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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   First murder linked cybercrime Aura car led accused five arrested—including shooter and mastermind

साइबर अपराध में पहली हत्या: ऑरा कार ने आरोपियों तक पहुंचाया, मुठभेड़ में शूटर, मास्टरमाइंड समेत पांच गिरफ्तार

Tue, 30 Jun 2026 06:07 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Tue, 30 Jun 2026 06:07 AM IST
सार

Encounter in Varanasi: वाराणसी में साइबर अपराध से जुड़ी हत्या के मामले में रोहनिया पुलिस और एसओजी ने मुठभेड़ के बाद शूटर, मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने 1.78 लाख रुपये और अवैध असलहा बरामद किया। जांच के दौरान ऑरा कार अहम सुराग बनी, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची।

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First murder linked cybercrime Aura car led accused five arrested—including shooter and mastermind
पत्रकारवार्ता में मामले की जानकारी देती पुलिस। - फोटो : संवाद

विस्तार

Varanasi News: रोहनिया थाना क्षेत्र के अवलेशपुर सौरभ विहार कॉलोनी में किराना व्यवसायी जितेंद्र पटेल की हत्या उनके बैंक खाते में 26 लाख रुपये लूटने के इरादे से की गई थी। साइबर अपराधियों ने शूटर के जरिये इस हत्या को अंजाम दिलवाया। साइबर अपराध में पहली बार गोली मारकर हत्या की गई। 

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कमिश्नरेट समेत पूर्वांचल में इस तरीके की हत्या नहीं हुई थी। शूटर, मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपियों को रोहनिया पुलिस और एसओजी ने बीती रात गिरफ्तार किया। करसड़ा में मुठभेड़ में शूटर समेत दो आरोपी घायल हो गए। आरोपियों के पास से 1.78 लाख रुपये, अवैध असलहा, सिम कार्ड, बारकोड समेत अन्य सामान बरामद हुए। 
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सोमवार को पुलिस लाइन के सभागार में डीसीपी वरुणा जोन प्रमोद कुमार ने पत्रकारों को बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य शूटर मिर्जापुर के अदलहाट थाना क्षेत्र के खजुरौल भौरूहिया निवासी सुशील पटेल उर्फ गोलू और मिर्जापुर के अहरौरा थाना क्षेत्र के घाटमपुर निवासी गियांशु पटेल उर्फ बाबू, मास्टरमाइंड अहरौरा के बरबकपुर निवासी आयुष पटेल उर्फ भोला, अदलहाट बाजार निवासी अमन सेठ और अदलहाट थाना क्षेत्र के देवरिया निवासी मनीष सिंह हैं। ये सभी 19 से 23 वर्ष की आयु के बीच हैं।

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गियांशु पटेल और आयुष छह माह पूर्व जनरल स्टोर संचालक जितेंद्र की दुकान पर पेटीएम केवाईसी अपडेट के बहाने पहुंचे थे। मोबाइल अपडेट के बहाने आरोपियों ने पता लगाया कि जितेंद्र के बैंक खाते में 26 लाख रुपये हैं। यहीं से गियांशु और आयुष ने मोबाइल लूटने की योजना बनाई। 

गियांशु और आयुष ने अपने दोस्त अमन सेठ व मनीष सिंह के साथ रेकी की। इस बीच मामला नहीं बन पाने के कारण सभी ने योजना बनाई कि जितेंद्र की गोली मारकर हत्या के बाद मोबाइल लूटकर भाग जाएंगे। आयुष ने अपने मित्र सुशील पटेल उर्फ गोलू को साथ में जोड़ा। मुंगेर, बिहार से सुशील और अमन सेठ अवैध पिस्टल खरीदकर लाए।

6 जून को जितेंद्र की रास्ते में गोली मारकर हत्या की जानी थी, लेकिन उस दिन जितेंद्र जल्दी घर पहुंच गया था। 8 जून की रात जितेंद्र बाइक से घर लौट रहा था कि घर से 100 मीटर पहले ही रोनिन बाइक से सुशील और गियांशु ने रेकी की और बाइक पर पीछे बैठे शूटर सुशील ने गोली मारी। हालांकि पहली गोली जितेंद्र की पीठ पर लगी तो वह सीधे घर की ओर भागा। 

सुशील ने दोबारा सिर में गोली मारने का प्रयास किया, लेकिन गोली मिस हो गई। इसके बाद सभी भाग निकले। अमन सेठ, आयुष पटेल और मनीष सिंह हुंडई की ऑरा कार से उनका सहयोग कर रहे थे। आयुष और गियांशु पहले पेटीएम में कर्मचारी थे।

डीसीपी प्रमोद कुमार ने बताया कि लगभग 2000 कैमरों और 50 पुलिसकर्मियों की टीम के जरिये मामले की गुत्थी सुलझाने का प्रयास किया गया। कैमरों की छानबीन में यह मालूम चला कि रोनिन बाइक के आगे ऑरा कार भी चल रही थी। कई रूटों पर ऑरा कार और रोनिन बाइक को साथ-साथ देखा गया। 

