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Varanasi News: विश्वनाथ धाम से मार्कंडेय धाम तक कांवड़ियों ने किया जलाभिषेक, सुख-समृद्धि की मांगी मुराद
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सावन के तीसरे सोमवार पर काशी विश्वनाथ मंदिर की हुई सजावट। स्रोत मंदिर प्रशासन
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वाराणसी। सावन के तीसरे सोमवार को जलाभिषेक और दर्शन-पूजन के लिए रविवार को ही श्रीकाशी विश्वनाथ धाम से कैथी स्थित मार्कंडेय महादेव तक कांवड़ियों का हुजूम उमड़ा रहा। घाटों, शिविरों और धर्मशालाओं में कांवड़ियों की भीड़ रही। हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे। डीजे की धुन पर कांवड़िये थिरकते और शिव की भक्ति में मगन रहे। मार्कंडेय में रात होते ही कतार लग गई। पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों से कांवड़िये कतार में लगकर झमाझम बारिश के बीच जलाभिषेक करते रहे। मार्कंडेय महादेव मंदिर में डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम से लेकर मार्कंडेय महादेव मंदिर में जलाभिषेक और दर्शन के लिए सुबह से ही खासकर कांवड़िए पहुंचने लगे। मार्कंडेय धाम में शनिवार की रात से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। रविवार सुबह गंगा-गोमती संगम पर स्नान कर मार्कंडेय महादेव में जलाभिषेक के बाद त्रिलोचन महादेव और श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के लिए रवाना हो गए। शिविरों व धर्मशालाओं में सुबह से ही भीड़ रही। प्रयागराज से आने वाले कांवड़िये राजातालाब, रोहनिया, मुढ़ैला, चांदपुर, मंडुवाडीह, रथयात्रा, गोदौलिया, चितरंजन पार्क, मैदागिन आदि इलाकों में लगे कांवड़िया शिविरों में भजन-कीर्तन और भंडारे का प्रसाद लेते दिखे। शिवभक्त महामृत्युंजय महादेव, जागेश्वर, ओंकारेश्वर, गौरीकेदारेश्वर, तिलभांडेश्वर, सारंगनाथ, शूलटंकेश्वर, रामेश्वर महादेव आदि शिवालयों में जलाभिषेक के लिए भीड़ रही।
राम नाम लिखा बेलपत्र और चढ़ाया संगम का जल
चौबेपुर। मार्कंडेय महादेव में कांवड़ियों के अलावा आसपास के जिलों के श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। भक्तों ने राम नाम लिखा बेलपत्र और गंगा-गोमती संगम का एक लोटा जल चढ़ाया। मान्यता है कि बाबा को श्रीराम नाम लिखे बेलपत्र और जल चढ़ाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर परिसर में रुद्राभिषेक, शिवपुराण, सत्यनारायण भगवान की कथा और महामृत्युंजय मंत्र का जप आदि चलता रहा।
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श्रीकाशी विश्वनाथ धाम से लेकर मार्कंडेय महादेव मंदिर में जलाभिषेक और दर्शन के लिए सुबह से ही खासकर कांवड़िए पहुंचने लगे। मार्कंडेय धाम में शनिवार की रात से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। रविवार सुबह गंगा-गोमती संगम पर स्नान कर मार्कंडेय महादेव में जलाभिषेक के बाद त्रिलोचन महादेव और श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के लिए रवाना हो गए। शिविरों व धर्मशालाओं में सुबह से ही भीड़ रही। प्रयागराज से आने वाले कांवड़िये राजातालाब, रोहनिया, मुढ़ैला, चांदपुर, मंडुवाडीह, रथयात्रा, गोदौलिया, चितरंजन पार्क, मैदागिन आदि इलाकों में लगे कांवड़िया शिविरों में भजन-कीर्तन और भंडारे का प्रसाद लेते दिखे। शिवभक्त महामृत्युंजय महादेव, जागेश्वर, ओंकारेश्वर, गौरीकेदारेश्वर, तिलभांडेश्वर, सारंगनाथ, शूलटंकेश्वर, रामेश्वर महादेव आदि शिवालयों में जलाभिषेक के लिए भीड़ रही।
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राम नाम लिखा बेलपत्र और चढ़ाया संगम का जल
चौबेपुर। मार्कंडेय महादेव में कांवड़ियों के अलावा आसपास के जिलों के श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। भक्तों ने राम नाम लिखा बेलपत्र और गंगा-गोमती संगम का एक लोटा जल चढ़ाया। मान्यता है कि बाबा को श्रीराम नाम लिखे बेलपत्र और जल चढ़ाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर परिसर में रुद्राभिषेक, शिवपुराण, सत्यनारायण भगवान की कथा और महामृत्युंजय मंत्र का जप आदि चलता रहा।
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