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Siberian Birds: सेल्फी, दाना और रील…बिगाड़ रहे साइबेरियन पक्षियों का संतुलन, खराब हो रही प्रजनन क्षमता

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 11 Jan 2026 03:50 PM IST
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सार

Varanasi News: हजारों किलोमीटर का सफर तय कर बनारस आने वाली साइबेरियन पक्षी की प्रजनन क्षमता कम हो रही है। पर्यटक उन्हें कुछ भी खिला दे रहे हैं, इससे उन पर काफी बुरा असर पड़ रहा है।

Selfies feeding and reels re disrupting balance of Siberian birds and impairing reproductive capacity
साइबेरियन पक्षी। - फोटो : अमर उजाला।
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विदेशों से हजारों किलोमीटर का सफर कर काशी आए साइबेरियन पक्षियों को दाना खिलाना कौन नहीं चाहता, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। घाट किनारे मिलने वाले बेसन के दाने इन मेहमानों की प्रजनन क्षमता बिगाड़ रहे हैं। यही कारण है कि इन मेहमानों की संख्या हर साल 10 से 15 फीसदी कम हो रही है।

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गंगा में हर साल ठंड के मौसम में बड़ी संख्या में साइबेरियन पक्षी देखने को मिलते हैं। इस बार भी ऐसा ही है, लेकिन इनकी संख्या पहले के कुछ वर्षों की अपेक्षा कम है। इसके लिए नौकायान करने वाले यात्री, स्थानीय प्रशासन और आम जन सभी जिम्मेदार हैं। बीएचयू के पक्षी वैज्ञानिकों के मुताबिक जनवरी 2025 में 11.2 लाख पक्षी भारत आए थे। इस साल पहले की अपेक्षा इनकी संख्या 10 फीसदी कम है। गंगा में नौकायान के दौरान लोग जो बेसन का दाना, फल आदि पक्षियों को खिलाते हैं, वह उनके लिए हानिकारक है।
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अस्सी घाट पर यह पैकेट सबसे अधिक बिक रहे हैं। इसी घाट से यात्री नौकायान के लिए बैठते हैं और नमो घाट तक यात्रा करते हैं। इस दौरान गंगा में साइबेरियन पक्षियों को खूब दाना खिलाया जाता है। महंगाई के इस दौर में महज 10 से 20 रुपये में मिलने वाला यह दाना खराब गुणवत्ता वाले बेसन और तेल से बना होता है, जो इसे खाने वाले पक्षियों की सेहत बिगाड़ रहा है।

पिछली बार आए थे 196 प्रकार के पक्षी, इस बार 170 
बीएचयू के पक्षी वैज्ञानिकों ने बताया कि जनवरी 2025 के आंकड़ों के अनुसार देश में 196 प्रकार के साइबेरियन पक्षी पाए गए थे। इस बार इनकी संख्या घटकर 170 प्रकार तक ही सीमित रह गई है। जैविक संतुलन बिगड़ने के कारण ही इनकी संख्या में कमी आई है। 

इसलिए आते हैं साइबेरियन पक्षी
साइबेरिया और रूस में अत्यधिक ठंड के कारण भोजन और अनुकूल जलवायु की तलाश में ये पक्षी भारत आते हैं। वाराणसी के गंगा घाट उन्हें तीन-चार महीनों के लिए सुरक्षित और गर्म स्थान, पर्याप्त भोजन तथा प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण देते हैं। 

पैकेट बंद दाना और फल खिलाने से साइबेरियन पक्षियों की सेहत बिगड़ रही है। इनकी प्रजनन क्षमता प्रभावित हो रही है और जैविक संतुलन बिगड़ रहा है। इन पक्षियों को किसी भी प्रकार का खाना नहीं देना चाहिए। ये छोटी मछलियां खाते हैं। - प्रो. चंदना हलधर, पक्षी वैज्ञानिक, बीएचयू

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