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100 बच्चों के दिल में छेद: उम्र एक महीने से 8 साल, सभी को सर्जरी का इंतजार; BHU से अलीगढ़ भेजे जाते हैं बच्चे

रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 04 May 2026 10:55 AM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी में आरबीएसके कैंप में बच्चों में दिल में छेद की पहचान हो रही है, लेकिन सर्जरी स्थानीय स्तर पर नहीं हो पा रही। परिजनों को अलीगढ़ मेडिकल काॅलेज जाना पड़ता है, जहां तारीख में देरी होती है। आईएमएस बीएचयू में सुविधा होने के बावजूद प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, हालांकि पहल जारी है।

100 Children Holes Hearts Aged one Month to 8 Years All Awaiting Surgery Children Referred from BHU to Aligarh
IMS BHU से अलीगढ़ भेजे जाते हैं बच्चे। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

IMS BHU: वाराणसी जिले के आठ ब्लॉकों में दिल में छेद से परेशान 100 बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें सर्जरी की जरूरत है। इनमें 1 महीने से 8 साल तक के बच्चे शामिल हैं, जिनकी जांच में बीमारी की पुष्टि हो चुकी है। 

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स्वास्थ्य विभाग की ओर से ब्लॉकवार लगाए जाने वाले कैंप में बच्चों के दिल में छेद की पुष्टि होती है, लेकिन ऐसे बच्चों की सर्जरी वाराणसी में नहीं हो पा रही है। इन बच्चों को लेकर परिजनों को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। यहां भी सर्जरी के लिए तारीख मिलने के बाद ही प्रक्रिया पूरी हो पाती है।
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यह स्थिति तब है, जब आईएमएस बीएचयू में भी दिल में छेद वाले बच्चों की सर्जरी की पूरी व्यवस्था मौजूद है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई कि बच्चों की सर्जरी अलीगढ़ की जगह आईएमएस बीएचयू में ही कराई जाए। चिकित्सकों के अनुसार यह समस्या बच्चों में जन्मजात होती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, समस्या भी बढ़ने लगती है। 

आरबीएसके हरहुआ के नोडल अधिकारी डॉ. अब्दुल जावेद का कहना है कि हर महीने औसतन एक ब्लॉक से दो बच्चे इस बीमारी के मिलते हैं। कैंप में जिन बच्चों के दिल में छेद की पुष्टि होती है, उनकी सूचना सीएमओ कार्यालय को दी जाती है। शासन स्तर से अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज को अधिकृत किया गया है, जहां सर्जरी से जुड़ा पूरा खर्च दिया जाता है। 

ब्लॉकवार टीम करती है बच्चों की जांच : स्वास्थ्य विभाग की ओर से ब्लॉकवार चलने वाले राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत बच्चों की जांच कराई जाती है। इसमें काशी विद्यापीठ, हरहुआ, चिरईगांव, सेवापुरी, आराजीलाइन, बड़ागांव, चोलापुर, पिंडरा ब्लॉक में आरबीएसके टीम नोडल अधिकारी के निर्देशन में सरकारी विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर कैंप लगाकर बच्चों की जांच करती है। अगर किसी बच्चे में दिल में छेद जैसे लक्षण मिलते हैं, तो उन्हें जिला अस्पताल भेजकर आगे की जांच कराई जाती है।

हरहुआ के अनौरा गांव निवासी विनोद कुमार का दो महीने का बेटा है। जब वह 25 दिन का था, तब उसे सांस लेने में परेशानी हुई। कैंप के दौरान हरहुआ में आरबीएसके नोडल अधिकारी डॉ. अब्दुल जावेद ने उसे देखा और जांच करवाई, तो बच्चे के दिल में छेद की पुष्टि हुई। अलीगढ़ में सर्जरी होने की जानकारी देकर औपचारिकताएं पूरी करवाई जा रही हैं।

चिरईगांव के कमौली गांव निवासी 8 साल के बच्चे प्रिंस के दिल में छेद की पुष्टि डॉक्टरों ने गांव में लगे कैंप में की। उसकी सर्जरी करवाने का निर्णय लिया गया। अब तक कई बार प्रयास हुआ, लेकिन सर्जरी की तारीख नहीं मिल पा रही है। अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज से जब सर्जरी की तारीख मिलेगी, तभी परिजन उसे लेकर जाएंगे।

आरबीएसके टीम की जांच में जिन बच्चों के दिल में छेद की पुष्टि होती है, उनकी सर्जरी की सभी औपचारिकताएं पूरी कराकर परिजनों को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। शासन स्तर पर फिलहाल इसी मेडिकल कॉलेज को अधिकृत किया गया है। बीएचयू में फिलहाल बच्चों की जांच की प्रक्रिया शुरू कराई गई है और सर्जरी भी कराने की दिशा में पहल चल रही है। - डॉ. संजय राय, नोडल अधिकारी, आरबीएसके

दिल में छेद वाले बच्चों की सर्जरी की उनके संस्थान (आईएमएस) में पूरी व्यवस्था है। कई बच्चों का इलाज भी किया जा चुका है। ऐसे बच्चों की सर्जरी के लिए संस्थान के उच्चाधिकारियों से स्वीकृति मिलते ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की पहल पर दिल में छेद वाले बच्चों की जांच के लिए एक कैंप भी लगाया गया था। बीएचयू में इस सर्जरी के शुरू होने से वाराणसी ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के बच्चों को भी बड़ी राहत मिलेगी। - प्रो. विकास अग्रवाल, हृदय रोग विभागाध्यक्ष, बीएचयू

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