मौत बनकर लौटी किस्मत: कुक और सिक्योरिटी गार्ड बनने रूस गए थे अजहरूद्दीन और रामचंद्र, ताबूत में हुई वापसी
आजमगढ़ जिले के अजहरूद्दीन और रामचंद्र कई अरमानों को मन में लेकर कुक और सिक्योरिटी गार्ड बनने रूस गए थे, लेकिन उनकी किस्मत मौत बनकर वापस लौटी। ताबूत में दोनों के कंकाल घर पहुंचे तो पूरे इलाके में कोहराम मच गया।
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रूस में कुक और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने गए जिले के अजहरूद्दीन और रामचंद्र के कंकाल बृहस्पतिवार को उनके घर लाए गए। दोनों को रूस-यूक्रेन युद्ध में उतार दिया गया था। रूस और यूक्रेन के बीच करीब तीन साल से युद्ध चल रहा है। भारत से हजारों किलोमीटर दूर लड़े जा रहे इस युद्ध में आजमगढ़ जिले का नाम भी शामिल हो गया था। यहां के आठ लोग लापता हो गए थे।
आजमगढ़ और मऊ जिले के कई लोग नौकरी की तलाश में जनवरी 2024 में एजेंटों के जाल में फंस कर रूस चले गए। इनमें से आजमगढ़ के कन्हैया यादव और मऊ के श्यामसुंदर और सुनील यादव की रूस-यूक्रेन जंग में मौत हो चुकी थी। आजमगढ़ के राकेश यादव और मऊ के बृजेश यादव घायल होने के बाद घर लौट आए थे। वहीं विनोद यादव, जोगेंद्र यादव, अरविंद यादव, रामचंद्र, अजहरुद्दीन खान, हुमेश्वर प्रसाद, दीपक, धीरेंद्र कुमार लापता हो गए थे।
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परिजनों ने लगाया ये आरोप
कंधरापुर थाना के खोजापुर माधवपट्टी निवासी योगेंद्र यादव भी उसी में थे। परिवार के लोगों का कहना था कि मऊ के एजेंट विनोद यादव ने सभी को फंसाया था। गार्ड की नौकरी के लिए लेकर गए और बार्डर पर भेज दिया। 15 जनवरी 2024 को विनोद, सुमित और दुष्यंत नामक एजेंट के साथ गए।
नौकरी छोड़ भाई की तलाश में भटकता रहा अजीमुद्दीन
अजहरुद्दीन के भाई अजीमुद्दीन ने बताया कि वह दो साल से अपनी सऊदी की नौकरी छोड़कर भाई की तलाश में भटक रहा था। यहां एंबेसी से लेकर रूस तक दौड़े। काफी मशक्कत के बाद सरकार की मदद से आज उसका शव मिल सका। यह बहुत बड़ा स्कैम है। एजेंसी संचालक पर कार्रवाई होनी चाहिए।