ज्ञानवापी: सुनवाई पर रोक लगाने की मांग, वक्फ बोर्ड ने दिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला; अगले माह की तारीख
ज्ञानवापी परिसर में पूजा-पाठ के अधिकार से जुड़े 1991 के मुकदमे में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर अग्रिम सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की है। वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने इसका विरोध किया है। अदालत में प्रार्थना पत्र पर 13 अक्तूबर को सुनवाई होगी।
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ज्ञानवापी परिसर में हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने से जुड़े 1991 में दायर मुकदमे में उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अग्रिम सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की है। बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है। सिविल जज (सीनियर डिवीजन, फास्ट ट्रैक) अभिषिक्ता यादव की अदालत में इस अर्जी पर 13 नवंबर को सुनवाई होगी।
वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उपासना स्थल कानून (प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट) से संबंधित विवादों में अग्रिम सुनवाई पर रोक लगाई है। इसी आदेश का हवाला देते हुए बोर्ड ने ज्ञानवापी के मूल मुकदमे की सुनवाई आगे नहीं बढ़ाने की मांग की है।
वाद मित्र ने रोक की मांग पर जताई आपत्ति
दूसरी ओर, मुकदमे में वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने वक्फ बोर्ड की मांग पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी के इस मुकदमे की सुनवाई पर रोक लगाने का कोई विशिष्ट आदेश नहीं दिया है। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस निर्देश का भी उल्लेख किया, जिसमें मुकदमे का निस्तारण छह महीने के भीतर करने को कहा गया था। इसी के तहत अदालत में मामले की त्वरित सुनवाई चल रही है।
इससे पहले जिला जज की अदालत ने सील वजूखाने के ताले पर कपड़ा बदलने से संबंधित प्रशासन की अर्जी पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। फिलहाल ज्ञानवापी के मूल मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने से संबंधित प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई चल रही है।
ऐसे में वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल अग्रिम सुनवाई पर रोक लगाने संबंधी अर्जी पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 13 नवंबर को होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि बोर्ड की मांग पर अदालत क्या रुख अपनाती है और मूल मुकदमे की सुनवाई आगे किस तरह बढ़ेगी।