विरासत: 135 साल पुरानी दुकान जहां अंग्रेज सिलवाते थे वर्दी, अब चौथी पीढ़ी सिल रही पुलिस अधिकारियों की वर्दी
Varanasi News: वाराणसी जिले में 135 साल पुरानी दुकान है, जहां आठ आने देकर अंग्रेज वर्दी सिलवाते थे। इस दुकान पर अब चौथी पीढ़ी पुलिस अधिकारियों की वर्दी सिल रही है।
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वाराणसी शहर की तंग गलियों में सदर बाजार स्थित एक छोटी-सी दुकान पिछले करीब डेढ़ सौ साल से पुलिस की वर्दियों में गरिमा और रौब जोड़ने का काम कर रही है। वर्ष 1890 के आसपास शुरू हुई इस दुकान से अंग्रेजी शासनकाल के पुलिस अधिकारियों से लेकर आजादी के बाद के पुलिस अधिकारी और वर्तमान में एडीजी, आईजी और एसएसपी तक अपनी वर्दी सिलवाते रहे हैं।
आज इस विरासत को नौशाद और वकील अहमद (चौथी पीढ़ी) संभाल रहे हैं। नौशाद बताते हैं कि शुरुआती दौर में जो जानकारी उनके पूर्वजों से मिली, उसके अनुसार अंग्रेजों की वर्दी की सिलाई का दर 08-16 आना था। वर्दी लंबी कमीज होती थी और पैंट घुटने तक होती थी। कमर में पुलिसकर्मी चमड़े की बेल्ट लगाते थे।
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दुकान की नींव 18वीं सदी के आखिर में नौशाद के परदादा मंगलू ने रखी थी। दुकान का नाम मंगलू एंड संस था। नौशाद बताते हैं कि परदादा मंगलू के जाने के बाद दादा पीर मोहम्मद ने इसे आगे बढ़ाया, फिर पिता इरशाद अहमद अंसारी ने संभाला। पिता के जाने के बाद दोनों भाइयों ने इसे संभाला। पुलिस की वर्दी सिर्फ कपड़ा नहीं होती, बल्कि यह अनुशासन, जिम्मेदारी और सम्मान का प्रतीक है।
अंग्रेजों ने लगवाया था इंडियन एंड डॉग्स नॉट अलाउड का बोर्ड
शुरुआत में उनकी दुकान पर अंग्रेज अधिकारियों की वर्दियां और अंग्रेज महिलाओं के कपड़े ही सिलने और ठीक कराने के लिए आते थे। उस समय अंग्रेजों का रवैया भारतीयों के प्रति काफी भेदभावपूर्ण था। कहा जाता है कि दुकान खोलने के दौरान एक शर्त भी रखी गई थी। दुकान के बाहर इंडियन एंड डॉग्स नॉट अलाउड का बोर्ड लगवाया गया था। इसी शर्त के बाद उन्हें सिलाई का काम करने की अनुमति दी गई।