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Varanasi News: नगर निगम ने तोड़ा लाइसेंस शुल्क वसूली का पुराना रिकॉर्ड, 31 मार्च तक जमा करने का मौका

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Tue, 17 Mar 2026 01:53 PM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी जिले में नगर निगम ने लाइसेंस शुल्क वसूली का पुराना रिकॉर्ड तोड़ा। निगम ने कुल 4.13 करोड़ से अधिक की वसूली की है। स्मार्ट काशी एप से घर बैठे शुल्क जमा हो रहा है। वहीं 31 मार्च तक शुल्क जमा करने का मौका है। 

Municipal Corporation Varanasi broken previous record for license fee collection with 4.13 Crore rupees
वाराणसी नगर निगम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गृहकर और जलकर के साथ-साथ अब लाइसेंस विभाग भी पूरी तरह एक्शन मोड में है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में निगम लाइसेंस शुल्क के मद में कुल 4.13 करोड़ से अधिक की वसूली की है। 18.77 लाख की धनराशि चेक से मिली। निगम ने इस बार पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 की कुल वसूली 2.11 करोड़ के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।

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लाइसेंस शुल्क के मद में महज 2.11 करोड़ की वसूली हुई थी, वहीं इस बार यह आंकड़ा दोगुने के करीब पहुंच गया है। हालांकि निगम ने लाइसेंस शुल्क से वसूली का लक्ष्य 5.85 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। ऐसे में 31 मार्च तक लक्ष्य हासिल होना तय है। लाइसेंस शुल्क जमा करने के लिए निगम के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। स्मार्ट काशी ऐप के माध्यम से शहर का कोई भी व्यापारी या संस्थान घर बैठे ही ऑनलाइन जमा कर सकता है। इस डिजिटल पहल से न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि वसूली की प्रक्रिया भी तेज हुई है।
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अपर नगर आयुक्त अमित कुमार ने बताया कि लाइसेंस शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च है। व्यापारियों से स्मार्ट काशी एप से जल्द से जल्द लाइसेंस शुल्क जमा करने की अपील की है। निर्धारित समय सीमा में लाइसेंस शुल्क जमा न करने की स्थिति में बकाया राशि पर 50 प्रतिशत का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी है।

वसूली के आंकड़े

  • देसी, अंग्रेजी शराब की दुकानों और बार लाइसेंस से सर्वाधिक 1.66 करोड़ रुपये की आय
  • होटल और गेस्ट हाउस (थ्री स्टार, फाइव स्टार से लेकर छोटे गेस्ट हाउस और लॉज तक ) से लगभग 64.14 लाख रुपये
  • निजी कोचिंग संस्थानों से 1.15 लाख रुपये
  • ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटर (चार पहिया और दो पहिया वाहनों के अधिकृत सर्विस सेंटरों) से 11.60 लाख रुपये
  • नर्सिंग होम, निजी अस्पताल, पैथोलॉजी और क्लीनिकों से 85.45 लाख रुपये
  • फाइनेंस, चिटफंड और इंश्योरेंस कंपनियों से 11.40 लाख रुपये
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