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हाथी का उत्पात: महावत की छाती, जांघ, हाथ और निजी अंग को कुचला, दो किमी तक कर्फ्यू जैसे हालात; देखें टाइमिंग

Mon, 19 Oct 2026 02:38 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 19 Oct 2026 02:38 PM IST
सार

हाथी के उत्पात से इलाके में दहशत फैल गई। बिदके हाथी ने महावत की छाती, जांघ, हाथ और निजी अंग को कुचल दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद दो किलोमीटर के दायरे में कर्फ्यू जैसे हालात बन गए। हाथी को नियंत्रित करने के लिए करीब तीन घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी।

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Rampaging elephant crushes mahout chest thigh arm and private parts curfew like conditions prevail
घायल महावत छापलू और उत्पाद मचाता हाथी। - फोटो : संवाद

विस्तार

रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला में रविवार को ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। रामलीला के लिए आजमगढ़ से लाया गया 21 वर्षीय हाथी धनराज सुबह करीब 10:30 बजे जंजीर तोड़कर बेकाबू हो गया। करीब 11 घंटे तक चले घटनाक्रम में हाथी ने महावत छापलू को गंभीर रूप से घायल कर दिया। पंचवटी से लंका मार्ग तक दहशत फैल गई। हाथी को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग और पुलिस की टीमों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। आखिरकार गोरखपुर चिड़ियाघर से पहुंची विशेषज्ञ टीम की मदद से रात करीब 10 बजे उसे काबू किया जा सका।

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इस घटना ने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा किया कि रामलीला जैसे बड़े आयोजन में हाथियों की मौजूदगी के बावजूद आपात स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त संसाधन क्यों नहीं थे। हाथी को शांत करने के लिए जरूरी इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। इसके बाद गोरखपुर से जाइलाजीन इंजेक्शन मंगवाया गया और विशेषज्ञों की निगरानी में हाथी को नियंत्रित किया गया।

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जंजीर तोड़कर निकला, महावत को पटककर किया घायल
रामनगर की रामलीला के लिए राजपरिवार की ओर से आजमगढ़ के बरदा गांव निवासी शिबली सिंह का हाथी धनराज मंगवाया गया था। परंपरा के अनुसार, उसे पंचवटी स्थित मैदान में पेड़ के नीचे जंजीर से बांधकर रखा जाता है। इसी हाथी पर सवार होकर काशीराज परिवार के डॉ. अनंत नारायण सिंह के बेटे रामलीला देखने जाते हैं।

रविवार सुबह हाथी के बेकाबू होने से स्थिति बिगड़ गई। उसे काबू करने पहुंचे महावत छापलू ने प्रयास किया तो हाथी ने उन्हें सूंड में फंसाकर दीवार से टक्कर मारी और जमीन पर पटक दिया। हमले में उनकी छाती, जांघ, हाथ और निजी अंग में गंभीर चोटें आईं। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उन्हें बचाया। पहले उन्हें लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ले जाया गया, जहां से बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया।

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बिजली के खंभे उखाड़े, दुकानों और मकानों को नुकसान
पंचवटी मैदान से निकलने के बाद हाथी ने आसपास के क्षेत्र में जमकर उत्पात मचाया। उसने मंडी का गेट तोड़ दिया और बिजली के दो खंभे उखाड़ दिए। पेड़ों की डालियां तोड़ने के साथ सड़क किनारे एक मकान के बाहर लगा टीनशेड भी क्षतिग्रस्त कर दिया। 33 हजार वोल्ट की बिजली लाइन का खंभा गिरने से रामनगर की बिजली आपूर्ति करीब दो घंटे तक बाधित रही। बाद में जिवनाथपुर विद्युत उपकेंद्र से बाईपास कर आपूर्ति बहाल की गई, जबकि साहूपुरी से आने वाली बिजली की आपूर्ति शाम सात बजे तक बंद रही।

हाथी के उत्पात के बीच पंचवटी-लंका मार्ग पर आवागमन रोक दिया गया। करीब दो किलोमीटर के दायरे में लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाई गई। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद किया और लोगों को घरों में रहने की हिदायत दी। दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दीं। आसपास के लोगों के मुताबिक, अचानक हुई तेज आवाज और चीख-पुकार से कुछ देर के लिए उन्हें भूकंप आने जैसा अहसास हुआ।

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दूर से हाथी का उत्पात देखती भीड़। - फोटो : संवाद

स्थानीय संसाधन नाकाफी, गोरखपुर से बुलानी पड़ी टीम
हाथी को नियंत्रित करने के लिए रामनगर पुलिस, वन विभाग और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। अन्य हाथियों के महावतों की मदद भी ली गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। वन विभाग के पास हाथी को शांत करने के लिए जरूरी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं था। ऐसे में गोरखपुर चिड़ियाघर से विशेषज्ञ टीम बुलाई गई। टीम शाम करीब सात बजे पहुंची और लगभग तीन घंटे की मशक्कत के बाद हाथी को नियंत्रित किया गया। इसके बाद उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाकर रामबाग में रखा गया।

डीसीपी काशी गौरव बंशवाल के मुताबिक, दुर्गा पूजा और रामलीला मेले को देखते हुए एहतियातन पुलिस बल तैनात किया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर पंचवटी-लंका मार्ग पर यातायात रोका गया। वहीं, डीएफओ निधि चौहान के अनुसार, हाथी को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने के लिए गोरखपुर चिड़ियाघर से पशु चिकित्सकों की टीम बुलाई गई थी।

पहली बार हाथी के कारण स्थगित हुई रामलीला
रामनगर की रामलीला में हाथियों का इस्तेमाल लंबे समय से परंपरा का हिस्सा रहा है। हालांकि, हाथियों के बेकाबू होने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। लगभग डेढ़ दशक पहले जनकपुर में फुलवारी की लीला के दौरान एक हाथी ने महावत के सहयोगी को पटककर मार डाला था। वर्ष 1978 में ताड़कावध की लीला वाले दिन राजपरिवार का प्रिय हाथी मंगला भी बेकाबू हो गया था। उसे काबू करने के प्रयास के दौरान वह गिर पड़ा और बाद में उसकी मौत हो गई।

रविवार की घटना में हाथी के उत्पात और सुरक्षा संबंधी जोखिम को देखते हुए रामलीला स्थगित करनी पड़ी। आयोजनों में हाथियों की भूमिका और उनकी देखभाल के साथ आपात स्थिति में त्वरित नियंत्रण की व्यवस्था पर अब नए सिरे से विचार करने की जरूरत महसूस की जा रही है। घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि बड़े धार्मिक आयोजनों में प्रशिक्षित विशेषज्ञों, जरूरी चिकित्सा संसाधनों और पशु नियंत्रण की पूर्व तैयारी का होना कितना महत्वपूर्ण है।

घटना की टाइमिंग
10:30 बजे सुबह हाथी बेकाबू हो गया।
12:00 बजे बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई।
07:00 बजे शाम को गोरखपुर से वन विभाग की टीम आई।
10:00 बजे रात हाथी को काबू किया गया।

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