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Digital Arrest: महाराष्ट्र का पुलिस अधिकारी बनकर किया डिजिटल अरेस्ट, डर और दबाव बनाकर तीन लाख रुपये ठगे
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 18 Mar 2026 01:22 AM IST
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सार
Varanasi News: वाराणसी जिले के रिटायर्ड प्रधानाचार्य को साइबर ठगों ने महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट किया फिर डर और दबाव बनाकर तीन लाख रुपये ठग लिए।
digital arrest
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
वाराणसी जिले में लंका थाना क्षेत्र के बालाजी नगर कॉलोनी निवासी रिटायर्ड प्रधानाचार्य शंकर सिंह यादव को साइबर ठगों ने महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट कर ठगी का शिकार बनाया। ठगों ने डर और दबाव बनाकर तीन लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। हालांकि बैंककर्मी की सतर्कता से आगे की बड़ी रकम ठगी होने से बच गई।
पीड़ित शंकर सिंह यादव के मोबाइल पर सोमवार को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी बैंक खाता खोला गया है। जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध गतिविधियां की जा रही हैं। इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल किया, जिसमें एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखाई दिया और खुद को अधिकारी बताते हुए मामले को गंभीर बताया।
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ठगों ने शंकर सिंह यादव को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाते हुए कहा कि अगर मामले को दबाना है तो उन्हें 50 लाख रुपये देने होंगे। डर और घबराहट में आकर पीड़ित ने तीन लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। पैसे मिलने के बाद भी ठग लगातार दबाव बनाते रहे और और अधिक रकम की मांग करते हुए उन्हें बैंक से लोन लेने को कहा।
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पीड़ित शंकर सिंह यादव के मोबाइल पर सोमवार को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी बैंक खाता खोला गया है। जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध गतिविधियां की जा रही हैं। इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल किया, जिसमें एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखाई दिया और खुद को अधिकारी बताते हुए मामले को गंभीर बताया।
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ठगों ने शंकर सिंह यादव को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाते हुए कहा कि अगर मामले को दबाना है तो उन्हें 50 लाख रुपये देने होंगे। डर और घबराहट में आकर पीड़ित ने तीन लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। पैसे मिलने के बाद भी ठग लगातार दबाव बनाते रहे और और अधिक रकम की मांग करते हुए उन्हें बैंक से लोन लेने को कहा।
ठगों के दबाव में आकर शंकर सिंह यादव लंका के पंजाब नेशनल बैंक पहुंचे और 10 लाख रुपये का पर्सनल लोन भी पास करा लिया। इसी दौरान उनकी घबराहट और जल्दबाजी को देखकर बैंक के डिप्टी मैनेजर आनंद प्रकाश सिंह को संदेह हुआ। उन्होंने तत्काल भुगतान रोक दिया और शंकर सिंह यादव को समझाया कि यह साइबर ठगी का मामला हो सकता है। इसके बाद उन्होंने पीड़ित के परिजनों से संपर्क कर पूरी जानकारी दी।
बैंक कर्मी की सतर्कता के कारण 10 लाख की ठगी होने से बच गई। बाद में पीड़ित ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा ने बताया कि साइबर सेल की मदद से जानकारी जुटाई जा रही है।
बैंक कर्मी की सतर्कता के कारण 10 लाख की ठगी होने से बच गई। बाद में पीड़ित ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा ने बताया कि साइबर सेल की मदद से जानकारी जुटाई जा रही है।
क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी
साइबर अपराधियों द्वारा ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी रहे हैं। ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और लोगों को यह कहकर डराते हैं कि उनका नाम किसी आपराधिक मामले या मनी लॉन्ड्रिंग में आ गया है। इसके बाद गिरफ्तारी से बचाने या जांच बंद कराने के नाम पर बड़ी रकम की मांग की जाती है।