{"_id":"6a6a4fa2ee40be1cc9085af8","slug":"unnao-news-unnao-news-c-221-1-uno1023-154660-2026-07-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Unnao News: थाना गोशाला में मृत मिले 12 गोवंश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Unnao News: थाना गोशाला में मृत मिले 12 गोवंश
विज्ञापन
फोटो-11- जांच के दौरान गोशाला में एनजीओ के कर्मचारियों से जानकारी लेते बीडीओ व एडीओ पंचायत। संव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चकलवंशी। थाना गांव में संचालित वृहद गो-संरक्षण केंद्र में 12 गोवंश मृत मिले। ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचे प्रशासक प्रतिनिधि ने एनजीओ पर मवेशियों की देखरेख में कमी और चारे के नाम पर मक्का का सड़ा अवशेष खिलाने का आरोप लगाया। उधर, सीवीओ ने जांच के बाद तीन से चार गोवंश ही मृत मिलने का दावा किया। उन्होंने रिपोर्ट शासन को भेजने की बात कही।
विकासखंड सिकंदरपुर सरोसी की ग्राम पंचायत थाना में 500 मवेशियों की क्षमता वाला गो-संरक्षण संचालित है। यहां मौजूदा समय में 539 गोवंश संरक्षित होने की जानकारी अभिलेखों में दर्ज है। कुछ समय पहले ही शासन ने प्रधान, सचिवों से गोशाला संचालन का अधिकार वापस लेकर हरियाणा की निजी संस्था पूजा सहकारी संस्थान को सौंपा है। बुधवार को प्रशासक प्रतिनिधि पिंटू सिंह ग्रामीणों के साथ गोशाला पहुंचे। उन्होंने 12 मवेशियों के मृत होने की बात कहकर हंगामा शुरू कर दिया।
आरोप लगाया कि जबसे संस्था को जिम्मेदारी दी गई है तबसे केंद्र में अव्यवस्थाएं हैं। गोवंशों को हरा चारा तो दूर भूसा तक नहीं दिया जा रहा है। उन्हें मक्का का सड़ा अवशेष खिलाया जा रहा है। बताया कि चरही खाली पड़ी हैं। मक्का अवशेष के गठ्ठर रखे थे। उनका कहना था कि शायद भूख से मवेशी की मौत हो गई है। इसकी सूचना पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद कुमार, बीडीओ रवि शर्मा व एडीओ पंचायत विनोद वर्मा गोशाला पहुंचे और निरीक्षण किया। ग्रामीणों से भी बातचीत की। एनजीओ के पदाधिकारियों से भी पूछताछ की।
विज्ञापन
इंसेट-1
पौष्टिक आहार दूर, पेट भरने के लिए भूसा तक नहीं
गोशाला में संरक्षित मवेशियों को शासन से भूसे के साथ हरा चारा व पौष्टिक आहार देने के आदेश हैं लेकिन वहां की स्थिति अलग ही कहानी बयां कर रही थीं। चरही खाली थी। मक्के का सूखा सड़ा गला अवशेष बाहर रखा था। ग्रामीणों का आरोप था कि गोवंशों को चारे के नाम पर यही दिया जा रहा था। इसी कारण मवेशी एक-एक करके दम तोड़ रहे थे। एनजीओ द्वारा उनको अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था। आसपास के लोग पिछले कई दिनों से उठ रही दुर्गंध से परेशान थे। जब दुर्गंध से बेहाल हो गए तो प्रशासक को सूचना दी थी।
गोशाला के गोदाम में भूसा रखा मिला था। जिसे प्रशासक ने अपना बताया था। गोशाला में केवल तीन, चार मवेशी ही मृत मिले थे। अन्य का केवल ढांचा ही था, जिसे देखकर लग रहा था कि गड्ढे में दफन शवों को निकलवाया गया हो। जो मृत मिले थे, उनको जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर दफ्न करा दिया गया है। जो गोशाला संचालन में खामियां मिली हैं, उसके आधार पर शासन को एनजीओ पर कार्रवाई के लिए पत्र भेजा जा रहा है।
डॉ. विनोद कुमार, सीवीओ।
विज्ञापन
विकासखंड सिकंदरपुर सरोसी की ग्राम पंचायत थाना में 500 मवेशियों की क्षमता वाला गो-संरक्षण संचालित है। यहां मौजूदा समय में 539 गोवंश संरक्षित होने की जानकारी अभिलेखों में दर्ज है। कुछ समय पहले ही शासन ने प्रधान, सचिवों से गोशाला संचालन का अधिकार वापस लेकर हरियाणा की निजी संस्था पूजा सहकारी संस्थान को सौंपा है। बुधवार को प्रशासक प्रतिनिधि पिंटू सिंह ग्रामीणों के साथ गोशाला पहुंचे। उन्होंने 12 मवेशियों के मृत होने की बात कहकर हंगामा शुरू कर दिया।
विज्ञापन
आरोप लगाया कि जबसे संस्था को जिम्मेदारी दी गई है तबसे केंद्र में अव्यवस्थाएं हैं। गोवंशों को हरा चारा तो दूर भूसा तक नहीं दिया जा रहा है। उन्हें मक्का का सड़ा अवशेष खिलाया जा रहा है। बताया कि चरही खाली पड़ी हैं। मक्का अवशेष के गठ्ठर रखे थे। उनका कहना था कि शायद भूख से मवेशी की मौत हो गई है। इसकी सूचना पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद कुमार, बीडीओ रवि शर्मा व एडीओ पंचायत विनोद वर्मा गोशाला पहुंचे और निरीक्षण किया। ग्रामीणों से भी बातचीत की। एनजीओ के पदाधिकारियों से भी पूछताछ की।
विज्ञापन
इंसेट-1
पौष्टिक आहार दूर, पेट भरने के लिए भूसा तक नहीं
गोशाला में संरक्षित मवेशियों को शासन से भूसे के साथ हरा चारा व पौष्टिक आहार देने के आदेश हैं लेकिन वहां की स्थिति अलग ही कहानी बयां कर रही थीं। चरही खाली थी। मक्के का सूखा सड़ा गला अवशेष बाहर रखा था। ग्रामीणों का आरोप था कि गोवंशों को चारे के नाम पर यही दिया जा रहा था। इसी कारण मवेशी एक-एक करके दम तोड़ रहे थे। एनजीओ द्वारा उनको अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था। आसपास के लोग पिछले कई दिनों से उठ रही दुर्गंध से परेशान थे। जब दुर्गंध से बेहाल हो गए तो प्रशासक को सूचना दी थी।
गोशाला के गोदाम में भूसा रखा मिला था। जिसे प्रशासक ने अपना बताया था। गोशाला में केवल तीन, चार मवेशी ही मृत मिले थे। अन्य का केवल ढांचा ही था, जिसे देखकर लग रहा था कि गड्ढे में दफन शवों को निकलवाया गया हो। जो मृत मिले थे, उनको जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर दफ्न करा दिया गया है। जो गोशाला संचालन में खामियां मिली हैं, उसके आधार पर शासन को एनजीओ पर कार्रवाई के लिए पत्र भेजा जा रहा है।
डॉ. विनोद कुमार, सीवीओ।

फोटो-11- जांच के दौरान गोशाला में एनजीओ के कर्मचारियों से जानकारी लेते बीडीओ व एडीओ पंचायत। संव