विकास की रफ्तार: पांच हजार करोड़ से काशी बनेगा सिटी इकोनॉमिक रीजन, कैंट से बाबतपुर तक होगा रोपवे का विस्तार
Varanasi News: वाराणसी के विकास की रफ्तार बढ़ रही है। इसी क्रम में पांच हजार करोड़ से काशी में सिटी इकोनॉमिक रीजन बनेगा। कैंट से बाबतपुर तक रोपवे का विस्तार होगा। वहीं कैंट से बाबतपुर तक मेट्रो चलाने की संभावनाओं को देखा जा रहा है।
विस्तार
वाराणसी शहर को सिटी इकोनॉमिक रीजन पर विकसित करने पर काम शुरू हो गया है। थीम तय कर शासन को बता दी गई है। इसे हेरिटेज टूरिज्म थीम के तहत विकसित किया जाएगा। इसके लिए सभी विभागों की समन्वयक बैठक हो गई है और काम शुरू कर दिया गया है। इसके तहत रोपवे का विस्तार कैंट से बाबतपुर तक किया जाएगा।
कैंट से बाबतपुर तक मेट्रो चलाने की संभावनाओं को देखा जा रहा है। वहीं बुलेट ट्रेन के स्टेशन के लिए जमीन का सर्वे किया गया है। देश में वाराणसी के अलावा बंगलरू, भुवनेश्वर-पूरी-कटक ट्राई-सिटी, कोयंबटूर-इरोड-तिरुप्पुर क्लस्टर, पुणे, सूरत और विशाखापत्तनम शामिल हैं।
सिटी इकोनॉमिक रीजन के चलते ही बुलेट ट्रेन का ठहराव काशी में किया जा रहा है। इसके लिए पिछले सप्ताह रेलवे की एक टीम ने शहर के बाहरी इलाके में स्टेशन बनाने के लिए संभावनाएं देखीं और अलग-अलग जगहों का सर्वे किया। सबसे अधिक फोकस बाबतपुर एयरपोर्ट के आसपास रहा। वहीं मेट्रो ट्रेन का एक प्रस्ताव भी रखा गया है कि बाबतपुर एयरपोर्ट से कैंट स्टेशन तक मेट्रो को चलाया जाए और रोपवे का विस्तार कैंट से बाबतपुर तक किया जाए।
प्रोजेक्ट से जुड़े एक अफसर ने बताया कि सिटी इकोनॉमिक रीजन को इस तरह विकसित किया जाएगा ताकि शहर की समूहित आर्थिक शक्ति को बढ़ावा मिले। यानी कि काशी और उसके आसपास के औद्योगिक और पर्यटन क्षेत्रों को जोड़कर एक बड़ा आर्थिक क्लस्टर तैयार किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि जब एक क्षेत्र के सभी संसाधन एक साथ मिलकर काम करेंगे, तो वह इनोवेशन, रोजगार सृजन और निवेश के लिए एक विशाल बाजार बनकर उभरेगा।
एक अफसर के मुताबिक सरकार की मंशा है कि इकोनॉमिक रीजन में आधुनिक परिवहन, स्मार्ट हाउसिंग और व्यापारिक केंद्रों के विकास में निजी कंपनियां निवेश करें। निजी क्षेत्र के आने से न केवल पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा, बल्कि विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीक भी इन उभरते हुए शहरों तक आसानी से पहुंच सकेगी।
मंदिरों के आसपास क्षेत्र को और विकसित किया जाएगा
शहर के सभी प्रमुख मंदिरों के आसपास के क्षेत्रों को और प्रमुखता से विकसित किया जाएगा, ताकि पर्यटकों की संख्या बढ़े और स्थानीय शिल्पकार और व्यापारी इसका लाभ उठाएं। श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर को पहले ही विकसित किया जा चुका है, इसलिए अब अन्य मंदिरों पर फोकस किया जाएगा।