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Sawan 2026: इस बार 23 साल बाद बन रहा नागपंचमी का महासंयोग, रक्षाबंधन पर भद्रा का साया भी नहीं
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Fri, 05 Jun 2026 04:01 PM IST
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सार
Varanasi News: इस बार 23 साल बाद नागपंचमी का महासंयोग बन रहा है। वहीं रक्षाबंधन पर भी भद्रा का साया नहीं होगा। सावन के चार सोमवार में दो बेहद दुर्लभ और विशेष संयोग होंगे। भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने से राहु-केतु के दोषों से मुक्ति मिलेगी।
Sawan Shivratri 2026
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इस साल सावन का महीना शिव भक्तों के लिए बेहद खास और विशेष फलदायी होने जा रहा है। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार, इस बार सावन के चार सोमवार में दो में बेहद दुर्लभ और विशेष संयोग बन रहे हैं। सबसे बड़ा संयोग सावन के तीसरे सोमवार यानी 17 अगस्त को देखने को मिलेगा। इस दिन नागपंचमी है।
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आमतौर पर नागपंचमी सावन के सोमवार से आगे-पीछे पड़ती है, लेकिन सोमवार और नागपंचमी एक दिन ही पड़ रहा है। ये महासंयोग पूरे 23 साल बाद बन रहा है। इससे पहले ऐसा संयोग वर्ष 2003 में बना था। इस विशेष दिन सुबह के समय भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने से राहु-केतु के दोषों से मुक्ति मिलती है।
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ज्योतिष संहिता ग्रंथ के अनुसार, इस बार नागपंचमी के दिन ही सिंह संक्रांति भी पड़ रही है। जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, तो उसे संक्रांति कहा जाता है। श्रावण मास में यदि सोमवार के दिन सूर्य का सिंह राशि में प्रवेश हो तो प्राचीन ग्रंथों के अनुसार छत्र भंग नामक योग का निर्माण होता है, इसे ज्योतिषीय दृष्टि से सत्ता परिवर्तन या बड़े राजनीतिक बदलावों का सूचक माना जाता है। हालांकि, प्रो. द्विवेदी ने इसका दूसरा सकारात्मक पक्ष रखते हुए बताया कि सोमवार का दिन चंद्रमा का होता है, जो जनसामान्य, मन, शीतलता और संतोष का कारक है। ऐसे में इस संयोग से आम लोगों के जीवन में संतोष, स्थिरता और सामाजिक समन्वय की वृद्धि होगी।
भद्रा मुक्त रहेगा रक्षाबंधन, दिन भर बंध सकेगी राखी
बहनों के लिए भी इस बार का रक्षाबंधन बेहद सुलभ और शुभ रहने वाला है। इस साल 28 अगस्त को पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन मनाया जाएगा और सबसे अच्छी बात यह है कि इस दिन किसी भी प्रकार का भद्रा (अशुभ काल) नहीं लग रहा है। ऐसा संयोग पूरे 5 साल बाद बन रहा है, क्योंकि इससे पहले वर्ष 2021 में भद्रा रहित रक्षाबंधन था। इस बार भद्रा न होने के कारण बहनें दिन भर भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी। शास्त्रों के नियमों के अनुसार त्योहार उदय तिथि में मनाया जाएगा। सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होकर अगले दिन 28 अगस्त 2026 को सुबह 9:48 बजे समाप्त हो जाएगी। चूंकि पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त को सुबह जल्दी समाप्त हो रही है, इसलिए शास्त्रों के अनुसार राखी बांधने का सबसे उत्तम और मुख्य मुहूर्त सुबह 05:57 बजे से लेकर सुबह 09:48 बजे तक (लगभग 3 घंटे 51 मिनट) का रहेगा।
बहनों के लिए भी इस बार का रक्षाबंधन बेहद सुलभ और शुभ रहने वाला है। इस साल 28 अगस्त को पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन मनाया जाएगा और सबसे अच्छी बात यह है कि इस दिन किसी भी प्रकार का भद्रा (अशुभ काल) नहीं लग रहा है। ऐसा संयोग पूरे 5 साल बाद बन रहा है, क्योंकि इससे पहले वर्ष 2021 में भद्रा रहित रक्षाबंधन था। इस बार भद्रा न होने के कारण बहनें दिन भर भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी। शास्त्रों के नियमों के अनुसार त्योहार उदय तिथि में मनाया जाएगा। सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होकर अगले दिन 28 अगस्त 2026 को सुबह 9:48 बजे समाप्त हो जाएगी। चूंकि पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त को सुबह जल्दी समाप्त हो रही है, इसलिए शास्त्रों के अनुसार राखी बांधने का सबसे उत्तम और मुख्य मुहूर्त सुबह 05:57 बजे से लेकर सुबह 09:48 बजे तक (लगभग 3 घंटे 51 मिनट) का रहेगा।