नृसिंह लीला: भक्त प्रह्लाद ने संभाली राजगद्दी, श्रीहरि ने दिया दशावतार रूप में दर्शन; गूंजते रहे जयघोष
वाराणसी में आयोजित पांच दिवसीय नृसिंह लीला का विराम हुआ। लीला की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। बुराई का अंत कर प्रह्लाद के राजतिलक देखकर लोग हर्षित हुए। वहीं दशावतार की झांकी सजाई गई।
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श्री नृसिंह लीला समिति की ओर से पांच दिवसीय प्राचीन नृसिंह लीला का शनिवार की रात प्रह्लाद घाट पर भक्त प्रह्लाद के राज्याभिषेक के साथ विराम हुआ। लीला की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। इसके बाद भक्त प्रह्लाद का राजतिलक हुआ।
कुलगुरु शुक्लाचार्य ने उनके राज्याभिषेक की घोषणा की। पुरोहितों ने राजतिलक की सामग्री-अस्त्र, शस्त्र, वस्त्र, मुकुट आदि-का विधिवत पूजन किया। इसके बाद भक्त प्रह्लाद का राजतिलक शुरू हुआ। घाट की सीढ़ियों पर बुराई पर अच्छाई की जीत के उत्सव को देखकर सभी हर्षित हो रहे थे। पात्रों के भाव और उनकी सशक्त प्रस्तुति सभी को मुग्ध कर रही थी।
प्रह्लाद ने अपने पिता के अत्याचारपूर्ण शासन को समाप्त कर एक धर्मपरायण और उदार राजा के रूप में शासन शुरू किया। उन्होंने प्रजा को विष्णु भक्ति और नैतिकता की राह दिखाई। इसके बाद दशावतार की झांकी सजाई गई। श्रीहरि विष्णु के अन्य अवतारों की झांकी के भक्तों ने दर्शन किए।
नृसिंह अवतार, वराह के अलावा कूर्म अवतार (कच्छप), मत्स्य अवतार, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, मोहिनी और कल्कि अवतार की झांकी सजाई गई। रामायणियों ने प्रभु के अवतारों के प्रसंगों का वर्णन किया। आरती के साथ लीला को विराम दिया गया।
प्रमुख पात्रों में देवराज त्रिपाठी, रुद्रकांत पांडेय, व्यास शशांक त्रिपाठी, रामायणी में पद्म साहनी, सुरेंद्र गुप्ता, राजकुमार त्रिपाठी के अलावा लीला के नेपथ्य में शुद्धू साहनी, लक्ष्मीनारायण पांडेय, मोहित उपाध्याय, विकास, दीप साहनी, भैरव साहनी, अशोक आदि शामिल रहे।
