{"_id":"69ba71fb48cfb61ba806feb9","slug":"chaitra-navratri-2026-three-auspicious-timings-for-kalash-sthapana-maa-durga-to-grace-homes-for-nine-days-2026-03-18","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Chaitra Navratri 2026: कलश स्थापना के तीन मुहूर्त, नौ दिनों तक घरों में विराजेंगी मां दुर्गा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chaitra Navratri 2026: कलश स्थापना के तीन मुहूर्त, नौ दिनों तक घरों में विराजेंगी मां दुर्गा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Wed, 18 Mar 2026 03:06 PM IST
विज्ञापन
सार
Navratri 2026: चैत्र नवरात्र कल यानी 19 मार्च से शुरू हो रहा है। इस बार कलश स्थापना के तीन मुहूर्त मिल रहे हैं। चैत्र अष्टमी 26 को और नवमी तिथि 27 मार्च को मिल रही है।
navratri
- फोटो : adobe stock
विज्ञापन
विस्तार
चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू हो रहा है। करीब नौ दशक बाद इस बार चैत्र प्रतिपदा की हानि के चलते अमावस्या तिथि में ही कलश स्थापना होगी। यानी चैत्र नवरात्र पुराने साल में ही शुरू होगा। ज्योतिषियों के अनुसार यह दुर्लभ संयोग है जब नवसंवत्सर के दिन प्रतिपदा तिथि की नहीं मिल रही है।
Trending Videos
नवरात्र के शुभारंभ पर भक्त अपने घरों और मंदिरों में 15 तरह के नैवेद्य से पूजन कर कलश स्थापित करेंगे। मां नौ दिनों तक विराजमान रहेंगी। कलश स्थापना के तीन मुहूर्त मिल रहे हैं। चैत्र अष्टमी 26 को और नवमी तिथि 27 मार्च को मिल रही है। रामनवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी। इस बार नए साल के राजा गुरु और मंत्री मंगल होंगे। माता का पालकी से आगमन होगा। नया विक्रम संवत 2083 एवं शक संवत 1948 होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
इसे भी पढ़ें; ईद की रौनक: भा रहे पाकिस्तानी सूट और कश्मीरी चूड़ियां, बाजारों में खरीदारी के लिए उमड़ रही भीड़
काशी में चैत्र नवरात्र पहले दिन गायघाट स्थित मुखनिर्मालिका गौरी और शैलपुत्री माता के दर्शन पूजन का विधान है। सनातन धर्म में नया वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से माना जाता है। इस बार एक संवत्सर का लोप होने से हिंदू नवसंवत्सर प्रतिपदा के बजाय द्वितीय तिथि से शुरू होगा। इस संवत्सर का नाम रौद्र संवत्सर होगा। वर्ष के आरंभ में चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा का तिथि का क्षय है।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय और आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि एक संवत्सर और तिथि के लोप से पुराने साल में ही नवरात्र की शुरुआत होगी। 19 मार्च को सुबह 6:40 बजे तक अमावस्या रहेगी। फिर प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। इसके बाद ही मंदिरों और घरों में कलश स्थापना होगी। नौ गौरी के दर्शन पूजन होंगे।
मुखनिर्मालिका और शैलपुत्री के पूजन से करेंगे शुरू
चैत्र नवरात्र पर काशी में नौ गौरी के दर्शन-पूजन का विधान है। पहले दिन गायघाट स्थित मुखनिर्मालिका गौरी के दर्शन, 20 को कर्णघंटा के निकट सप्तसागर माहल्ला स्थित ज्येष्ठा गौर, 21 को सत्यनारायण मंदिर में प्रतिष्ठित सौभाग्य गौरी, 22 को ज्ञानवापी के शृंगार गौरी, 23 को मीरघाट स्थित विशालाक्षी गौरी, 24 को ललिता गौरी, 25 मार्च को अन्नपूर्णा मंदिर परिसर स्थित भवानी गौरी, अष्टमी तिथि पर 26 मार्च को पंचगंगा घाट स्थित मंगला गौरी और नवमी तिथि पर 27 को लक्ष्मीकुंड स्थित महालक्ष्मी गौरी के दर्शन होंगे।