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आईएमएस बीएचयू में सफल सर्जरी: ट्यूमर ने छीना जबड़ा, डॉक्टरों ने पैर की हड्डी से दी नई जिंदगी

Sat, 08 Aug 2026 04:12 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Sat, 08 Aug 2026 04:12 PM IST
सार

Varanasi News: आईएमएस बीएचयू में डॉक्टर नें पैर की हड्डी से ट्यूमर ग्रसित का निचला जबड़ा बनाया। 35 वर्षीय व्यक्ति लखीमपुर खीरी से बीएचयू में इलाज कराने के लिए आया, जहां उसका सफल ऑपरेशन हो सका।  

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Successful surgery for lower jaw tumor at BHU new jaw created using leg bone in Varanasi
आईएमएस बीएचयू में सफल ऑपरेशन करने वाली टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय में एक जटिल ऑपरेशन किया गया। ओरल एवं मैक्सिलोफेसियल सर्जरी (OMFS) इकाई ने 35 वर्षीय एक व्यक्ति के निचले जबड़े के ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया। इस प्रक्रिया में मरीज के पैर की फिबुला हड्डी से नया जबड़ा बनाया गया।

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मरीज लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश का निवासी है और एक वाहन कंपनी में वाहन धोने वाला कर्मचारी है। वह प्रो. अखिलेश कुमार सिंह के बाह्य रोगी विभाग में आया था। उसे चेहरे पर सूजन और निचले जबड़े में विषमता की शिकायत थी। 
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जांच में उसके निचले जबड़े में एक बड़ा ट्यूमर पाया गया। इसने जबड़े की बनावट को पूरी तरह बदल दिया था। मरीज लगभग सात वर्षों से एमेलोब्लास्टोमा नामक ट्यूमर से पीड़ित था। उसने कई स्थानों पर उपचार कराया, पर कोई स्थायी लाभ नहीं मिला। अंततः उसे उपचार के लिए बीएचयू आने की सलाह दी गई। यह जटिल ऑपरेशन ट्रॉमा सेंटर के ओरल एवं मैक्सिलोफेसियल सर्जरी शल्य चिकित्सा कक्ष में लगभग आठ घंटे तक चला।

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दाहिने पैर की फिबुला हड्डी से बना नया जबड़ा
इस जटिल शल्यक्रिया में मरीज के ट्यूमर से प्रभावित निचले जबड़े को पूरी तरह निकाला गया। फिर दाहिने पैर की फिबुला हड्डी से नया जबड़ा तैयार किया गया। माइक्रोवैस्कुलर तकनीक से फिबुला की धमनियों को गर्दन की धमनियों से जोड़कर रक्त संचार स्थापित किया गया। इस प्रक्रिया को माइक्रोवैस्कुलर फ्री फिबुला फ्लैप रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी कहा जाता है।

सामान्य हो गई चेहरे की बनावट
ऑपरेशन के बाद मरीज के चेहरे की बनावट सामान्य हो गई है। उसे सामाजिक रूप से आत्मविश्वास वापस मिला है और वह मानसिक रूप से काफी खुश है। उसके पैर में किसी प्रकार की कमजोरी नहीं है। वह सामान्य रूप से चल-फिर रहा है। दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. एच.सी. बरनवाल ने इस सफल शल्यप्रक्रिया के लिए पूरी चिकित्सक टीम को शुभकामनाएं दीं।

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