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धड़ल्ले से बिक रही 'मौत की डोर': बरेली नहीं अब पश्चिम बंगाल, बिहार, दिल्ली व नेपाल बॉर्डर से आ रहा चीनी मांझा

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 14 Jan 2026 05:01 PM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी में बाहर से तस्करी होकर चीनी मांझा पहुंच रहा है। यहां बरेली नहीं अब पश्चिम बंगाल, बिहार, दिल्ली व नेपाल बॉर्डर से चीनी मांझा आ रहा है। कारोबारी पांच महीने पहले ही माल रख लेते हैं।

Chinese kite string now coming from West Bengal Bihar Delhi and Nepal border not just Bareilly in Varanasi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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बनारस में हर साल जान लेने वाला चीनी मंझा स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि बाहरी राज्यों और सीमावर्ती इलाकों से चोरी छिपे आता है। पुलिस या जिला प्रशासन की नजर न पड़े ऐसे में कारोबारी पांच से छह महीने पहले ही माल मंगाकर शहर के बाहर बने गोदामों में डंप कराते हैं ताकि पुलिस की दबिश में माल पकड़ में न आए। 

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खासकर शिवपुर, रामनगर, पड़ाव और मोहनसराय क्षेत्रों में माल रखा जाता है। इस धंधे से जुड़े एक पड़ाव के एक कारोबारी ने नाम न छापने की की शर्त पर बताया कि शहर छोटे और थोक व्यापारियों का माल दिया जाता है। 
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पुलिस का दबाव होने से अब बरेली का मंझा नहीं बल्कि बिहार के मुजफ्फरपुर, पश्चिम बंगाल और नेपाल बार्डर से माल मंगाया जाता है। छोटे व्यापारियों व थोक कारोबारियों को मकर संक्रांति से दो महीने पहले ही डिलीवरी दे दी जाती है। हालांकि, ये माल चीनी मांझे की कॉपी है।

बाहरी सप्लाई, शहर में गुप्त बिक्री
ट्रेन पार्सल, बसों, ट्रकों से ये माल शहर के बाहर बने गोदाम तक पहुंचता है और इसके बाद मांग के अनुसार डिलीवरी दी जाती है। पड़ताल में ये भी सामने आया कि खरीदने वाले और बेचने वाले के बीच ये बात पूरी तरह से गुप्त रखी जाती है।

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पूरी तरह प्रतिबंधित, फिर भी धंधा जारी
चीनी मांझे पर एनडीएमए व राज्य सरकार ने पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है। बावजूद लापरवाही और मुनाफाखोरी के चलते हर साल हादसे होते हैं। नियमों के तहत बिक्री या भंडारण पर प्राथमिकी, जुर्माना और जेल तक का प्रावधान है।

तीन साल में 41 को बना चुका है शिकार, तीन गंवा चुके हैं जान
चीनी मांझे की चपेट में आने से तीन साल में आठ साल बच्ची समेत तीन की मौत हो चुकी है जबकि 41 लोग घायल हुए हैं। पक्षियों के लिए भी मांझा काल बन चुका है। बीते साल चीनी मांझे ने रोपवे की केबल को क्षतिग्रस्त कर दिया था और करीब 30 लाख रुपये का नुकसान हुआ था।

क्या कहते हैं अधिकारी
चीनी मांझे के खिलाफ एसओजी की टीम सूचना जुटाकर छापा मार रही है। स्थानीय थाना पुलिस भी कार्रवाई कर रही है। मांझा बेचते पकड़े जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भंडारण वाले स्थानों की जानकारी जुटाने के लिए निर्देशित किया गया है। -सरवणन टी, डीसीपी क्राइम

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