24 महीने में 25 फैसले: वाराणसी में हर महीने एक उम्रकैद, टंकी में शव छिपाने और हत्या में कठोर सजा
Varanasi News: वाराणसी जिले की अदालतों में 24 महीने में 25 फैसले आए। इनमें कई घटनाएं ऐसी रहीं, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया। वहीं कोर्ट ने भी कहा कि ऐसे अपराधी समाज के लिए गंभीर खतरा हैं।
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जघन्य अपराधों के मामलों में वाराणसी की अदालतों ने पिछले दो वर्षों के दौरान त्वरित सुनवाई कर दोषियों को कड़ी सजा सुनाई है। वर्ष 2024 से अब तक 25 मामलों में दोष सिद्ध होने पर सजा दी जा चुकी है। इनमें हत्या, दुष्कर्म, पॉक्सो और दुष्कर्म के प्रयास के बाद हत्या जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो औसतन हर महीने एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इन मामलों में कुछ ऐसी घटनाएं भी रहीं, जिन्होंने समाज को झकझोर दिया। अदालत ने भी उन्हें अत्यंत जघन्य अपराध मानते हुए दोषियों के प्रति सख्त रुख अपनाया और कहा कि ऐसे अपराधी समाज के लिए गंभीर खतरा हैं।
रामनगर क्षेत्र में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर शव को बोरे में भरकर स्कूल के पीछे फेंक दिया गया था। इस मामले में अदालत ने महज 11 महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर दोषी इरशाद को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इसी तरह कैंट थाना क्षेत्र में 12 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर शव को पानी की टंकी में छिपाने के मामले में आरोपी सनोज उर्फ राहुल को आजीवन कारावास की सजा दी गई। आरोपी ने बच्ची की गला दबाकर हत्या की थी।
भाजपा नेता पशुपतिनाथ सिंह की सरेआम पीट-पीटकर हत्या के मामले में भी अदालत ने सख्त रुख अपनाया। सुनवाई के बाद 16 अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई। एक अन्य चर्चित मामले में पत्नी की हत्या कर शव को घर के आंगन में दफनाने वाले आरोपी पति को भी अदालत ने दंडित किया। जांच में सामने आया था कि हत्या के बाद आरोपी ने शव को जमीन में दबाकर उस पर नमक डाल दिया था, ताकि साक्ष्य नष्ट किए जा सकें।
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दुष्कर्म के जघन्य मामलों पर अदालत की विशेष चिंता
पिछले एक वर्ष में दुष्कर्म और पॉक्सो से जुड़े कई गंभीर मामलों पर अदालत ने विशेष चिंता व्यक्त की। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वर्ष 2024 से अब तक सजा पाए 25 मामलों में बड़ी संख्या दुष्कर्म और पॉक्सो से संबंधित रही है। कई मामलों में दुष्कर्म के प्रयास में असफल होने पर पीड़ित की हत्या कर दी गई थी। अदालत ने ऐसे अपराधों को अत्यंत क्रूर और अमानवीय बताते हुए कठोर दंड सुनाया। इन फैसलों से यह स्पष्ट संकेत गया है कि जघन्य अपराधों के मामलों में न्यायपालिका त्वरित सुनवाई और कड़ी सजा के जरिए अपराधियों के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपना रही है।