ऑरा कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर अमन सेठ को पकड़ा गया। इसके बाद पूरा मामला स्पष्ट हो गया। बिना नंबर की रोनिन बाइक के बारे में जानकारियां जुटाई गईं तो बाइक मिर्जापुर के एक शोरूम से खरीदी गई थी। सभी आरोपियों के पास रोनिन बाइक है, इसलिए इस गैंग को रोनिन गैंग का नाम दिया गया।

लखनऊ, अयोध्या, कानपुर, प्रयागराज में कर चुके हैं साइबर ठगी
एडीसीपी लिपि नागयच ने बताया कि आरोपी आयुष पटेल, मनीष सिंह और अमन सेठ को रविवार की रात अखरी के पास से गिरफ्तार किया गया। शूटर सुशील पटेल और गियांशु पटेल को करसड़ा में पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार किया गया। 

दोनों आरोपियों के पास से 7.65 बोर की एक पिस्टल, 7.65 बोर के चार कारतूस, .315 बोर का तमंचा, चार कारतूस, दो रोनिन बाइक, 10 पेटीएम मशीनें, विभिन्न कंपनियों के 29 डेबिट कार्ड, 1.78 लाख रुपये नकद, 20 मोबाइल फोन, 116 क्यूआर कोड, एप्पल का लैपटॉप, नौ सिम कार्ड, वाईफाई डोंगल, पासबुक और चेकबुक आदि बरामद किए गए। 

वाराणसी के अलावा लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, अयोध्या और चंदौली में भी आरोपियों ने साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया है। पुलिस आयुक्त ने रोहनिया इंस्पेक्टर राजू सिंह और एसओजी को एक लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है। आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी है।

19-20 साल के लड़कों ने 20 दिन तक पुलिस को छकाया
पांच आरोपियों की उम्र 19 से 23 वर्ष के बीच है। साइबर ठगी पर बनी जामताड़ा मूवी देखकर आरोपियों ने कम उम्र में साइबर ठगी से अथाह पैसे कमाने की सोची। आईटीआई, बीएससी, बीए और इंटर पास आरोपियों ने पहले छोटी-छोटी साइबर ठगी शुरू की। 

छह माह पूर्व पेटीएम कंपनी से आरोपी आयुष ने छोटे-बड़े दुकानदारों की पेटीएम केवाईसी की और उन्हें क्यूआर कोड उपलब्ध कराए। इसके सहारे जब वह अपने काम में पारंगत हो गया तो उसने अपना गिरोह तैयार किया। इसमें उसने गियांशु, अमन सेठ, मनीष और सुशील समेत दो अन्य युवकों को जोड़ा।

वारदात के बाद गांवों के रूट से चुनार पहुंचे
वारदात के बाद सभी मुख्य मार्ग छोड़कर गांवों के रूट से गए। सभी गंगापुर-बेटावर होते हुए चुनार पहुंचे, जहां सभी एक साथ मिले। शूटर सुशील उर्फ गोलू ने अपने कपड़े बदले। आयुष और मनीष पुनः अवलेशपुर स्थित किराये के कमरे पर पहुंचे। अन्य अपने घरों को चले गए। उन्हें पता था कि पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पाएगी। 

वारदात वाली रात बिना नंबर की बाइक और अंधेरे में चेहरा स्पष्ट नहीं होने के कारण शुरुआत में पुलिस टीम को काफी परेशानियां हुईं। ऑरा कार की बार-बार मिलती लोकेशन ने पुलिस टीम का काम आसान कर दिया। कार मालिक के पकड़े जाने के बाद हत्या की गुत्थी सुलझ गई।

अधिक उम्र के दुकानदारों को बनाते थे निशाना
एसीपी रोहनिया अवधेश विश्वकर्मा ने बताया कि आरोपी पहले पेटीएम एजेंट बनकर ऐसे दुकानदारों को लक्ष्य करते थे, जो अधिक उम्र के और डिजिटल रूप से अशिक्षित होते थे। पेटीएम केवाईसी के बहाने दुकानदार का मोबाइल अपने कब्जे में लेकर उसी मोबाइल से विभिन्न लोन एप्लीकेशन के जरिए लोन स्वीकृत करा लेते थे। 

इसके बाद मोबाइल की सिम निकालकर चोरी कर लेते थे और उसी सिम का उपयोग कर स्वीकृत लोन की धनराशि व बैंक खाते में उपलब्ध धन को ज्वेलर्स की दुकानों पर ऑनलाइन भुगतान कर आभूषण खरीदने और पेट्रोल पंपों पर ऑनलाइन भुगतान कर नकद धन प्राप्त करते थे। हाल ही में आरोपियों ने चेतमणि ज्वेलर्स के यहां भी साइबर ठगी की थी। पिछले छह माह के अंदर कुल 25 घटनाओं को अंजाम दिया है।

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