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मां के खुले पट: जगतजननी के उत्सव में वंदन के लिए उठे हाथ, मंत्रों से गूंजे पंडाल; शुभ मुहूर्त में पूजन

Sun, 18 Oct 2026 03:01 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 18 Oct 2026 03:01 PM IST
सार

मूल नक्षत्र और दोपहर में धनु लग्न के शुभ मुहूर्त में वैदिक विधि-विधान से सप्तमी पूजा संपन्न हुई। मां दुर्गा के पट खुलते ही दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। पंडालों में मंत्रोच्चार और जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। जगतजननी के दर्शन-वंदन के लिए श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर सुख-समृद्धि की कामना की।

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sanctum doors open hands raised worship during festival Universal pandals resonate sacred chants
शिवपुर स्थित मिनी स्टेडियम। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर शनिवार को पूजा के साथ दुर्गा पूजा का उल्लास छा गया। शहर से गांव तक पंडालों में माता के पट खुलते ही शिव की नगरी में शक्ति की आराधना के रंग और भी चटख हो गए। 

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इसके साथ ही दुर्गोत्सव का चार दिवसीय अनुष्ठान और उत्सवी आभा निखरने लगी। शनिवार को शहर के पंडालों में देश-विदेश के मंदिरों की झलक के साथ हवामहल, कांतारा, बरगी डैम हादसे और ऑपरेशन सिंदूर की थीम  पंडालों में मूल नक्षत्र में सुबह 9:20 बजे और दोपहर में धनु लग्न के शुभ मुहूर्त में वैदिक विधि से पूजा हुई। प्रतिमाओं के पट खुलने के साथ ही मां के जयकारे रात तक गूंजते रहे। 

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मां कालरात्रि के दर्शन को गलियों में लगी कतार, मांगी सुख-समृद्धि
वाराणसी। शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर जगदंबा के कालरात्रि स्वरूप का दर्शन-पूजन हुआ। श्री काशी विश्वनाथ गली स्थित मां कालरात्रि के दर्शन के लिए संकरी गलियों में भक्तों की कतार लगी रही। भोर से रात तक भक्त दर्शन के लिए पहुंचते रहे। भक्त चुनरी, नारियल आदि नैवेद्य चढ़ाकर मां की शृंगारित झांकी के दर्शन कर निहाल हुए। उन्होंने मां से सुख-समृद्धि की कामना की।

महंत परिवार ने भोर में मां को पंचामृत स्नान कराकर सुगंधित फूलों, नवीन वस्त्रों और आभूषणों से अलंकृत किया। इसके बाद मां का शृंगार किया गया। मंगला आरती के बाद मंदिर का पट खुलते ही मां के जयकारों के साथ दर्शन शुरू हो गए। मंदिर के आसपास की गलियों में भक्तों की कतार लगी रही। दोपहर में भीड़ कम रही, मगर शाम को फिर बढ़ गई। शयन आरती के बाद मंदिर का पट बंद हो गया।

भोजूबीर पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग स्थित मां दक्षिणेश्वरी काली मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए भीड़ रही। यहां पूरी रात निशा पूजा हुई। महंत गोपाल गिरि व व्यवस्थापक राजेश गिरि के सानिध्य में सुबह मां को पंचामृत स्नान कराकर वस्त्र और रजत मुंडमाला पहनाई गई। इसके बाद मंगला आरती हुई। मंदिर में फूलों, पत्तियों और विद्युत झालरों से आकर्षक सजावट की गई थी। मां को छप्पन भोग लगाया गया। 

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प्राण प्रतिष्ठा कर मां को दी रोशनी : बंगीय पूजा पंडालों में महासप्तमी पूजा हुई। नवपत्रिका प्रवेश, स्थापना और कल्पारंभ की विधिवत पूजा की गई। सुबह विधि-विधान से प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा कर मां की आंखों में ज्योति प्रदान की गई। 

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