दालमंडी: 900 मीटर सड़क चौड़ीकरण, चार महीने में 117 मामले पहुंचे हाईकोर्ट; 92 खारिज
Varanasi News: वाराणसी का पहला विकास कार्य दालमंडी सड़क चौड़ीकरण का है, जिसमें एक साथ इतने मामले हाईकोर्ट तक गए। चार महीने में 117 मामले हाईकोर्ट पहुंचे, इनमें से 92 खारिज हुए। जबकि 25 मामलों में जिला प्रशासन शपथ पत्र दाखिल करेगा।
विस्तार
दालमंडी में सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। चार महीने ही हुए हैं। इस बीच 117 मामले इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गए। इनमें से 92 मामले खारिज हो चुके हैं। 25 मामलों में सुनवाई चल रही है। इस पर जिला प्रशासन की तरफ से शपथ पत्र दाखिल किया जाना है। वाराणसी में सड़क निर्माण से जुड़ा यह पहला मामला है जिसमें इतनी बड़ी संख्या में याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल की गई हैं।
दालमंडी की सड़क 15 जून तक चौड़ी की जानी है। इसकी जद में 181 भवन आ रहे हैं। इनमें छह मस्जिद भी हैं। लोक निर्माण विभाग 194 करोड़ रुपये मुआवजा दे रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि सड़क चौड़ी न हो इसके प्रयास चल रहे हैं। दलाल सक्रिय हैं जो भूमि, भवन व दुकान मालिकों को बरगला कर कोर्ट जाने की सलाह दे रहे हैं। कमीशन वसूल रहे हैं इसलिए दुकानदार और भवन मालिक लोक निर्माण विभाग से संपर्क नहीं कर रहे हैं। तथ्यों को दरकिनार करके कोर्ट जा रहे हैं।
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भूमि अधिग्रहण एक्ट 2013 के तहत दाखिल की गईं याचिकाएं
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक दालमंडी में स्थापित लोगों ने हाईकोर्ट में जो याचिकाएं दाखिल की हैं उसमें तर्क दिया है कि पीडब्ल्यूडी की ओर से भवन और जमीन का अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण एक्ट 2013 के तहत नहीं किया जा रहा है। इसके जवाब में प्रशासन ने शपथ पत्र दाखिल किया और हाईकोर्ट को बताया कि सारा अधिग्रहण एक्ट के तहत नहीं बल्कि साल 2015 के शासनादेश के क्रम में आपसी समझौते के आधार पर किया गया है। एक्ट के तहत उसी को संपत्ति का वारिस माना जाएगा जिसका नाम खतौनी में है। इससे कई लोग पात्रता की सूची से बाहर हो जाएंगे। कोर्ट ने इसे सही मानते हुए 92 याचिकाएं खारिज कर दीं।
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24 भवनों का 14 करोड़ दिया जा चुका मुआवजा
लोक निर्माण विभाग की ओर से अब तक दालमंडी के 24 भवनों को अधिग्रहण किया गया है। इसके लिए 14 करोड़ रुपये मुआवजा दिया गया है। जैसे जैसे संपत्ति पर हकदार सही पाए जा रहे हैं, वैसे-वैसे मुआवजा दिया जा रहा है। संपत्ति के कागजों की जांच के लिए लगातार लोगों को कार्यालय बुलाया जा रहा है।
इन कागजों पर नाम होने पर माना जा रहा वैध हकदार
पीडब्ल्यूडी की ओर साल 2015 के शासनादेश के क्रम में आपसी समझौते के आधार पर मुआवजा दिया जा रहा है। संपत्ति के असली मालिक की पहचान के लिए संबंधित व्यक्ति का निवास उक्त स्थान पर 40 से 50 वर्ष पहले का हाेना देखा जा रहा है। संबंधित भवन की रजिस्ट्री के कागज भी देखे जा रहे हैं। पीला कार्ड, आधार कार्ड देखने के साथ ही बिजली बिल की जांच की जा रही है।
क्या बोले अधिकारी
दालमंडी पहली ऐसी परियोजना है जिसमें 4 महीने में ही 117 मामले हाईकोर्ट पहुंचे हैं। 25 मामले में जिला प्रशासन की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया जाएगा। परियोजना का काम 15 जून तक पूरा होगा।
-केके सिंह, अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, वाराणसी
