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बेहतर कनेक्टिविटी की कीमत: बनारस में घुमावदार नहीं, सीधी सड़कों पर हुए ज्यादा हादसे; 2025 में 87 मौत

Thu, 23 Jul 2026 11:41 AM IST
Pragati Chand रवि प्रकाश सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।
रवि प्रकाश सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Thu, 23 Jul 2026 11:41 AM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी जिले में रफ्तार के कहर ने वर्ष 2025 में 87 लोगों की जान ले ली। जबकि चार साल में 250 लोगों की मौत हुई। यहां बेहतर कनेक्टिविटी के बाद हादसों में 47 फीसदी बढ़ोतरी हुई। हैरानी की बात ये है कि सड़क पार करते समय 130 पैदल यात्रियों की जान गई।

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accident rates on straight roads and highways in Varanasi risen 87 deaths occurred in 2025
वाराणसी में घुमावदार नहीं, सीधी सड़कों पर हुए सबसे ज्यादा हादसे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कभी खराब सड़कें हादसों की बड़ी वजह मानी जाती थीं, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। शहर और उसके आउटर इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी, चौड़ी सड़कें और हाईवे बनने के बाद वाहनों की रफ्तार इतनी बढ़ गई है कि यही सड़कें लोगों की जान की दुश्मन बन रही हैं। आंकड़े बताते हैं कि वाराणसी में घुमावदार रास्तों की तुलना में सीधी और चौड़ी सड़कों पर सबसे ज्यादा जानलेवा हादसे हो रहे हैं।

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पिछले चार वर्षों में केवल हाईवे, रिंगरोड फारेलेन और सिक्सलेन पर ओवरस्पीड के कारण 250 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सड़क पार करते समय 130 पैदल यात्रियों की भी जान गई। यह संख्या ओवरस्पीड से हुई मौतों से अलग है। आंकड़ों के अनुसार, अच्छी सड़कें और बेहतर कनेक्टिविटी मिलने के बाद सड़क हादसों में मौत के मामलों में 2021 के बाद 47 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, हाईवे और शहर के भीतर सड़क पार करते समय 130 पैदल यात्रियों की मौत हुई। यह आंकड़ा ओवरस्पीड से हुई मौतों से अलग है।

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हादसों में मरने वालों में 70 प्रतिशत युवा, उम्र 20 से 30 वर्ष
साल 2022 में ओवरस्पीड के कारण 46 लोगों की मौत हुई थी, जो 2025 में बढ़कर 87 हो गई। पुलिस की सख्ती के बावजूद हादसों में कमी नहीं आई। ओवरस्पीड के कारण होने वाले हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ता गया। हादसों में जान गंवाने वालों में करीब 70 प्रतिशत युवा थे, जिनकी उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच थी। पुलिस के जागरूकता अभियान और चालान की कार्रवाई के बावजूद हादसों की रफ्तार कम नहीं हुई। वर्ष 2022 में ओवरस्पीड के कारण 46 लोगों की मौत हुई, वर्ष 2023 में 44, वर्ष 2024 में 73 और वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 87 पहुंच गया। 

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आउटर क्षेत्रों में अधिक दर्ज की गईं दुर्घटनाएं
पुलिस जांच में सामने आया कि 23 प्रतिशत मृतक एक से दो वर्ष पुरानी बाइक चला रहे थे। आउटर क्षेत्रों में दुर्घटनाएं अधिक दर्ज की गईं, जबकि शहर के भीतर मौतों का प्रतिशत 20 रहा। शहर में कैंट-राजघाट मार्ग, लहरतारा ओवरब्रिज-रोहनिया मार्ग, फुलवरिया आरओबी-सेंट्रल जेल रोड, ककरमत्ता-अखरी बाइपास और रामनगर-पड़ाव मार्ग पर सबसे अधिक हादसे हुए। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में मौतों की संख्या शहर की तुलना में तीन गुना रही। हादसों में प्रत्येक सातवीं मौत महिला की थी।
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नशे में ड्राइविंग के 39 हादसे, 28 की मौके पर मौत
बीते वर्ष की सड़क हादसा रिपोर्ट के अनुसार सुबह छह से नौ बजे तथा रात 11 से दो बजे के बीच सबसे अधिक मौतें दर्ज की गईं। शराब के नशे में हुई दुर्घटनाओं में 89 प्रतिशत लोगों की मौत हुई। नशे में वाहन चलाने के 39 हादसों में 28 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

अधिकारी बोले
सड़क हादसों को रोकने के लिए यातायात पुलिस लगातार अभियान चला रही है। ओवरस्पीड, नशे में वाहन चलाने और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमित कार्रवाई की जा रही है। हादसा संभावित स्थानों को चिह्नित कर वहां स्पीड चेकिंग के साथ जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। वाहन चालकों से अपील है कि सड़क खाली होने पर भी तेज गति से वाहन न चलाएं और यातायात नियमों का पालन करें। -अंशुमान मिश्रा, एडीसीपी ट्रैफिक

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