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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: अमर उजाला का सर्वे, 80% लोगों ने माना परवरिश सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 08 Mar 2026 02:15 PM IST
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सार

Womens Day: अधिकतर महिलाओं ने कहा कि महिलाएं केवल परिवार ही नहीं, बल्कि समाज और देश के विकास की भी बराबर भागीदार हैं। उन्हें शिक्षा, सम्मान और अपने सपनों को पूरा करने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए।

International Women's Day Amar Ujala survey 80% agree parenting is not just women responsibility
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

Varanasi News: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अमर उजाला ने सामाजिक सर्वे कर महिलाओं के लिए प्रकृति, परवरिश और परंपराओं से जुड़ी किसी एक पाबंदी को तोड़ने के लिए लोगों से राय मांगी। इसमें 80 फीसदी लोगों ने जवाब दिया कि परवरिश सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है। शेष 20 फीसदी लोगों ने भी अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार अपनी राय भेजी।

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सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 18 से 30 वर्ष आयु के लोगों ने परवरिश से जुड़ी पाबंदियों को हटाने की बात कही है। 30 से 45 वर्ष वालों ने प्रकृति और परंपरा से जुड़ी पाबंदियों को हटाने की बात कही। वहीं 45 से 60 वर्ष की आयु वालों ने भी परंपराओं की पाबंदी से महिलाओं को अलग रहने की राय दी। 

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सर्वे में मिले जवाब

सर्वे में लोगों ने कहा कि महिलाओं के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय अक्सर समाज, परिवार या परंपराओं के दबाव में तय किए जाते हैं। प्रकृति ने महिलाओं को संवेदनशीलता, धैर्य और सृजन की अद्भुत क्षमता दी है, लेकिन परवरिश और परंपराओं के नाम पर कई बार उनकी स्वतंत्रता सीमित कर दी जाती है। अक्सर उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अपने सपनों, इच्छाओं और भावनाओं को परिवार या समाज की सोच के अनुसार ढाल लें।

महिलाओं को भी अपने जीवन, शिक्षा, करियर और जीवनशैली से जुड़े फैसले लेने की उतनी ही स्वतंत्रता और सम्मान मिलना चाहिए, जितना पुरुषों को मिलता है। जब समाज महिलाओं पर लगी अनावश्यक पाबंदियों को छोड़कर उनकी क्षमता और व्यक्तित्व को खुलकर विकसित होने का अवसर देगा, तभी वास्तव में संतुलित और प्रगतिशील समाज का निर्माण हो सकेगा। महिलाएं केवल घर की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और देश के विकास की मजबूत शक्ति हैं। 

उन्हें बराबरी का सम्मान, अवसर और निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। वह पाबंदी, जिसमें महिलाओं को सिर्फ पर्दे में रहने और बच्चों को जन्म देने की जिम्मेदारी तक सीमित समझा जाता है, उसे खत्म होना चाहिए। 

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