हड़हा में छात्राओं को सामाजिक विषय पढ़ातीं गृह विज्ञान की प्रवक्ता प्रीती। सं

फोटो-10- जीजीआईसी हड़हा में छात्राओं को सामाजिक विषय पढ़ातीं गृह विज्ञान की प्रवक्ता प्रीती। सं