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Unnao News: गंगा एक्सप्रेसवे की फिर मिट्टी बही, सेफ्टीवाल भी क्षतिग्रस्त
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फोटो-18- गंगा एक्सप्रेसवे के किमी संख्या 420 व 421 के बीच मिट्टी व आरसीसी धंसने से हुआ गड्ढा। स
- फोटो : Archive
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सोनिक। गंगा एक्सप्रेसवे को शुरू हुए चार माह भी पूरे नहीं हुए और खामियां मिलने लगीं। रविवार को एक्सप्रेसवे किनारे बनी नाली में गड्ढा हो गया। साथ ही सुरक्षा के लिए बनाई गई सेफ्टीवाल जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई। हालांकि निर्माण एजेंसी ने मरम्मत शुरू करा दी है।
मेरठ से प्रयागराज तक बने गंगा एक्सप्रेसवे का शुभारंभ 29 अप्रैल को हुआ था। अभी चार माह भी नहीं बीते हैं कि एक्सप्रेसवे पर खामियां उजागर होनी शुरू हो गईं हैं। रविवार को किमी संख्या 421 व 422 के बीच आई दरार को कार्यदायी संस्था ने सही करवाया था। इसके बाद रविवार देर रात से शुरू हुई बारिश सोमवार दोपहर बाद तक होती रही। इससे किमी संख्या 420 व 421 के बीच में सड़क के पानी निकासी के लिए बनी नाली में गड्ढा हो गया। जानकारी मिलते ही कार्यदायी संस्था ने मरम्मत कराई।
इसी तरह एक्सप्रेसवे के किनारे जितनी भी नाली है, उसमें मिट्टी रोकने के लिए कराई गई आरसीसी भी बैठ गई थी। कई जगह मिट्टी भी बह गई है। एक्सप्रेसवे के किनारे-किनारे सुरक्षा के लिहाज से रेडीमेड बाउंड्री करवाई गई थीं। वह भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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टोल मैनेजर गौरव शर्मा का कहना है कि इतनी बड़ी सड़क है थोड़ा-बहुत काम तो चलता रहता है। मिट्टी बैठने जैसी कोई जानकारी नहीं है। रेडीमेड बाउंड्री भी ठीक है। जहां सही नहीं है उसको दिखवाया जाएगा।
सपा ने ली चुटकी
समाजवादी पार्टी ने इस पर चुटकी ली है। पार्टी की मीडिया सेल ने अमर उजाला में प्रकाशित खबर साझा करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है कि धंसते एक्सप्रेसवे की कतार में एक और एक्सप्रेसवे जुड़ गया है। जनता के कर की गाढ़ी कमाई से बने एक्सप्रेसवे धंसते चले जा रहे।
वर्जन...
निर्माण के बाद पहली बारिश में कहीं-कहीं पर कुछ समस्या आती है। एक्सप्रेसवे को बनाने में बड़े पैमाने पर मिट्टी की भराई की जाती है और बारिश के दौरान कुछ जगह मिट्टी के बैठने से ऐसी स्थिति हो सकती है। तकनीकी टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ तत्काल सुधार कार्य करा रही हैं। गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक और निर्धारित मानकों का प्रयोग किया गया है। तकनीकी टीमें लगातार निगरानी भी कर रही हैं। आवागमन निर्बाध जारी है। -आरके मिश्र, प्रोजेक्ट हेड गंगा एक्सप्रेसवे।
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मेरठ से प्रयागराज तक बने गंगा एक्सप्रेसवे का शुभारंभ 29 अप्रैल को हुआ था। अभी चार माह भी नहीं बीते हैं कि एक्सप्रेसवे पर खामियां उजागर होनी शुरू हो गईं हैं। रविवार को किमी संख्या 421 व 422 के बीच आई दरार को कार्यदायी संस्था ने सही करवाया था। इसके बाद रविवार देर रात से शुरू हुई बारिश सोमवार दोपहर बाद तक होती रही। इससे किमी संख्या 420 व 421 के बीच में सड़क के पानी निकासी के लिए बनी नाली में गड्ढा हो गया। जानकारी मिलते ही कार्यदायी संस्था ने मरम्मत कराई।
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इसी तरह एक्सप्रेसवे के किनारे जितनी भी नाली है, उसमें मिट्टी रोकने के लिए कराई गई आरसीसी भी बैठ गई थी। कई जगह मिट्टी भी बह गई है। एक्सप्रेसवे के किनारे-किनारे सुरक्षा के लिहाज से रेडीमेड बाउंड्री करवाई गई थीं। वह भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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टोल मैनेजर गौरव शर्मा का कहना है कि इतनी बड़ी सड़क है थोड़ा-बहुत काम तो चलता रहता है। मिट्टी बैठने जैसी कोई जानकारी नहीं है। रेडीमेड बाउंड्री भी ठीक है। जहां सही नहीं है उसको दिखवाया जाएगा।
सपा ने ली चुटकी
समाजवादी पार्टी ने इस पर चुटकी ली है। पार्टी की मीडिया सेल ने अमर उजाला में प्रकाशित खबर साझा करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है कि धंसते एक्सप्रेसवे की कतार में एक और एक्सप्रेसवे जुड़ गया है। जनता के कर की गाढ़ी कमाई से बने एक्सप्रेसवे धंसते चले जा रहे।
वर्जन...
निर्माण के बाद पहली बारिश में कहीं-कहीं पर कुछ समस्या आती है। एक्सप्रेसवे को बनाने में बड़े पैमाने पर मिट्टी की भराई की जाती है और बारिश के दौरान कुछ जगह मिट्टी के बैठने से ऐसी स्थिति हो सकती है। तकनीकी टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ तत्काल सुधार कार्य करा रही हैं। गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक और निर्धारित मानकों का प्रयोग किया गया है। तकनीकी टीमें लगातार निगरानी भी कर रही हैं। आवागमन निर्बाध जारी है। -आरके मिश्र, प्रोजेक्ट हेड गंगा एक्सप्रेसवे।

फोटो-18- गंगा एक्सप्रेसवे के किमी संख्या 420 व 421 के बीच मिट्टी व आरसीसी धंसने से हुआ गड्ढा। स- फोटो : Archive