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मातम में बदलीं त्योहार में खुशियां: किसी का सुहाग उजड़ा, कोई हुआ अनाथ; तीन की माैत; अकेले पड़ गए पिता

Mon, 19 Oct 2026 07:07 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, भदोही।
अमर उजाला नेटवर्क, भदोही। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 19 Oct 2026 07:07 AM IST
सार

भदोही में सड़क हादसे में तीन युवकों की मौत से तीन परिवारों में मातम पसरा है। त्योहार पर खुशियां मनाने घर आए युवक अब कभी नहीं लौटेंगे। सूरज रविवार को ही घर आया था, जबकि विवेक 15 दिन पहले पहुंचा था। हादसे ने परिवारों की खुशियां छीन लीं। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है।

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Festive joy mourning lives shattered wives lose husbands children left orphaned three dead in bhadohi
तीन युवकों की माैत के बाद परिवार में मातम पसरा। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

महराजगंज में औराई के इटवां के पास हाईवे की सर्विसलेन पर हुई दुर्घटना से एक साथ तीन परिवारों में त्योहारों की खुशियां मातम में बदल गईं। हादसे में जान गंवाने वाले तीन में दो युवक महानगरों में मजदूरी कर परिवार की आजीविका चलाते थे। इन दिनों नवरात्र व दशहरा पर्व पर वे घर लौटे थे। सूरज तो रविवार की सुबह ही घर लौटा था और दोस्तों को लेकर पार्टी करने महराजगंज बाजार गया था।

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औराई कोतवाली के इटवां के पास अनियंत्रित होकर हाईवे के गड्ढे में पलटने वाली बाइक पर सवार सूरज बिंद, विवेक बिंद और पुनीत बिंद दोस्त थे। जिसमें सूरज और विवेक बाहर रहकर मजदूरी करते थे। इन दिनों नवरात्र और दशहरा मेला चल रहा है और दिवाली का त्योहार आने वाला है। सूरज तो रविवार को ही घर लौटा था। वह सूरत में एक कपड़े की दुकान पर मजदूरी करता था।

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हादसे के बाद लगी भीड़। - फोटो : संवाद

वहीं विवेक गुजरात की स्टील कंपनी में काम करता था और वह 15 दिन पहले लौटा था। उन्हें नहीं पता था कि त्योहार पर खुशियां मनाने घर आना उनका आखिरी सफर है। घटना से तीनों परिवारों में मातम पसरा हुआ है। वहीं पूरे गांव में शोक है। कोई नहीं जानता था कि त्योहारी खुशियों के बीच इतनी बड़ी आफत आ जाएगी। इनका दोस्त पुनीत हाईस्कूल का छात्र था। वह चार भाइयों में सबसे छोटा था। मिर्जापुर जिले के लोहरापुर के एक स्कूल में पढ़ता था। उसके पिता मुंबई में दिहाड़ी पर मजदूरी का कार्य करते हैं। इस हादसे ने तीनों परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दीं।

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इसी बाइक पर सवार थे तीनों। - फोटो : संवाद

चार बहनों की थी जिम्मेदारी, अब अकेले पड़ गए पिता
घटना में जान गंवाने वाला सूरज पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। वह और उसके पिता परिवार की आजीविका चलाने के लिए बाहर काम करते हैं। पिता पप्पू बिंद मुंबई में मजदूरी करते हैं। पप्पू से चार-चार छोटी बेटियां हैं। अभी किसी की शादी भी नहीं हुई है। इन सबकी जिम्मेदारी सूरज और उनके पिता पर थी, लेकिन सूरज की मौत के बाद अब पिता अकेले पड़ गए हैं।

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पुनीत, विवेक और सूरज की फाइल फोटो। - फोटो : संवाद

उजड़ गया सुहाग, अनाथ हो गए दो बच्चे
29 साल के विवेक चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था। वह और उसके पिता चुन्नी लाल गुजरात की स्टील कंपनी में काम करते हैं। उससे एक ढाई और दूसरा डेढ़ साल का बेटा है। विवेक की मौत के बाद उसकी पत्नी गुड़िया का रो-रोकर बुरा हाल है। पति की मौत से एक तरफ उसका सुहाग उजड़ गया, वहीं दूसरी तरफ उसके दोनों बच्चे भी अनाथ हो गए। उसका करुण क्रंदन सुनकर हर किसी के आंखों में आंसू आ जा रहे थे।

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