ब्रिक्स सम्मेलन: रचनात्मक अर्थव्यवस्था, कॉपीराइट संरक्षण और सांस्कृतिक साझेदारी पर चर्चा; जुटे कई देशों के लोग
BRICS Summit in Varanasi: ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने रचनात्मक अर्थव्यवस्था, कॉपीराइट संरक्षण और सांस्कृतिक साझेदारी पर चर्चा की। बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के नैतिक उपयोग, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर भी व्यापक मंथन किया गया।
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Varanasi News: ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक का बृहस्पतिवार को ताज होटल में शुभारंभ हुआ। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने सांस्कृतिक सहयोग, रचनात्मक अर्थव्यवस्था, डिजिटल नवाचार और कृत्रिम मेधा (एआई) के नैतिक उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया। बैठक में सदस्य देशों ने अपनी प्राथमिकताएं और दृष्टिकोण साझा करते हुए भविष्य के सहयोग की रूपरेखा पर चर्चा की।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने की। बैठक में ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, ईरान, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। वहीं, इथियोपिया, मिस्र और रूस महासंघ के प्रतिनिधि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
बैठक के दौरान सदस्य देशों ने एजेंडा से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपनी प्राथमिकताएं और दृष्टिकोण साझा किए। पहली चर्चा 'रचनात्मक अर्थव्यवस्था और जन-जन के बीच सहयोग : नवाचार, साझेदारी और आगे की राह' विषय पर हुई। चर्चा में समावेशी विकास, सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, बाजार तक पहुंच और डिजिटल नवाचार को बढ़ावा देने में रचनात्मक अर्थव्यवस्था की भूमिका पर विचार किया गया।
दूसरा सत्र 'रचनात्मक अर्थव्यवस्था में कॉपीराइट और नैतिक एआई की सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देना' विषय पर केंद्रित रहा। इसकी अध्यक्षता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। चर्चा में रचनात्मक क्षेत्रों में एआई के बढ़ते उपयोग के बीच कॉपीराइट संरक्षण, सांस्कृतिक श्रेय और नैतिक मानकों की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही ब्रिक्स देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
बैठक के समापन पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। संगीतमय प्रस्तुति में भारत की विविध संगीत परंपराओं के माध्यम से सांस्कृतिक बहुलता और एकता का संदेश दिया गया। इसके बाद 'कलर्स ऑफ इंडिया' शीर्षक से आयोजित प्रस्तुति में देश के विभिन्न शास्त्रीय और लोक नृत्य रूपों का प्रदर्शन किया गया।
इन प्रस्तुतियों ने विदेशी प्रतिनिधियों को भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत और सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया। शुक्रवार को होने वाली बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर आगे की चर्चा की जाएगी।