UP: झारखंड के पलामू में अफीम की खेती और पंजाब में तस्करी, गिरोह के तीन अरेस्ट; यहां मिलता है 50 गुना अधिक दाम
Sonbhadra News: झारखंड के पलामू में अफीम की खेती कर पंजाब में तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के तीन सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। एक आरोपी तीन दिन पहले मुठभेड़ के दौरान पकड़ा गया था, जबकि अन्य की तलाश में टीमें लगी थीं। जांच में खुलासा हुआ कि पंजाब में डोडा आठ गुना और अफीम 50 गुना अधिक कीमत पर बेची जा रही थी।
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UP News: झारखंड के पलामू में अफीम की खेती के साथ ही पंजाब में अफीम और डोडा की तस्करी करने वाले गिरोह के तीन व्यक्तियों को पुलिस ने बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किया।गिरोह के एक सदस्य को तीन दिन पूर्व मुठभेड़ में दबोचा गया था। शेष की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगाई गई थीं। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। पकड़े गए तीनों आरोपियों का पूछताछ के बाद चालान कर दिया गया।
एएसपी मुख्यालय अनिल कुमार ने दोपहर बाद पुलिस लाइन में डोडा-अफीम तस्करी गिरोह के मास्टरमाइंड सहित तीन को दबोचे जाने की जानकारी दी। बताया कि एक जून को चोपन, रॉबर्ट्सगंज थाना और एसओजी की संयुक्त टीम की मादक पदार्थ तस्करों से मुठभेड़ हुई थी।
इसमें लुधियाना (पंजाब) जिले के मेहरबाना थाना के ख्वाजके निवासी प्रिंस सिंह को दबोचा गया था। उसका साथी रोहित सिंह अंधेरे का फायदा उठाते हुए भाग निकला। पूछताछ में दो अन्य आरोपियों के नाम सामने आए। उनकी गिरफ्तारी के लिए एसपी अभिषेक वर्मा ने टीम गठित की।
प्रभारी निरीक्षक गोपाल जी गुप्ता की अगुवाई वाली टीम ने बुधवार की रात मारकुंडी बस स्टैंड के पास घेराबंदी कर ख्वाजके निवासी रोहित को गिरफ्तार किया। उससे मिली जानकारी के आधार पर दबिश देकर पलामू (झारखंड) जिले के पिपराडाड़ थाना के तितलंगी निवासी पिंटू यादव और पांकी थाना क्षेत्र के जांजो निवासी सत्यपाल खरवार को भी गिरफ़्तार कर लिया गया। पुलिस का दावा है कि रोहित के पास से एक तमंचा और एक जिंदा कारतूस की बरामदगी भी की गई।
झारखंड से पंजाब तक ऐसे पहुंचता था डोडा-अफीम
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पिंटू और सत्यपाल पलामू के किसानों से डोडा-अफीम खरीदते थे। वह खुद भी अफीम (पोस्त) की खेती करते थे। पोस्ता का दूध निकालकर उसे अफीम की शक्ल दी जाती थी। वहीं पोस्ता की सूखी फली (डाेडा) को भी तस्करी के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इसकी डील डाल्टेनगंज में की जाती थी। किसानों से 200 रुपये किलो डोडा और तीन हजार रुपये किलो अफीम खरीदने के बाद चारों मिलकर पंजाब में 1500 रुपये किलो की दर से डोडा और डेढ़ लाख रुपये किलो की दर से अफीम बेचते थे। मुनाफे को आपस में बांट लेते थे।
ढाई लाख में पिंटू ने उपलब्ध कराई थी 2.25 कुंतल डोडा और तीन किलो अफीम
पंजाब के लुधियाना निवासी आरोपियों की 28 मई को पिंटू से बात हुई थी। इसके बाद वह झारखंड के डाल्टेनगंज के लिए रवाना हुए थे। 31 मई को वह डाल्टेनगंज पहुंचे। वहां पारकर पंकी रोड स्थित पेट्रोल पंप के पीछे वाले रोड पर अपनी बोलेरो खड़ी की। वहां से पिंटू ने उन्हें अपने गाड़ी में ले लिया। उन्होंने पिंटू को ढाई लाख दिए। इसके कुछ देर बाद अफीम और डोडे की खेप लाकर बोलेरो में लाद दी गई।
छह महीने से हो रहा सोनभद्र के रूट का इस्तेमाल
डोडा-अफीम के लिए रोहित और प्रिंस छह माह से सोनभद्र के रूट का इस्तेमाल कर रहे थे। पूछताछ में खुद यह जानकारी प्रिंस ने दी थी कि वह स्वयं तीन बार सोनभद्र होते हुए इसकी खेप ले जा जा चुका है। लुधियाना में वह इसे ट्रक वालों को उपलब्ध कराते थे। जब मादक पदार्थ खत्म हो जाता, तब पिंटू और उसके जरिए सत्यपाल से संपर्क कर मंगा लिया जाता। आरोपियों ने दावा कि पंजाब में ज्यादातार लोग डोडा और अफीम खाते हैं। अफीम महंगी है इसलिए उसे हर कोई नहीं ले पाता। इसके लिए नशे की तलब रखने वाले लोग डोडा को ज्यादा तरजीह देते हैं। लुधियान में अफीम 7500 की 50 और डोडा 1500 रुपये किलो आसानी से बिक जाता है।