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Banaras Lit Fest: अभिनेता अनुपम खेर बोले, टैलेंट से ज्यादा हार्ड वर्क, अनुशासन और अभ्यास बनाता है अच्छा कलाकार
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Fri, 30 Jan 2026 04:14 PM IST
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सार
Varanasi News: बनारस लिट फेस्ट में शामिल हुए अनुपम खेर ने शुक्रवार को स्कूली बच्चों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कोई एक्टर पैदा नहीं होता, टैलेंट से ज्यादा हार्ड वर्क, अनुशासन और लगातार अभ्यास आपको अच्छा कलाकार बनाता है।
वाराणसी में अनुपम खेर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वाराणसी जिले में नदेसर स्थित होटल ताज में शुक्रवार को बनारस लिटरेचर फेस्टिवल–4 का उद्घाटन अभिनेता अनुपम खेर ने किया। इस दौरान उन्होंने स्कूली बच्चों से कहा कि एक्टर पैदा नहीं होते, वे मेहनत से बनते हैं। टैलेंट से ज्यादा हार्ड वर्क, अनुशासन और निरंतर अभ्यास ही किसी कलाकार को गढ़ता है। अभिनय केवल मंच या कैमरे की कला नहीं है, यह जीवन को गहराई से देखने और महसूस करने की साधना है। अनुपम खेर ने बच्चों के साथ संवाद किया और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए। उनके साथ फोटो भी खिंचवाई।
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उद्घाटन सत्र में स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत नाट्य मंचन को सराहते हुए अनुपम खेर भावविभोर हो उठे। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि यह प्रस्तुति उन्हें सीधे अपने स्कूल के दिनों में ले गई। उन्होंने अपने जीवन के पहले नाटक की स्मृति साझा करते हुए बताया कि किस तरह उन्हें पृथ्वीराज चौहान की भूमिका के लिए चुना गया था, जबकि जयचंद की भूमिका दूधवाले के बेटे नंदू को मिली थी।
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आगे कहा कि मुझे चुनने की ‘क्वालिफिकेशन’ बस इतनी थी कि मैं गोरा और पतला था। यह कहते हुए वे हंसी के साथ उस मासूम तर्क को याद करते रहे, जिसने उनके अभिनय जीवन की पहली सीढ़ी रखी। उन्होंने उस नाटक का रोचक प्रसंग भी सुनाया, जिसमें उनका संवाद था 'चला जा, चला जा, तू बकवास ना कर' जिसे तीन बार बोलना था और हर बार जयचंद को गिरना था। दो बार तो नंदू गिर गया, लेकिन तीसरी बार गिरने से पहले दर्शकों में बैठे उसके पिता की आवाज गूंज उठी 'अब तू गिरा तो घर मत अइयो।' बस फिर क्या था नाटक ने अनायास नया मोड़ ले लिया और जयचंद बने नंदू ने पृथ्वीराज चौहान बने अनुपम खेर को उठाकर सीधे ऑडियंस में फेंक दिया। यह संस्मरण सुनाते हुए पूरा सभागार ठहाकों से गूंज उठा।
167 सेलिब्रिटीज आए हैं यहां
बीएलएफ के अध्यक्ष दीपक मधोक ने स्वागत भाषण में कहा कि इस फेस्ट के लिए काशी से ज्यादा उपयुक्त स्थान कोई और हो ही नहीं सकता। यहां धर्म, आध्यात्म, संस्कृति, संस्कार, संस्कृत आदि का अविरल प्रवाह है। कहा कि बनारस लिटरेचर फेस्टिवल एक ऑर्गनाइज्ड टीम वर्क है। इस बार फेस्टिवल में 167 सेलिब्रिटीज आए हुए हैं। कई कार्यक्रम एक साथ संचालित हैं। उन्होंने सभागार में मौजूद सैकड़ों संस्कृति एवं कला प्रेमियों को कार्यक्रम का साक्षी बनने का आह्वान किया।
फेस्ट में आएंगे एक लाख लोग
बीएलएफ के सचिव बृजेश सिंह ने इस फेस्टिवल के कॉन्सेप्ट को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह बनारस की निरंतर आनंदयुक्त संस्कृति की वाहक है। बाबा काशी विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा की असीम कृपा से यह फेस्टिवल चौथे वर्ष भी भव्य रूप से आयोजित हो रहा है। इसमें 13 देशों के परफॉर्मेंस और 50 से अधिक देशों के दर्शक आए हुए हैं। उन्होंने कहा कि अनुमानतः 1 फरवरी को महोत्सव के समापन तक लगभग एक लाख लोग इसके साक्षी बनेंगे।
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ज्योतिषाचार्य प्रोफेसर चंद्रमौली उपाध्याय ने कहा कि यह आयोजन सामान्य नहीं, बहुत कठिन है। इसे पूर्ण करने के लिए जो प्रयत्न किया जा रहा है, वह अतिमहत्वपूर्ण है। नेपाल से आए विशेष अतिथि विनोद चौधरी ने कहा कि नेपाल और काशी का संबंध अद्भुत और अटूट है। इतिहास ने इसको जोड़ा और वर्तमान ने इसे आगे बढ़ाया है। यह संबंध गॉड गिफ्टेड है, क्योंकि नेपाल में पशुपतिनाथ हैं और काशी में काशी विश्वनाथ हैं। इस अवसर को नित नवीनता के साथ आगे बढ़ाया जाए। साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि काशी के अधिपति बाबा काशी विश्वनाथ का स्वभाव जैसा है, वैसा ही उनके काशीवासियों का भी है।
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ज्योतिषाचार्य प्रोफेसर चंद्रमौली उपाध्याय ने कहा कि यह आयोजन सामान्य नहीं, बहुत कठिन है। इसे पूर्ण करने के लिए जो प्रयत्न किया जा रहा है, वह अतिमहत्वपूर्ण है। नेपाल से आए विशेष अतिथि विनोद चौधरी ने कहा कि नेपाल और काशी का संबंध अद्भुत और अटूट है। इतिहास ने इसको जोड़ा और वर्तमान ने इसे आगे बढ़ाया है। यह संबंध गॉड गिफ्टेड है, क्योंकि नेपाल में पशुपतिनाथ हैं और काशी में काशी विश्वनाथ हैं। इस अवसर को नित नवीनता के साथ आगे बढ़ाया जाए। साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि काशी के अधिपति बाबा काशी विश्वनाथ का स्वभाव जैसा है, वैसा ही उनके काशीवासियों का भी है।
